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बम-बम भोले के जयकारे से गूंजेंगे शिवालय
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सीतापुर। महाशिवरात्रि का पर्व मंगलवार को जिलेभर में धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। भोर से ही शिवालय भोले बाबा के जयकारों से गूंजने लगेंगे। इसको लेकर सोमवार को दिनभर शिवालयों में तैयारियां होती रही।
महाशिवरात्रि मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। इसको लेकर सोमवार को दिनभर शिवालयों में तैयारियां होती रही। शहर के श्यामनाथ मंदिर, जंगलीनाथ मंदिर में बैरिकेडिंग होती रही। मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर सफाई होती रही। इसके अलावा प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाता रहा। यहां पर श्रद्धालु मंगलवार भोर से ही पहुंचना शुरू हो जाएंगे।
वह बम-बम भोले के जयकारे लगाते अपनी पूजा अर्चना करेंगे। इस दिन कई जगहों पर मेले का भी आयोजन किया जाएगा। बिसवां के पत्थर शिवाला मंदिर में भी रंग रोगन होता रहा। नैमिषारण्य तीर्थ में हजारों की संख्या में शिवरात्रि पर श्रद्धालु पहुंचते हैं। जिसमें प्रमुख रूप से देवदेवेश्वर धाम और चक्रतीर्थ पर विराजमान भूतेश्वर नाथ के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं।
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महाशिवरात्रि व परिक्रमा को लेकर की बैठक
शिवरात्रि व 84 कोसी परिक्रमा को लेकर सोमवार को नैमिषारण्य थाने में मिश्रिख क्षेत्राधिकारी सुशील यादव ने बैठक की। बैठक में क्षेत्राधिकारी व नैमिष थाना प्रभारी सुरेश मिश्र ने कहा कि जिन स्थानों से होकर परिक्रमार्थी गुजरेंगे, वहां की व्यवस्थाओं को ठीक किया जाएगा। क्षेत्राधिकारी ने बताया कि इन स्थलों पर सुरक्षा बल तैनात कर दिया जाएगा। देवदेवेश्वर में बैरियर लगाकर वाहनों को रोक दिया जाएगा ताकि जाम की स्थिति न बन सके।
महाशिवरात्रि की पूजा का मुहूर्त
आचार्य विवेक द्विवेदी ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है। इस तिथि को सृष्टि को बचाने के लिए भोले बाबा शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। पौराणिक लेख के अनुसार इस दिन भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस तिथि को रात्रि जागरण करने का विशेष महत्व है। चार प्रहर की पूजा करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है। चतुर्दशी तिथि मंगलवार सुबह 3:13 बजे लग जाएगी। दो मार्च को व्रत का पारण सुबह 6:45 बजे के बाद होगा।
इन सामग्री का करें प्रयोग
आचार्य सचिन शास्त्री ने बताया कि इन पूजन सामग्रियों के साथ भगवान भोलेनाथ का पूजन करें। सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बाली, तुलसी दल, मंदार, पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, पंचफल, पंचमेवा, पंच रस, इत्र, रोली आदि का प्रयोग करें।
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महाशिवरात्रि मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। इसको लेकर सोमवार को दिनभर शिवालयों में तैयारियां होती रही। शहर के श्यामनाथ मंदिर, जंगलीनाथ मंदिर में बैरिकेडिंग होती रही। मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर सफाई होती रही। इसके अलावा प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाता रहा। यहां पर श्रद्धालु मंगलवार भोर से ही पहुंचना शुरू हो जाएंगे।
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वह बम-बम भोले के जयकारे लगाते अपनी पूजा अर्चना करेंगे। इस दिन कई जगहों पर मेले का भी आयोजन किया जाएगा। बिसवां के पत्थर शिवाला मंदिर में भी रंग रोगन होता रहा। नैमिषारण्य तीर्थ में हजारों की संख्या में शिवरात्रि पर श्रद्धालु पहुंचते हैं। जिसमें प्रमुख रूप से देवदेवेश्वर धाम और चक्रतीर्थ पर विराजमान भूतेश्वर नाथ के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं।
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महाशिवरात्रि व परिक्रमा को लेकर की बैठक
शिवरात्रि व 84 कोसी परिक्रमा को लेकर सोमवार को नैमिषारण्य थाने में मिश्रिख क्षेत्राधिकारी सुशील यादव ने बैठक की। बैठक में क्षेत्राधिकारी व नैमिष थाना प्रभारी सुरेश मिश्र ने कहा कि जिन स्थानों से होकर परिक्रमार्थी गुजरेंगे, वहां की व्यवस्थाओं को ठीक किया जाएगा। क्षेत्राधिकारी ने बताया कि इन स्थलों पर सुरक्षा बल तैनात कर दिया जाएगा। देवदेवेश्वर में बैरियर लगाकर वाहनों को रोक दिया जाएगा ताकि जाम की स्थिति न बन सके।
महाशिवरात्रि की पूजा का मुहूर्त
आचार्य विवेक द्विवेदी ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है। इस तिथि को सृष्टि को बचाने के लिए भोले बाबा शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। पौराणिक लेख के अनुसार इस दिन भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस तिथि को रात्रि जागरण करने का विशेष महत्व है। चार प्रहर की पूजा करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है। चतुर्दशी तिथि मंगलवार सुबह 3:13 बजे लग जाएगी। दो मार्च को व्रत का पारण सुबह 6:45 बजे के बाद होगा।
इन सामग्री का करें प्रयोग
आचार्य सचिन शास्त्री ने बताया कि इन पूजन सामग्रियों के साथ भगवान भोलेनाथ का पूजन करें। सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बाली, तुलसी दल, मंदार, पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, पंचफल, पंचमेवा, पंच रस, इत्र, रोली आदि का प्रयोग करें।