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तेंदुए के हमले में तीन घायल, भगदड़
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। रामपुर मथुरा क्षेत्र में गुरुवार सुबह तेंदुआ दिखने से दहशत फैल गई। जानकारी पर सैकड़ों की तादात में आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे। भीड़ देखकर तेंदुआ जंगल में छिप गया। उसे भगाने की कोशिश कर रहे तीन लोगों पर तेंदुए ने हमला कर दिया। इस दौरान रेंजर व उनकी टीम तमाशबीन बनी रही। घायलों का इलाज कराया गया है। जख्मी तीनों लोग खतरे से बाहर हैं। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। तेंदुआ जंगल में ही छिपा हुआ है।
रामपुर मथुरा इलाके के भदेसर मजरा ढखवा के ग्रामीण गुरुवार सुबह खेत की ओर निकले थे। गांव के बाहर पहुंचने पर उन्हें तेंदुआ दिखा। फौरन ग्रामीणों ने गांव पहुंचकर लोगों को जानकारी दी। इसके बाद गांव के लोग मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को आता देख तेंदुआ गांव के ही पास एक तालाब में घुुस गया। तालाब काफी गहरा है और इसके आसपास काफी जंगल है। इसकी सूचना मिलने पर मौके पर धीरे-धीरे काफी संख्या में आसपास के गांवों के लोगों का जमावड़ा लग गया।
वन विभाग और पुलिस की मौजूदगी में जंगल की घेराबंदी कर रहे लोगों ने तेंदुए को मौके से भगाने का प्रयास किया। तेज आवाज के साथ लाठी-डंडे पटके। चश्मदीदों की माने तो इस बीच जंगल में छिपे तेंदुए ने भदेसर गांव के निवासी अनूप (25) पर हमला कर कर दिया। तेंदुआ का हमला होते देख मौके पर मौजूद लोग काफी पीछे भाग गए।
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इसके बाद एक भी पल गवाएं ग्रामीणों ने तेज आवाज और लाठी-डंडे फटकाराने शुरू कर दिए। इससे तेेंदुआ युवक को छोड़कर जंगल में घुस गया। हमले की वजह से अनूप घायल हो गया है। कुछ देर बाद मौके पर मौजूद लोगों ने फिर से तेंदुए को जंगल से भगाने के लिए ईंट-पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।
इस बार भी तेंदुआ बाहर निकला और भदेसर गांव के ही लवकुश (30) और रमद्वारी के कुलदीप (35) पर हमला कर दिया। हमला करने के बाद तेंदुआ दोबारा जंगल में छिप गया। तेंदुए के हमले से घायल तीनों लोगों को आननफानन में महमूदाबाद सीएचसी लाया गया, जहां पर प्राथमिक इलाज के बाद तीनों को घर भेज दिया गया है। तीनों की हालत खतरे से बाहर है।
हटो, बचो... की स्थिति में नजर आए रेंजर
हर बार की तरह इस बार भी वन विभाग की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। ग्रामीणों की माने तो ये पूरा वाक्या सुबह सात बजे का है। करीब दो घंटे तक ग्रामीण खुद ही लामबंद और घेराबंदी कर तेंदुए को भगाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने पर सुबह 9 बजे वन विभाग की टीम को सूचना दी।
सूचना देने के करीब तीन घंटे बाद यानी 12 बजे रेंजर बसंत सिंह चार वन कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और कुछ भी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। बस, भीड़ को मौके से हटाकर खुद भी हटो, बचो की स्थिति में नजर आए। वन विभाग की टीम के पास तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। इससे ज्यादा तो लाठी-डंडों से लैैस ग्रामीण थे। 12 बजे मौके पर पहुंचने के बाद शाम तक तेंदुआ को पकड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए थे। तेंदुआ जंगल में था और टीम शाम तक बाहर खड़ी रही।
पकड़ने के बजाय तेंदुए के जंगल जाने का इंतजार
रेंजर बसंत सिंह ने बताया कि वे रात में टीम के साथ यहीं रुकेंगेे। तेंदुए के जंगल से जाने का इंतजार किया जा रहा है। अगर वह आसानी से चला जाता है तो अच्छी बात है, नहीं तो पिंजड़ा मंगवाकर उसे पकड़ने का प्रयास किया जाएगा। पिंजड़ा मंगवाया जा रहा है। तेंदुए की गतिविधि पर पूरी नजर बाहर से रखी जा रही है।
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रामपुर मथुरा इलाके के भदेसर मजरा ढखवा के ग्रामीण गुरुवार सुबह खेत की ओर निकले थे। गांव के बाहर पहुंचने पर उन्हें तेंदुआ दिखा। फौरन ग्रामीणों ने गांव पहुंचकर लोगों को जानकारी दी। इसके बाद गांव के लोग मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को आता देख तेंदुआ गांव के ही पास एक तालाब में घुुस गया। तालाब काफी गहरा है और इसके आसपास काफी जंगल है। इसकी सूचना मिलने पर मौके पर धीरे-धीरे काफी संख्या में आसपास के गांवों के लोगों का जमावड़ा लग गया।
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वन विभाग और पुलिस की मौजूदगी में जंगल की घेराबंदी कर रहे लोगों ने तेंदुए को मौके से भगाने का प्रयास किया। तेज आवाज के साथ लाठी-डंडे पटके। चश्मदीदों की माने तो इस बीच जंगल में छिपे तेंदुए ने भदेसर गांव के निवासी अनूप (25) पर हमला कर कर दिया। तेंदुआ का हमला होते देख मौके पर मौजूद लोग काफी पीछे भाग गए।
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इसके बाद एक भी पल गवाएं ग्रामीणों ने तेज आवाज और लाठी-डंडे फटकाराने शुरू कर दिए। इससे तेेंदुआ युवक को छोड़कर जंगल में घुस गया। हमले की वजह से अनूप घायल हो गया है। कुछ देर बाद मौके पर मौजूद लोगों ने फिर से तेंदुए को जंगल से भगाने के लिए ईंट-पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।
इस बार भी तेंदुआ बाहर निकला और भदेसर गांव के ही लवकुश (30) और रमद्वारी के कुलदीप (35) पर हमला कर दिया। हमला करने के बाद तेंदुआ दोबारा जंगल में छिप गया। तेंदुए के हमले से घायल तीनों लोगों को आननफानन में महमूदाबाद सीएचसी लाया गया, जहां पर प्राथमिक इलाज के बाद तीनों को घर भेज दिया गया है। तीनों की हालत खतरे से बाहर है।
हटो, बचो... की स्थिति में नजर आए रेंजर
हर बार की तरह इस बार भी वन विभाग की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। ग्रामीणों की माने तो ये पूरा वाक्या सुबह सात बजे का है। करीब दो घंटे तक ग्रामीण खुद ही लामबंद और घेराबंदी कर तेंदुए को भगाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने पर सुबह 9 बजे वन विभाग की टीम को सूचना दी।
सूचना देने के करीब तीन घंटे बाद यानी 12 बजे रेंजर बसंत सिंह चार वन कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और कुछ भी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। बस, भीड़ को मौके से हटाकर खुद भी हटो, बचो की स्थिति में नजर आए। वन विभाग की टीम के पास तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। इससे ज्यादा तो लाठी-डंडों से लैैस ग्रामीण थे। 12 बजे मौके पर पहुंचने के बाद शाम तक तेंदुआ को पकड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए थे। तेंदुआ जंगल में था और टीम शाम तक बाहर खड़ी रही।
पकड़ने के बजाय तेंदुए के जंगल जाने का इंतजार
रेंजर बसंत सिंह ने बताया कि वे रात में टीम के साथ यहीं रुकेंगेे। तेंदुए के जंगल से जाने का इंतजार किया जा रहा है। अगर वह आसानी से चला जाता है तो अच्छी बात है, नहीं तो पिंजड़ा मंगवाकर उसे पकड़ने का प्रयास किया जाएगा। पिंजड़ा मंगवाया जा रहा है। तेंदुए की गतिविधि पर पूरी नजर बाहर से रखी जा रही है।