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Sitapur News: सरयू का जलस्तर घटा तो शुरू हो गई कटान
Wed, 05 Jul 2023 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 05 Jul 2023 12:02 AM IST
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रामपुर मथुरा/सीतापुर। सरयू के जलस्तर में मामूली गिरावट के बाद अब धीमी गति से कटान शुरू हो गई है। अखरी गांव कटान के मुहाने पर है। यहां के बाशिंदों को अपना आशियाना नदी में समाने की चिंता सताने लगी है। नेपाल में बारिश थमने से यहां सरयू घटने लगी है। मंगलवार को सरयू का जलस्तर 118 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में जलस्तर 10 सेमी कम हुआ है। हालांकि पानी घटने से धीमी गति से कटान होने लगी है। कटान की कगार पर अखरी गांव है।
स्थानीय लोग बोले- सिर्फ मिली झूठी दिलासा
स्थानीय निवासी जुगल किशोर की मानें तो कटान रोकने के सारे सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। कटान अगर इसी तरह होता रहा तो सबसे पहले उनका आशियाना नदी में समा जाएगा।
अशोक कुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग कटान रोधी कार्यों में महज रस्म अदायगी करता है। जिम्मेदार गांव को बचाने के लिए गंभीर नहीं है। इसीलिए बचाव कार्य में देरी के साथ गुणवत्ता की अनदेखी की जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक अधिकारी भी केवल झूठा आश्वासन देते हैं। बांस की बाड़ को नदी की कुछ गहराई में लगाकर कटान रोकने का दावा सिर्फ छलावा है। महमूदाबाद तहसीलदार सुखवीर सिंह ने बताया कि बचाव कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। जहां-जहां कटान से बचाव के लिए स्टड या बंबू क्रेट बनाए गए हैं, वहां के गांव सुरक्षित रहेंगे।
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सूखी लकड़ी एकत्र करने में जुटी महिलाएं
रेउसा/सीतापुर। सरयू का पानी अभी नदी के दायरे से बाहर नहीं निकला है। लेकिन जलस्तर बढ़ता देख तटवर्ती गांवों के लोग सहमे हुए हैं। लिहाजा, बाढ़ के समय आने वाली मुश्किलों से निपटने के लिए अभी से तैयारी करने लगे हैं। मंगलवार को भरथा गांव की साकिरा लकड़ी की गठरी सिर पर लेकर जा रही थी। पूछने पर बताया कि उन्हें उज्जवला योजना का लाभ भी नहीं मिला है। इसलिए चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ता है। बाढ़ आने पर सूखी लकड़ियां नहीं मिलती हैं तो खाना बनाने की समस्या होती है। इसलिए अभी से सूखी लकड़ियां एकत्र करना शुरू कर दिया है।
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स्थानीय लोग बोले- सिर्फ मिली झूठी दिलासा
स्थानीय निवासी जुगल किशोर की मानें तो कटान रोकने के सारे सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। कटान अगर इसी तरह होता रहा तो सबसे पहले उनका आशियाना नदी में समा जाएगा।
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अशोक कुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग कटान रोधी कार्यों में महज रस्म अदायगी करता है। जिम्मेदार गांव को बचाने के लिए गंभीर नहीं है। इसीलिए बचाव कार्य में देरी के साथ गुणवत्ता की अनदेखी की जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक अधिकारी भी केवल झूठा आश्वासन देते हैं। बांस की बाड़ को नदी की कुछ गहराई में लगाकर कटान रोकने का दावा सिर्फ छलावा है। महमूदाबाद तहसीलदार सुखवीर सिंह ने बताया कि बचाव कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। जहां-जहां कटान से बचाव के लिए स्टड या बंबू क्रेट बनाए गए हैं, वहां के गांव सुरक्षित रहेंगे।
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सूखी लकड़ी एकत्र करने में जुटी महिलाएं
रेउसा/सीतापुर। सरयू का पानी अभी नदी के दायरे से बाहर नहीं निकला है। लेकिन जलस्तर बढ़ता देख तटवर्ती गांवों के लोग सहमे हुए हैं। लिहाजा, बाढ़ के समय आने वाली मुश्किलों से निपटने के लिए अभी से तैयारी करने लगे हैं। मंगलवार को भरथा गांव की साकिरा लकड़ी की गठरी सिर पर लेकर जा रही थी। पूछने पर बताया कि उन्हें उज्जवला योजना का लाभ भी नहीं मिला है। इसलिए चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ता है। बाढ़ आने पर सूखी लकड़ियां नहीं मिलती हैं तो खाना बनाने की समस्या होती है। इसलिए अभी से सूखी लकड़ियां एकत्र करना शुरू कर दिया है।