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Sitapur News: चौका उफनाई, कई मार्ग व 150 बीघा फसलें जलमग्न
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रामपुर मथुरा। सरयू का जलस्तर घटा तो चौका नदी में उफान आ गया। मंगलवार को चौका का जलस्तर 118.20 मीटर दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान 119 मीटर से सिर्फ 80 सेंटीमीटर नीचे है। चौका की बाढ़ से करीब 10 गांवों के आसपास पानी भर गया है। कई संपर्क मार्गों समेत करीब 150 बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं।
चौका नदी उफनाने से बाढ़ का पानी रायपुर अलायपुर, भागीपुर, पैगंबरपुर, सिरकुंडा, बांसुरा व तुलसीपुर खरिका समेत करीब 10 गांवों के आसपास भर गया है। ग्रामीण चंद्रिका ने बताया कि मुख्य सड़क से रायपुर अलायपुर जाने वाला मार्ग, बांसुरा डामर रोड से बाग की तरफ जाने वाली सड़क, सिरकुंडा संपर्क मार्ग, पैगम्बरपुर संपर्क मार्ग सहित बांसुरा को जोड़ने वाले संपर्क पर काफी ज्यादा पानी भरा होने से आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है।
बाढ़ का पानी खेतों में भर जाने से करीब 150 बीघा फसलों के भी चौपट होने का खतरा बढ़ गया है। खेतों में लंबे समय से पानी भरा होने के कारण फसल के सड़ने की आशंका से किसान चिंतित हैं। किसान जमाल ने बताया कि धान की फसल के लिए लगातार कई दिनों तक पानी भरा रहना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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किसान भुलई के मुताबिक चौका नदी का पानी खेतों में जमा होने से फसल की कटाई करना भी मुश्किल हो गया है। पानी एक-दो दिन में नहीं निकला तो धान की बालियों के खराब होने तथा पैदावार में कमी आने की संभावना बढ़ जाएगी।
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चौका नदी उफनाने से बाढ़ का पानी रायपुर अलायपुर, भागीपुर, पैगंबरपुर, सिरकुंडा, बांसुरा व तुलसीपुर खरिका समेत करीब 10 गांवों के आसपास भर गया है। ग्रामीण चंद्रिका ने बताया कि मुख्य सड़क से रायपुर अलायपुर जाने वाला मार्ग, बांसुरा डामर रोड से बाग की तरफ जाने वाली सड़क, सिरकुंडा संपर्क मार्ग, पैगम्बरपुर संपर्क मार्ग सहित बांसुरा को जोड़ने वाले संपर्क पर काफी ज्यादा पानी भरा होने से आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है।
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बाढ़ का पानी खेतों में भर जाने से करीब 150 बीघा फसलों के भी चौपट होने का खतरा बढ़ गया है। खेतों में लंबे समय से पानी भरा होने के कारण फसल के सड़ने की आशंका से किसान चिंतित हैं। किसान जमाल ने बताया कि धान की फसल के लिए लगातार कई दिनों तक पानी भरा रहना नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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किसान भुलई के मुताबिक चौका नदी का पानी खेतों में जमा होने से फसल की कटाई करना भी मुश्किल हो गया है। पानी एक-दो दिन में नहीं निकला तो धान की बालियों के खराब होने तथा पैदावार में कमी आने की संभावना बढ़ जाएगी।