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Sitapur News: गाय के गोबर से गमले बनाने की तकनीक सिखाई
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केवीके कटिया में गोबर से गमले बनाती महिलाएं।
- फोटो : केवीके कटिया में गोबर से गमले बनाती महिलाएं।
सीतापुर। कृषि विज्ञान केंद्र कटिया की ओर से बिसवां ब्लाॅक के ग्राम शिवथाना की गोशाला में गाय के गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण और उपयोग विषय पर सोमवार को प्रशिक्षण दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों को गाय के गोबर से निर्मित पर्यावरण अनुकूल उत्पादों जैसे दीये, गमले, गोबर की लकड़ी आदि के निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केवीके कटिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने की। उन्होंने बताया कि गोबर से बने उत्पाद न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केवीके का मुख्य उद्देश्य नवीनतम कृषि एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकियों का प्रसार कर किसानों एवं ग्रामीणों की आजीविका में सुधार करना है। खंड विकास अधिकारी बिसवां ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आजकल पर्यावरण के प्रति लोग ज्यादा सजग हो रहे हैं और पर्यावरण हितैषी तकनीकों को भी ज्यादा अपना रहे हैं। सरकार भी इस पर जोर दे रही है, जरूरत है मिलकर काम करने की और सम्मान पाने की।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताई उपयोगिता
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर ने प्रशिक्षणार्थियों को गोबर आधारित उत्पादों की वैज्ञानिक प्रक्रिया, स्वच्छता एवं स्थायित्व के बारे में जानकारी दी। केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता विकास की संभावनाओं और गाय के गोबर के उत्पादों को स्थानीय बाजार में कैसे स्थापित किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए क्षेत्र आधारित आयामों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान शिवथाना प्रमोद कुमार अवस्थी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सुनीता, तरन्नुम, सुमन व अन्य उपस्थित रहीं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता केवीके कटिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने की। उन्होंने बताया कि गोबर से बने उत्पाद न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केवीके का मुख्य उद्देश्य नवीनतम कृषि एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकियों का प्रसार कर किसानों एवं ग्रामीणों की आजीविका में सुधार करना है। खंड विकास अधिकारी बिसवां ने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आजकल पर्यावरण के प्रति लोग ज्यादा सजग हो रहे हैं और पर्यावरण हितैषी तकनीकों को भी ज्यादा अपना रहे हैं। सरकार भी इस पर जोर दे रही है, जरूरत है मिलकर काम करने की और सम्मान पाने की।
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कृषि वैज्ञानिकों ने बताई उपयोगिता
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर ने प्रशिक्षणार्थियों को गोबर आधारित उत्पादों की वैज्ञानिक प्रक्रिया, स्वच्छता एवं स्थायित्व के बारे में जानकारी दी। केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. रीमा ने ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता विकास की संभावनाओं और गाय के गोबर के उत्पादों को स्थानीय बाजार में कैसे स्थापित किया जा सकता है, इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए क्षेत्र आधारित आयामों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान शिवथाना प्रमोद कुमार अवस्थी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सुनीता, तरन्नुम, सुमन व अन्य उपस्थित रहीं।
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