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सैलाब में फंसे ग्रामीण, नहीं मिल रही मदद

Fri, 14 Oct 2022 12:10 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 12:10 AM IST
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Villagers trapped in flood, not getting help
रेउसा क्षेत्र के संपर्क मार्गों पर बहता बाढ़ का पानी। -संवाद - फोटो : SITAPUR
रेउसा/रामपुर मथुरा। गांजरी इलाके में सरयू व शारदा की लहरों ने तबाही मचाना शुरू की तो सैकड़ों परिवार घर छोड़ने को मजबूर हो गए। घरों के भीतर तक पानी भर गया। उन्हें गृहस्थी समेटकर सड़कों के किनारे डेरा डालना पड़ा। सैकड़ों ऐसे भी परिवार हैं जो अचानक बाढ़ आने से पलायन नहीं कर पाए और सैलाब के बीच फंसकर रह गए हैं। इन्हें खाने-पीने की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
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सरकारी मदद तटबंध और सड़क के किनारे शरण लिए बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाई जा रही है। नजदीक के कुछ गांवों तक नाव से राहत सामग्री भेजी गई है, लेकिन दूर-दराज के गांवों में अब तक तमाम बाढ़ पीड़ित सरकारी मदद से वंचित हैं। हालात ये हैं कि कोई राशन उधार लेकर खाने की व्यवस्था कर रहा है तो किसी को भूखे पेट ही रहना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाके में गुरुवार को अमर उजाला की टीम पहुंची तो कई पीड़ितों ने कुछ इसी तरह का दर्द बयान किया।
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घर में सात फीट तक भरा पानी, छत पर डाला डेरा
रामपुर मथुरा इलाके में बाढ़ की भीषण विभीषिका झेल रहे अंगरौरा, अखरी, सोंतीपुरवा, निरंजपुरवा, हरिपालपुरवा, बंगालीपुरवा आदि गांवों में ग्रामीणों ने बताया कि वहां तक राहत सामग्री पहुंचाने में प्रशासन को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अंगरौरा निवासी मुन्नउ ने बताया कि उनके घर में करीब सात फीट पानी भरा हुआ है।
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परिवार समेत घर की छत पर जीवनयापन कर रहे हैं। राहत सामग्री से अब तक वंचित है। इसी गांव के पिंटू ने बताया कि हमारे घर में भी यही स्थिति है। छत पर फंसकर रह गए हैं। हम छत से नीचे उतरकर किस प्रकार राहत सामग्री लाएं। नाव की व्यवस्था भी नहीं है। पैदल जाना खतरे से खाली नहीं है। प्रशासन द्वारा तटबंध पर खाद्यान्न वितरण किया गया है। गांव में कई परिवारों को राशन नहीं मिल सका है।
चार दिन में ही खत्म हो गई राशन किट
तटबंध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ित जयकरण ने बताया कि परिवार में 12 लोग हैं। राशन किट चार दिन में ही खत्म हो गई। तब से इधर-उधर से राशन उधार लेकर किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। अपनी समस्या बाढ़ में लगे कर्मचारियों को बताई पर उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की। रेउसा इलाके में भी हालात इससे अलग नहीं हैं। सड़क के किनारे शरण लिए एक परिवार की छोटी बच्ची प्रियांशी सूखी रोटी खाती नजर आईं। पूछने पर उसकी मां अनीता ने बताया कि आटा आसपास से मांगकर रोटी तो बनी ली मगर सब्जी का इंतजाम नहीं हो पाया।
मजबूरन सूखी रोटी खिलानी पड़ रही है। पास में एक बच्ची सोहनी कटोरी में नमकीन खा रही थी। उसकी मां मीना देवी ने बताया कि भूख से बेटी परेशान थी। खाने को कुछ नहीं मिला तो किसी द्वारा दी गई नमकीन खिलाकर उसे बहला रही हैं। कुछ पीड़ितों ने बताया आननफानन में घर छोड़ना पड़ा। जल्दी में राशन व कई अन्य जरूरी चीजें नहीं ला पाए हैं। ईंधन के अभाव में खाना बनाने की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
ब्लॉक में हो रहा राशन किट का वितरण
महमूदाबाद तहसीलदार मनीष कुमार ने बताया कि क्षेत्रीय लेखपाल ने सर्वे कर बाढ़ पीड़ितों की लिस्ट बनाई गई है। उसी के अनुसार वितरण किया गया है। कोई राहत सामग्री पाने से छूट गया है तो उसे अवश्य दिलवाई जाएगी। किसी परिवार में संख्या अधिक है और उनके पास राशन समाप्त हो गया है तो वह संबंधित लेखपाल या मुझसे बताएं, पूरी मदद की जाएगी। उन्होंने बताया की बाढ़ प्रभावित लोगों को राशन किट का वितरण ब्लॉक में किया जा रहा है। गुरुवार को भी लगभग 800 परिवारों को राशन किट दी गई है।

लहरपुर में भी नहीं पहुंच सकी मदद
लहरपुर (सीतापुर)। भारी बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण क्षेत्र के रतौली, आंबा, हजारीपुरवा, लोन पुरवा आदि गांव पानी से घिर गए हैं। रतौली स्कूल में बाढ़ का पानी घुस जाने से ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक इन गांवों में कोई भी सरकारी सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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