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Sitapur News: घरों में नहीं पहुंचा पानी, कारखाने भी बंद
Sun, 19 Mar 2023 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 19 Mar 2023 12:16 AM IST
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सीतापुर। पावर कॉर्पोरेशन के अफसर व कर्मचारियों की हड़ताल का शनिवार को जिले में व्यापक असर दिखाई दिया। बिजली आपूर्ति धड़ाम हो गई। कहीं 36 घंटे से बिजली गुल है तो कहीं 24 घंटे से लोग बिजली की आस लगाए हुए है। शहर की करीब दो लाख आबादी को सुबह के समय पानी की किल्लत उठानी पड़ी। लाइन में लगकर निजी हैंडपंप से जरूरत पूरी की।
पूरे शहर में बिजली गुल रही। किसी इलाके में एक घंटे के लिए बिजली आई तो किसी में 15 घंटे बीत जाने के बाद भी बहाल नहीं हो पाई। हाल यह है दिनभर जेनरेटर धड़धड़ाते रहे। आटा चक्की पर गेहूं के ढेर दिखाई दिए। कारखानों का संचालन बंद हो गया। मोबाइल डिस्चार्ज हो गए। प्रशासनिक अफसर दिनभर फॉल्ट दुरुस्त कराने के लिए जुटे रहे। कंट्रोल रूम की हर दो मिनट पर घंटी बजती रही।
एक ही दिन में सौ से अधिक शिकायतें आई। सरकारी से लेकर प्राइवेट कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हुआ। इन्वर्टर भी डिस्चार्ज हो गए। जिले के करीब दो हजार गांवों में काफी प्रयास के बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इससे करीब 20 लाख आबादी प्रभावित हुई। पावर कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों ने विद्युत वितरण मंडल प्रथम के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
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पानी को तरसे लोग, हैंडपंप पर रहे निर्भर
शहर में भवानीपुर फीडर से जुड़े 30 से मोहल्लों में सुबह के समय बिजली गुल हो गई। इससे घरों में लगे समर्सिबल ठप हो गए। इसकी वजह से नवीन चौक, खूबपुर, विकास नगर मोहल्लों में पानी का संकट खड़ा हो गया। बाशिंदों ने निजी हैंडपंप के जरिए अपनी जरूरतें पूरी की। कांशीराम कॉलोनी सहित अन्य मोहल्लों में हैंडपंप पर लाइन दिखाई दी।
पुराना सीतापुर, विजयलक्ष्मी नगर, भार्गव कॉलोनी में 10 घंटे तक बिजली गुल रही। इसी तरह अन्य मोहल्लों में कहीं बिजली आती तो कहीं चली जाती। इससे शहर की करीब दो लाख आबादी को नुकसान उठाना पड़ा।
शहर में किराए पर भी नहीं मिले जनरेटर
बिजली गुल होने से जब घरों व कार्यालयों में कामकाज बाधित हो गया तो लोगों ने जनरेटर का सहारा लिया। हाल यह है शहर में किराए पर भी जनरेटर नहीं मिले। अगर कहीं मिले तो वह काफी महंगा किराया ले रहे थे। आशीष ने बताया कि एक जनरेटर का एक दिन का करीब तीन सौ रुपये किराया होता है लेकिन शनिवार को पांच सौ रुपये किराया दिया। उसके बाद घर पर लाने व डीजल का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा।
कारखाने बंद होने से प्रभावित हुए उद्योग
बिजली कटौती का असर कारखानों पर भी दिखाई दिया। पुराने सीतापुर में बेकरी चलाने वाले सैदू ने बताया कि दो दिन से ब्रेकरी बंद है। बिजली न आने के कारण केनरेटर से चलाना घाटा सौदा साबित हो रहा है। दो दिन की हड़ताल से हजारों का नुकसान हुआ है। खैराबाद इलाके के दरी कारखानों में बिजली के अभाव में कामकाम प्रभावित हुआ। इसके अलावा बिल्डिंग, इलेक्ट्राॅनिक, दूध डेरी सहित अन्य जगहों पर काम नहीं हो सके।
मोबाइल डिस्चार्ज, लोगों से कटा संपर्क
बिजली न होने का व्यापक असर गांवों पर दिखाई दिया। अधिकतर लोगों के मोबाइल डिस्चार्ज हो गए। जब गांवों में बिजली नहीं आती है तो लोग बैटरी से इसे चार्ज कर लेते थे, लेकिन बैटरी भी डिस्चार्ज होने के कारण वह चार्ज नहीं कर सके।
हर दो मिनट पर बजी घंटी
जिलाधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। इस कंट्रोल रूम में हर दो मिनट पर घंटी बजती रही। अधिकतर शिकायतें यही रही गांव में 24 घंटे से बिजली नहीं है अफसरों के नंबर बंद जा रहे है। इस पर कर्मचारियों ने संबंधित इलाके के जिम्मेदारों को समस्या बताकर इसे दूर कराने का प्रयास किया।
नहीं हुई जांचें लौटे मरीज
बिजली का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। शहर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस्माइलपुर में चिकित्सक मोबाइल की टार्च की रोशनी में इलाज करते नजर आए। इसी तरह लहरपुर, पिसावां, मिश्रिख, मछरेहटा में बिजली के अभाव में जांचें नहीं हो सकी। पिसावां जांचे कराने आए रामप्रकाश ने बताया लिवर की जांच करानी थी लेकिन कर्मचारी ने कहा कि जब बिजली आएगी तभी जांच हो पाएगी। इससे कई मरीज वापस लौट गए।
प्राइवेट कर्मचारी लगाए पर वह नहीं हो सके कामयाब
सीतापुर। बिजली आपूर्ति को लेकर संबंधित तहसील के एसडीएम को जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया है। लोगों के आक्रोश को देखते हुए उपकेंद्रों पर पुलिस बल तैनात रहा। उपभोक्ता उपकेंद्र पहुंचे लेकिन वहां पर पुलिस वालों ने उन्हें समस्या बताकर लौटा दिया। सिधौली एसडीएम राखी वर्मा ने प्राइवेट कर्मचारियों को बुलाकर क्षेत्र में बिजली बहाल कराने का प्रयास किया।
हरगांव में 33केवी की लाइन में फॉल्ट आ गई। इससे बिजली आपूर्ति ठप हो गई। एसडीएम सदर गौरव रंजन श्रीवास्तव सहित अन्य अफसरों ने उपकेंद्रों पर पहुंचकर वहां पर बिजली बहाल कराने की कोशिश की। तंबौर इलाके में 36 घंटे बाद भी बिजली बहाल नहीं हो सकी। सकरन, पैतेंपुर, सेवता, मछरेहटा, नैमिषारण्य सहित अन्य इलाकों के करीब दो हजार गांवों में बिजली ठप रही।
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पूरे शहर में बिजली गुल रही। किसी इलाके में एक घंटे के लिए बिजली आई तो किसी में 15 घंटे बीत जाने के बाद भी बहाल नहीं हो पाई। हाल यह है दिनभर जेनरेटर धड़धड़ाते रहे। आटा चक्की पर गेहूं के ढेर दिखाई दिए। कारखानों का संचालन बंद हो गया। मोबाइल डिस्चार्ज हो गए। प्रशासनिक अफसर दिनभर फॉल्ट दुरुस्त कराने के लिए जुटे रहे। कंट्रोल रूम की हर दो मिनट पर घंटी बजती रही।
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एक ही दिन में सौ से अधिक शिकायतें आई। सरकारी से लेकर प्राइवेट कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हुआ। इन्वर्टर भी डिस्चार्ज हो गए। जिले के करीब दो हजार गांवों में काफी प्रयास के बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इससे करीब 20 लाख आबादी प्रभावित हुई। पावर कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों ने विद्युत वितरण मंडल प्रथम के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
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पानी को तरसे लोग, हैंडपंप पर रहे निर्भर
शहर में भवानीपुर फीडर से जुड़े 30 से मोहल्लों में सुबह के समय बिजली गुल हो गई। इससे घरों में लगे समर्सिबल ठप हो गए। इसकी वजह से नवीन चौक, खूबपुर, विकास नगर मोहल्लों में पानी का संकट खड़ा हो गया। बाशिंदों ने निजी हैंडपंप के जरिए अपनी जरूरतें पूरी की। कांशीराम कॉलोनी सहित अन्य मोहल्लों में हैंडपंप पर लाइन दिखाई दी।
पुराना सीतापुर, विजयलक्ष्मी नगर, भार्गव कॉलोनी में 10 घंटे तक बिजली गुल रही। इसी तरह अन्य मोहल्लों में कहीं बिजली आती तो कहीं चली जाती। इससे शहर की करीब दो लाख आबादी को नुकसान उठाना पड़ा।
शहर में किराए पर भी नहीं मिले जनरेटर
बिजली गुल होने से जब घरों व कार्यालयों में कामकाज बाधित हो गया तो लोगों ने जनरेटर का सहारा लिया। हाल यह है शहर में किराए पर भी जनरेटर नहीं मिले। अगर कहीं मिले तो वह काफी महंगा किराया ले रहे थे। आशीष ने बताया कि एक जनरेटर का एक दिन का करीब तीन सौ रुपये किराया होता है लेकिन शनिवार को पांच सौ रुपये किराया दिया। उसके बाद घर पर लाने व डीजल का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा।
कारखाने बंद होने से प्रभावित हुए उद्योग
बिजली कटौती का असर कारखानों पर भी दिखाई दिया। पुराने सीतापुर में बेकरी चलाने वाले सैदू ने बताया कि दो दिन से ब्रेकरी बंद है। बिजली न आने के कारण केनरेटर से चलाना घाटा सौदा साबित हो रहा है। दो दिन की हड़ताल से हजारों का नुकसान हुआ है। खैराबाद इलाके के दरी कारखानों में बिजली के अभाव में कामकाम प्रभावित हुआ। इसके अलावा बिल्डिंग, इलेक्ट्राॅनिक, दूध डेरी सहित अन्य जगहों पर काम नहीं हो सके।
मोबाइल डिस्चार्ज, लोगों से कटा संपर्क
बिजली न होने का व्यापक असर गांवों पर दिखाई दिया। अधिकतर लोगों के मोबाइल डिस्चार्ज हो गए। जब गांवों में बिजली नहीं आती है तो लोग बैटरी से इसे चार्ज कर लेते थे, लेकिन बैटरी भी डिस्चार्ज होने के कारण वह चार्ज नहीं कर सके।
हर दो मिनट पर बजी घंटी
जिलाधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। इस कंट्रोल रूम में हर दो मिनट पर घंटी बजती रही। अधिकतर शिकायतें यही रही गांव में 24 घंटे से बिजली नहीं है अफसरों के नंबर बंद जा रहे है। इस पर कर्मचारियों ने संबंधित इलाके के जिम्मेदारों को समस्या बताकर इसे दूर कराने का प्रयास किया।
नहीं हुई जांचें लौटे मरीज
बिजली का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दिया। शहर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस्माइलपुर में चिकित्सक मोबाइल की टार्च की रोशनी में इलाज करते नजर आए। इसी तरह लहरपुर, पिसावां, मिश्रिख, मछरेहटा में बिजली के अभाव में जांचें नहीं हो सकी। पिसावां जांचे कराने आए रामप्रकाश ने बताया लिवर की जांच करानी थी लेकिन कर्मचारी ने कहा कि जब बिजली आएगी तभी जांच हो पाएगी। इससे कई मरीज वापस लौट गए।
प्राइवेट कर्मचारी लगाए पर वह नहीं हो सके कामयाब
सीतापुर। बिजली आपूर्ति को लेकर संबंधित तहसील के एसडीएम को जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया है। लोगों के आक्रोश को देखते हुए उपकेंद्रों पर पुलिस बल तैनात रहा। उपभोक्ता उपकेंद्र पहुंचे लेकिन वहां पर पुलिस वालों ने उन्हें समस्या बताकर लौटा दिया। सिधौली एसडीएम राखी वर्मा ने प्राइवेट कर्मचारियों को बुलाकर क्षेत्र में बिजली बहाल कराने का प्रयास किया।
हरगांव में 33केवी की लाइन में फॉल्ट आ गई। इससे बिजली आपूर्ति ठप हो गई। एसडीएम सदर गौरव रंजन श्रीवास्तव सहित अन्य अफसरों ने उपकेंद्रों पर पहुंचकर वहां पर बिजली बहाल कराने की कोशिश की। तंबौर इलाके में 36 घंटे बाद भी बिजली बहाल नहीं हो सकी। सकरन, पैतेंपुर, सेवता, मछरेहटा, नैमिषारण्य सहित अन्य इलाकों के करीब दो हजार गांवों में बिजली ठप रही।