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Sitapur News: जब कारसेवकों ने दरोगा को दौड़ा लिया था...
Mon, 15 Jan 2024 01:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 15 Jan 2024 01:20 AM IST
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1990 में अयोध्या के लिए रवाना होते कारसेवक।
लहरपुर/सीतापुर। अयोध्या जाते समय गिरफ्तार किए गए 40 कारसेवक लखीमपुर की अस्थाई जेल में बंद किए गए थे। वहां ड्यूटी पर तैनात एक दरोगा कारसेवकों का उत्पीड़न करने लगा। दरोगा के इस रवैये से कारसेवकों के साथ अन्य पुलिसकर्मी भी नाराज थे। एक दिन पुलिस कर्मियों की मौन सहमति पर कारसेवक भड़क गए और दरोगा को दौड़ा लिया। काफी बवाल के बाद दरोगा को ड्यूटी से हटा दिया गया था। एक माह तक कारसेवक जेल में रहे।
कारसेवकों का कहना है कि 22 जनवरी उनके जीवन का बेहद खास दिन है। प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से वह सपना साकार होगा, जो 30 साल पहले देखा था। राम जन्मभूमि आंदोलन छिड़ चुका था। मिनी अयोध्या के नाम से प्रसिद्ध लहरपुर में कारसेवकों ने अयोध्या जाने की ठानी। विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय ईश्वरी प्रसाद दीक्षित, अशोक कुमार मेहरोत्रा व राजकुमार दत्ता ने युवाओं की बैठक कर अयोध्या जाने की रणनीति तैयार की।
इसकी भनक लगते ही पुलिस ने ईश्वरी प्रसाद दीक्षित को गिरफ्तार कर लखीमपुर जेल भेज दिया। इससे कारसेवकों का आक्रोश बढ़ गया। नगर के श्रीराधा कृष्ण मंदिर में 24 अक्तूबर 1990 को कारसेवक एकत्र हुए और पैदल ही अयोध्या जाने का निर्णय लिया। दिवंगत अशोक कुमार मेहरोत्रा व राजकुमार दत्ता ने सभी कारसेवकों का तिलक व माल्यार्पण कर श्रीनारायण मेहरोत्रा, उमेश मेहरोत्रा व वीरेंद्र पुरी के नेतृत्व में रवाना किया। राजू मेहरोत्रा, कमल टंडन, जानकी पुरी, गोपाल नारायण टंडन, राधेश्याम सिंह, सुंदर कश्यप, सिद्धे कश्यप, रमेश निगम समेत लगभग 40 कारसेवकों का जत्था जय श्रीराम का उद्घोष करते हुए अयोध्या के लिए निकल पड़ा।
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कारसेवकों के अयोध्या जाने की खबर पर भारी पुलिस बल ने पहुंचकर सभी को बंदी बना लिया। इन्हें लखीमपुर में आर्य कन्या इंटर कॉलेज में बनी अस्थाई जेल में रखा गया। कारसेवकों के अनुसार एक सिसोदिया दरोगा नाहक उनका उत्पीड़न करने लगा। इससे कारसेवकों में भारी रोष व्याप्त हो गया था। दरोगा के रवैये से ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिसकर्मी व पीएसी बल भी नाराज थे। उनकी मौन सहमति पर एक दिन कारसेवकों ने दरोगा को दौड़ा लिया। उसने मिश्राना पुलिस चौकी में शरण ली। काफी बवाल के बाद दरोगा को जेल ड्यूटी से हटा दिया गया। लगभग एक माह बाद सभी कारसेवकों को रिहा कर दिया गया।
जान हथेली पर लेकर निकले थे कारसेवक
उस दौर की यादें साझा करते हुए श्री नारायण मेहरोत्रा बताते हैं कि राम मंदिर निर्माण ही जीवन का उद्देश्य बन गया था। रामकाज के लिए कारसेवक जान हथेली पर लेकर निकल पड़े थे। प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए वर्षों का इंतजार अब खत्म हो रहा है। मन उल्लासित व आनंदित है।
संघर्ष का मिला प्रतिफल
रामकाज का उत्साह इस कदर था कि बस अयोध्या जाने की धुन सवार थी। उमेश मेहरोत्रा बताते हैं कि तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अगुवाई कर रहे थे। पुलिस ने हौसला तोड़ने के लिए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद भी 40 कारसेवकों का जत्था अयोध्या के लिए निकल पड़ा। संघर्ष का अब प्रतिफल मिल रहा है।
राम मंदिर में प्रभु को विराजते देखना सौभाग्य
वीरेंद्र पुरी बताते हैं कि कारसेवकों के जत्थे का तिलक कर जब रवाना किया तो जय श्रीराम के उद्घोष से समूचा नगर गूंज उठा था। पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तब अशोक कुमार मेहरोत्रा जेल में बंद कारसेवकों की सेवा के लिए समर्पित रहते थे। राम मंदिर में प्रभु को विराजते देखना हमारा सौभाग्य है।
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कारसेवकों का कहना है कि 22 जनवरी उनके जीवन का बेहद खास दिन है। प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से वह सपना साकार होगा, जो 30 साल पहले देखा था। राम जन्मभूमि आंदोलन छिड़ चुका था। मिनी अयोध्या के नाम से प्रसिद्ध लहरपुर में कारसेवकों ने अयोध्या जाने की ठानी। विहिप के तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय ईश्वरी प्रसाद दीक्षित, अशोक कुमार मेहरोत्रा व राजकुमार दत्ता ने युवाओं की बैठक कर अयोध्या जाने की रणनीति तैयार की।
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इसकी भनक लगते ही पुलिस ने ईश्वरी प्रसाद दीक्षित को गिरफ्तार कर लखीमपुर जेल भेज दिया। इससे कारसेवकों का आक्रोश बढ़ गया। नगर के श्रीराधा कृष्ण मंदिर में 24 अक्तूबर 1990 को कारसेवक एकत्र हुए और पैदल ही अयोध्या जाने का निर्णय लिया। दिवंगत अशोक कुमार मेहरोत्रा व राजकुमार दत्ता ने सभी कारसेवकों का तिलक व माल्यार्पण कर श्रीनारायण मेहरोत्रा, उमेश मेहरोत्रा व वीरेंद्र पुरी के नेतृत्व में रवाना किया। राजू मेहरोत्रा, कमल टंडन, जानकी पुरी, गोपाल नारायण टंडन, राधेश्याम सिंह, सुंदर कश्यप, सिद्धे कश्यप, रमेश निगम समेत लगभग 40 कारसेवकों का जत्था जय श्रीराम का उद्घोष करते हुए अयोध्या के लिए निकल पड़ा।
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कारसेवकों के अयोध्या जाने की खबर पर भारी पुलिस बल ने पहुंचकर सभी को बंदी बना लिया। इन्हें लखीमपुर में आर्य कन्या इंटर कॉलेज में बनी अस्थाई जेल में रखा गया। कारसेवकों के अनुसार एक सिसोदिया दरोगा नाहक उनका उत्पीड़न करने लगा। इससे कारसेवकों में भारी रोष व्याप्त हो गया था। दरोगा के रवैये से ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिसकर्मी व पीएसी बल भी नाराज थे। उनकी मौन सहमति पर एक दिन कारसेवकों ने दरोगा को दौड़ा लिया। उसने मिश्राना पुलिस चौकी में शरण ली। काफी बवाल के बाद दरोगा को जेल ड्यूटी से हटा दिया गया। लगभग एक माह बाद सभी कारसेवकों को रिहा कर दिया गया।
जान हथेली पर लेकर निकले थे कारसेवक
उस दौर की यादें साझा करते हुए श्री नारायण मेहरोत्रा बताते हैं कि राम मंदिर निर्माण ही जीवन का उद्देश्य बन गया था। रामकाज के लिए कारसेवक जान हथेली पर लेकर निकल पड़े थे। प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए वर्षों का इंतजार अब खत्म हो रहा है। मन उल्लासित व आनंदित है।
संघर्ष का मिला प्रतिफल
रामकाज का उत्साह इस कदर था कि बस अयोध्या जाने की धुन सवार थी। उमेश मेहरोत्रा बताते हैं कि तत्कालीन विहिप अध्यक्ष अगुवाई कर रहे थे। पुलिस ने हौसला तोड़ने के लिए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद भी 40 कारसेवकों का जत्था अयोध्या के लिए निकल पड़ा। संघर्ष का अब प्रतिफल मिल रहा है।
राम मंदिर में प्रभु को विराजते देखना सौभाग्य
वीरेंद्र पुरी बताते हैं कि कारसेवकों के जत्थे का तिलक कर जब रवाना किया तो जय श्रीराम के उद्घोष से समूचा नगर गूंज उठा था। पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। तब अशोक कुमार मेहरोत्रा जेल में बंद कारसेवकों की सेवा के लिए समर्पित रहते थे। राम मंदिर में प्रभु को विराजते देखना हमारा सौभाग्य है।