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दो साल में नहीं बन सके दस उपकेन्द्र
अमरउजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Mon, 22 Jun 2015 10:43 PM IST
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भीषण गर्मी में बिजली के लिए हाय तौबा मची हुई है। क्षमता से अधिक लोड से ट्रांसफार्मर फुंकने व लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है।
वजह, दस नए उपकेंद्रों का समय पर चालू न होना है। खास बात यह हैं, कि इनमें से सात उपकेंद्रों का अभी निर्माण तक शुरू नहीं हो सका है। जबकि निर्मित तीन उपकेंद्रों की प्रगति भी संतोषजनक नहीं है।
विभागीय अफसरों की मानें तो इन उपकेंद्रों को मार्च 2015 में बनकर तैयार हो जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। जिसकी वजह से जिले में बिजली संकट गहराता जा रहा है।
मालूम हो, कि शासन बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहा है। शासन की मंशा वर्ष 2016 से शहरों को 22 तथा ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे विद्युत आपूर्ति की है।
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इसी क्रम में वर्ष 2013 व 2014 में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 33 केवीए के दस विद्युत उपकेंद्रों के निर्माण को मंजूरी मिली। उपकेंद्रों के निर्माण के लिए शासन से तकरीबन 40 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया गया। लेकिन कॉर्पोरेशन की लापरवाही के चलते इन दस उपकेंद्रों में से एक भी चालू नहीं हो सका है।
सात उपकेंद्रों का अभी तक निर्माण ही शुरू नहीं हो सका है। उधर बदहाल बिजली व्यवस्था के चलते शहर मुख्यालय से लेकर गांवों तक हाहाकार मचा है।
गांवों में किसान जहां फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहा है। वहीं शहरों में विद्युत उपकरण महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी कॉर्पोरेशन अफसरों की इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है।
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वजह, दस नए उपकेंद्रों का समय पर चालू न होना है। खास बात यह हैं, कि इनमें से सात उपकेंद्रों का अभी निर्माण तक शुरू नहीं हो सका है। जबकि निर्मित तीन उपकेंद्रों की प्रगति भी संतोषजनक नहीं है।
विभागीय अफसरों की मानें तो इन उपकेंद्रों को मार्च 2015 में बनकर तैयार हो जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। जिसकी वजह से जिले में बिजली संकट गहराता जा रहा है।
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मालूम हो, कि शासन बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहा है। शासन की मंशा वर्ष 2016 से शहरों को 22 तथा ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे विद्युत आपूर्ति की है।
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इसी क्रम में वर्ष 2013 व 2014 में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 33 केवीए के दस विद्युत उपकेंद्रों के निर्माण को मंजूरी मिली। उपकेंद्रों के निर्माण के लिए शासन से तकरीबन 40 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया गया। लेकिन कॉर्पोरेशन की लापरवाही के चलते इन दस उपकेंद्रों में से एक भी चालू नहीं हो सका है।
सात उपकेंद्रों का अभी तक निर्माण ही शुरू नहीं हो सका है। उधर बदहाल बिजली व्यवस्था के चलते शहर मुख्यालय से लेकर गांवों तक हाहाकार मचा है।
गांवों में किसान जहां फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहा है। वहीं शहरों में विद्युत उपकरण महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने भी कॉर्पोरेशन अफसरों की इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है।