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Sitapur News: बादलों ने तरसाया, उमस ने भी सताया

Mon, 21 Jul 2025 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Mon, 21 Jul 2025 12:10 AM IST
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The clouds made me yearn, the humidity also tormented me
बादलों ने बढ़ाई उमस।
सीतापुर। बादल आए लेकिन फिर तरसाकर चले गए। जिले में रविवार की सुबह आसमान में बादल छाने से बारिश की उम्मीद जगी लेकिन एक बूंद भी न गिरी। बादल छाए रहने से धूप तो नहीं निकली लेकिन उमस और गर्मी ने लोगों को खासा परेशान किया। मानसून ठिठकने से किसान भी परेशान हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार रविवार को अधिकतम पारा 34 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अगले 24 घंटे तक बादल छाए रहेंगे। कहीं-कहीं बौछारें भी पड़ने के आसार हैं।
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मानसून पिछले कुछ दिनों से सुस्त पड़ गया है। इससे गर्मी के तेवर तल्ख हो गए हैं। इस बीच रविवार सुबह करीब चार बजे तेज हवा के साथ बादलों ने आसमान को घेर लिया। बादलों के कारण धूप नहीं निकली इससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली। लेकिन हवा मंद होने से उमस ने लोगों को बेचैन रखा। आलम यह रहा कि दिन में पंखे व कूलर के सामने बैठने पर भी लोगों का पसीना नहीं सूख रहा था।
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हालांकि, शाम ढलते ही हवा चलने से कुछ राहत जरूर मिली। लेकिन बारिश न होने से हर कोई मायूस नजर आया। किसानों के मुताबिक इस समय फसलों को पानी की जरूरत है। बारिश नहीं हुई तो निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ेगी। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों तक बादल छाए रहने के साथ कुछ इलाकों में बौछारें पड़ने का पूर्वानुमान जारी किया है।
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मानसून रूठा तो किसानों का बढ़ गया खर्च
किसान ब्रजेश दीक्षित व हरीराम ने बताया कि कई किसान अभी धान की रोपाई ही कर रहे हैं। तमाम किसानों ने धान लगा दिया है। ऐसे में सबसे ज्यादा धान की फसल को पानी की जरूरत है। गंगाराम, राम स्वरुप व जगदीश मौर्या ने बताया कि गन्ना, उरद व तिल की फसल को भी पानी की आवश्यकता है। चार दिनों से बारिश नहीं हुई है। फसल बचाने के लिए पंपिंग सेट अथवा निजी ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है। किसान राहुल सिंह, संदीप सिंह व लक्ष्मण सिंह ने बताया कि एक बीघा फसल की सिंचाई करने में 250 से 300 रुपये का खर्च आता है। निजी संसाधनों से पानी लगाने में फसल की लागत बढ़ने के साथ किसानों की जेब ढ़ीली हो रही है।
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