फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Tetanus injection ends in CHC

सीएचसी में टिटनेस के इंजेक्शन खत्म

Thu, 21 Jul 2022 12:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2022 12:36 AM IST
विज्ञापन
Tetanus injection ends in CHC
सीतापुर। जिले की किसी भी सीएचसी पर टिटनेस का इंजेक्शन नहीं है। मरीजों को इंजेक्शन का लाभ नहीं मिल रहा है। वह बाजार से इंजेक्शन खरीदने को मजबूर हैं।
विज्ञापन

जिले में 19 सीएचसी हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण इलाके के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। सीएचसी पर इस समय दवाओं व इंजेक्शन की किल्लत बनी हुई है। सबसे अधिक दिक्कत टिटबैक को लेकर आ रही है। मरीजों ने बताया कि इंजेक्शन की दिक्कत करीब दो माह से बनी हुई है। ऐसे में जब मरीज अस्पताल आते है तो उन्हें इंजेक्शन न होने की बात कहकर बाहर से खरीदने की सलाह दी जाती है।
ऐसे में मरीज मजबूरी में बाहर से खरीदते हैं। इससे मरीजों को सीएचसी पर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। जबकि जिला अस्पताल में इस इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है।
विज्ञापन

कई माह से है दिक्कत
लहरपुर सीएचसी में टिटनेस के इंजेक्शन नहीं है। इसकी वजह से मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। वह बाहर से इंजेक्शन खरीद करके इसे लगवा रहे है। मरीजों ने बताया कि कई माह से यह समस्या बनी हुई है। महमूदाबाद सीएचसी में भी टिटनेस के इंजेक्शन का अभाव है। सीएचसी एलिया व खैराबाद में भी इंजेक्शन की दिक्कत बनी हुई है। यहां पर रोजाना 20 से 30 मरीजों को इस इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। ऐसे में बाहर से इंजेक्शन खरीद कर लगवा रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जानलेवा है टिटनेस बीमारी
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा बताते हैं टिटबैक इंजेक्शन टिटनेस जैसी जानलेवा बीमारी के लिए बहुत ही कारगर है। अगर शरीर में कहीं कोई चोट लग जाती या घाव हो जाता है तो तुरंत टिटबैक लगवाना चाहिए। आमतौर पर यह दो से तीन माह के बीच सभी को लगवा लेना चाहिए। अक्सर हम लोग बाइक स्टार्ट करते समय, सब्जी काटते समय, कहीं रास्ते में गिर जाते है तो टिटनेस होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में इंजेक्शन ही टिटनेस के संक्रमण से बचाता है।
गर्भवती के लिए होता जरूरी
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा बताते है कि आमतौर पर टिटनेस के कारण पहले मौत का आंकड़ा काफी अधिक रहता था। अब लोगों में इस इंजेक्शन के प्रति जागरूकता हुई है। गर्भवती को टिटबैक की बहुत आवश्यकता है। गर्भधारण करने के बाद नियमित दो माह के अंतराल पर यह टीका लगाया जाता है। इससे जज्जा बच्चा दोनों स्वस्थ्य रहते हैं। इसलिए गर्भवती के लिए यह लगवाना बहुत ही जरूरी होता है।
यह भी है समस्या
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक टिटबैक की जगह पर अब टीडी इंजेक्शन आ रहा है। यह टिटनेस के ही फॉर्मूले का है। इसको रखने के लिए कोल्ड चैन की जरूरत पड़ती है। कई सीएचसी पर टीडी मौजूद है लेकिन कहीं बिजली का अभाव के कारण मरीजों को टीडी भी नहीं लगाया जा रहा है। सीधे मरीजों से बाहर से टिटबैक खरीदने के लिए बोल दिया जाता है।

नहीं आ रही है सप्लाई
टिटबैक अब सरकारी सप्लाई में नहीं आ रहा है। इसकी जगह पर टीडी आ रहा है। इसे ही लगवाया जा रहा है। जिन सीएचसी पर इंजेक्शन नहीं है, वहां पर दिखवाया जाएगा।
- डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed