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50 हजार किसानों की सूख रही गन्ने की फसल

Fri, 24 Jun 2022 12:45 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2022 12:45 AM IST
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Sugarcane crop drying up for 50 thousand farmers
महमूदाबाद इलाके में नहर उगी झाड़िया, सूखी पड़ी नहर। -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जून की तपिश के कारण गन्ने की फसल सूख रही है। किसान इसकी सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। अधिकतर किसान नहरों व माइनरों में आने वाले पानी से ही सिंचाई करते हैं। डीजल महंगा होने के कारण वह पंपिंग सेट से सिंचाई करने में असमर्थ है। वाटर लेवल डाउन होने से तमाम बोरिंग फेल हो गई है। चार तहसील क्षेत्र के कई नहरों व माइनरों में पानी नहीं आ रहा है। माइनरों में धूल उड़ रही है। इससे करीब 50 हजार से अधिक किसानों की गन्ने की फसलों को समय पर पानी मिलना मुश्किल हो रहा है।
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तहसील महमूदाबाद, सदर, मिश्रिख व बिसवां क्षेत्र की कई नहरें और माइनर व कुलाबे सूखे हैं। इनमें पानी नहीं है। इससे संबंधित क्षेत्र के गांवों के किसान गन्ना का सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। धान की नर्सरी नहीं लगा सके हैं। काजीकमालपुर से निकली नहर नउवा अंबरपुर, जगना, खेतूआपुर, पारा, बसेती, नवाहनपुर, बेलगवां आदि गांवों से गुजरती है।
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इसमें पानी न आने से सैकड़ों किसान गन्ने की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। महमूदाबाद संवाद के अनुसार बिसवां के कुतुबपुर से निकली माइनर जो विकासखंड पहला के करीब आधा सैकड़ा गांव से होकर निकली है। इस माइनर में कई वर्षों से पानी न आने पर किसानों को सिंचाई की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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लगभग 40 किलोमीटर लंबी माइनर दुघरा, सैर, शंकरपुर, लालापुर, फिरोजपुर, मलनिया, महानगर, कुरौली, भानपुर, बाबूपुर, उनेरा आदि विभिन्न गांवों के किसानों को लाभान्वित करती है। पानी न आने से करीब 35 से 40 हजार किसानों को अपने संसाधनों या किराये पर फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
किसान बताते हैं कि हर वर्ष हम लोगों का हजारों रुपये डीजल आदि में खर्च हो जाता है। किसान भानू वर्मा, बनवारी लाल, प्रमोद वर्मा, सुभाष वर्मा, ललित श्रीवास्तव, शिवकुमार वर्मा, अनिल वर्मा, सुखकरन लाल, रामखेलावन आदि किसानों ने शासन से माइनर में सही समय से पानी छोड़े जाने की मांग की है।
पंपिंग सेट से सिंचाई करना पड़ता महंगा
तहसील महमूदाबाद क्षेत्र के महानगर निवासी किसान प्रमोद कुमार बताते हैं कि माइनर नहर में करीब पांच वर्षों से पानी नहीं आया है। जिसके चलते पंम्पिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिसमें काफी खर्च आता है। किसान मोहम्मद नोमान निवास बाबूपुर बताते हैं कि नहर में पानी न आने से खेती करने में बहुत ही ज्यादा लागत आई रही है।
पम्पिंग सेट व पाइप का भी किराया देना पड़ता है। मिर्चा की खेती की थी जो सूख रही है। किसान सर्वेश यादव निवासी ग्राम कोडरी बताते हैं कि गन्ने की बोआई की है। इसकी सिंचाई करने के लिए विभिन्न प्रकार की समस्याएं आती है। वाटर लेवल नीचे चले जाने से पंम्पिंग सेट को पांच से सात फिट नीचे ले जाना पड़ता है, तब पानी उपलब्ध हो पाता है। किसान जगदीश प्रसाद बताते हैं कि सरकारी दावे फेल हो रहे हैं। सरकार मुफ्त पानी दे रही है, लेकिन सिंचाई के लिए नहरों में पानी नहीं आ रहा है। ऐसे किसानों की आय दोगुनी कैसे होगी।
12 गांवों के किसान परेशान, कैसे हो सिंचाई
मास्टरबाग संवाद के अनुसार भीषण गर्मी में खेतों में बोई गई फसलें सिंचाई न होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में लगी फसलें भी सिंचाई के अभाव में सूखने लगी हैं। गन्ना, उड़द, मूंग, हरी सब्जी व चारा की खेती करने वाले किसान सिंचाई न होने से परेशान हैं। इलाके से होकर गुजरी भज्जा पुल से कुमार गड्डी शारदा सहायक नहर सूखी है।
इसी के आसपास के इलाकों में खेती का कार्य प्रभावित है। किसानों को मजबूरन फसल को सिंचाई के लिए निजी नलकूपों से करना पड़ रहा है। इलाके के पेंड्रा, हसनापुर, शाहपुर, जलालपुर, जमारखा, हरिहरपुर, पुरैना, बरेठी, पलिया, नेवादा, दहैया जगदीशपुर, पिपरा आदि गांवों के किसान नहर में पानी न होने से चिंतित हैं। किसानों ने नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की है। शारदा सहायक खंड अवर अभियंता विनय यादव ने बताया कि रोस्टर के हिसाब से पानी छोड़ा जाता है। रोस्टर आने पर पानी मिलेगा।
नहर की टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी
गोंदलामऊ संवाद के अनुसार विकासखंड गोंदलामऊ क्षेत्र के विभिन्न गांव से होते हुए निकली नहर में पानी न आने से किसानों को मायूस होना पड़ रहा है। मिश्रिख से लवली पुलिया तक आई नहर में मिश्रिख के आगे करीब 25 गांवों में पानी नहीं पहुंचता है। इससे गन्ने की सिंचाई करने के लिए किसान परेशान हैं।

मिश्रिख कैनाल में पानी न आने के कारण गोपालपुर पश्चिमी, मजलिसपुर, केशुवामऊ भगता,वैसुवा व पुरैनी आदि तमाम गांवों के किसानों को मायूस होना पड़ रहा है। आमाघाट, जेनापुर जैसे गांवों के पास स्वार्थी तत्वों ने नहर की पटरियां भी क्षतिग्रस्त कर दी है। जिसकी वजह से टेल तक नहर का पानी नहीं पहुंच रहा है।
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