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जिला अस्पताल में जमीन पर हो रहा इलाज

Thu, 07 Nov 2019 11:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 11:33 PM IST
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Treatment on the ground in district hospital
जिला अस्पताल के महिला वार्ड में जमीन पर होता मरीज का इलाज। - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। मौसम में बदलाव से जिला अस्पताल में अचानक मरीज बढ़ गए हैं। बेड फुल हो गए हैं। जमीन पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल की क्षमता 210 बेड की है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस समय सर्दी, खांसी, जुकाम, सांस रोग के अधिक मरीज आ रहे हैं। अस्पताल में बेड फुल हो गए हैं।
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मरीजों को जमीन पर लेटना पड़ रहा है। गुरुवार को महिला वार्ड के सभी बेड फुल थे। एक महिला मरीज गंभीर रूप से बीमार थी। उनको ऑक्सीजन की जरूरत थी। मुंह में ऑक्सीजन की पाइप लगी हुई थी, लेकिन उसे बेड नहीं मिल सका। ऐसे में उस महिला का इलाज जमीन पर ही हुआ। परिजनों ने बताया कि अस्पताल प्रशासन से बेड नहीं मिला।
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इस समय जिला अस्पताल में करीब 240 मरीज भर्ती है। यानी क्षमता से 30 मरीज अधिक इलाज करा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल पर लोड दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। सुविधाओं में इजाफा न होने से दिक्कतें आ रहीं हैं।
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ओपीडी में बढ़े 500 मरीज
जिला अस्पताल की ओपीडी में इस समय करीब तीन हजार मरीज आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य दिनों में इनकी संख्या ढाई हजार के आसपास रहती है।
अगले महीने जब ठंडक पड़ने लगेगी तो मरीजों की संख्या में कमी आएगी। इस समय बदलते मौसम के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
डॉक्टर बोले, बच्चों पिलाएं उबला पानी
सरकारी अस्पताल के डॉ. एन नथानी के अनुसार ठंड का मौसम शुरू होते ही गले की नसों में सुकड़न पैदा होती है। मौसम बदलने के साथ ही वायरल इंफेक्शन होता है।
नसों में इंफेक्शन से वे चोक हो जाती हैं और खराश व खांसी की शिकायत होती है। इन सभी कारणों से लोगों को सर्दी-खांसी व वायरल फीवर की शिकायत होती है।
पीड़ित की टॉवेल व रूमाल का परिवार के दूसरे सदस्य उपयोग न करें। बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने के साथ ही उबला पानी पिलाएं तो सर्दी-जुकाम से बचाव किया जा सकता है।

एलर्जी और वायरल से सबसे ज्यादा बच्चे पीड़ित होते हैं। घर में किसी सदस्य को सर्दी या खांसी हो तो दूसरे सदस्यों को इससे बचाव करना चाहिए। वायरल की चपेट में आते ही डॉक्टर की सलाह लेकर दवाई शुरू कर देनी चाहिए।
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