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साढ़े छह हजार विद्यार्थियों का रुक सकता वजीफा
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सीतापुर। जिले के करीब साढ़े छह हजार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति फंस सकती है। कारण, इन विद्यार्थियों ने अपने आवेदन पत्र में खाता नंबर सहित अन्य जानकारियां गलत फीड कर दी हैं। इसका खुलासा ऑनलाइन जांच में सामने आया है। इस पर इन विद्यार्थियों का डाटा संदेहास्पद की श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे इनकी छात्रवृत्ति रोक दी गई है।
समाज कल्याण अधिकारी ने डीआईओएस को पत्र लिखकर तीन दिन में कॉलेजों से डाटा को दुरुस्त करने का मौका दिया है। अगर निर्धारित समय सीमा के अंदर डाटा सही नहीं होता है तो विद्यार्थी छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना से बाहर हो जाएंगे। पूर्व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 9 व 10 के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलती है।
इसी प्रकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 11 से डिग्री तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति मिलती है। छात्रवृत्ति में हो रही धांधली रोकने के लिए शासन ने आवेदन करने की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया था। विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। आवेदन भरने की जिम्मेदारी कॉलेजों को दी गई थी। लेकिन कॉलेजों ने मनमाने ढंग से आवेदन कर दिए।
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अक्तूबर तक आवेदन प्रक्रिया चलती रही, जिसके बाद आवेदनों को शासन को भेज दिया गया था, जहां पर इसकी जांच पड़ताल हुई। जिसमेें करीब 6626 आवेदन अपूर्ण मिले है। इसमें सामान्य वर्ग के 2954 व एससी वर्ग के 3672 आवेदन शामिल है। इसमें गलतियां की गई हैं। इससे इनके आवेदन को संदेहास्पद की श्रेणी में डाल दिया गया है। एक आवेदन में करीब तीन से चार गलतियां हुई है।
कुछ में जानकारी भरी ही नहीं गई है। ऐसे में यह मानकों पर खरे नहीं उतरे है। जिस पर शासन ने विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम अवसर दिया है। आवेदन पत्रों को आपत्ति के साथ कॉलेजों को वापस कर दिए है। तीन दिन के अंदर जानकारी दुरुस्त करके जमा करने के निर्देश दिए है। अगर इस दौरान विद्यार्थी अपने डाटा को सही नहीं करते है तो उनकी छात्रवृत्ति रोक दी जाएगी।
आवेदनों में हुईं कई गलतियां
हाईस्कूल के आवेदन में कक्षा नौ का जिक्र ही नहीं किया। आय प्रमाणपत्र व जाति प्रमाणपत्र का ऑनलाइन सत्यापन में रजिस्ट्रेशन नंबर मेल नहीं खा रहा है। जन्मतिथि प्रमाणपत्रों से भिन्नता है। आय प्रमाणपत्र मानक से अधिक लगा दिया है। कोर्स की डिटेल भरी ही नहीं है। बैंक खाता संख्या व आईएफसी कोड गलत है। आधार नंबर मैच नहीं कर रहा है। इसके अलावा अन्य गलतियां आवेदन फॉर्मों में मिली है। इससे इन विद्यार्थियों का डाटा लॉक नहीं हो सका है।
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समाज कल्याण अधिकारी ने डीआईओएस को पत्र लिखकर तीन दिन में कॉलेजों से डाटा को दुरुस्त करने का मौका दिया है। अगर निर्धारित समय सीमा के अंदर डाटा सही नहीं होता है तो विद्यार्थी छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना से बाहर हो जाएंगे। पूर्व दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 9 व 10 के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलती है।
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इसी प्रकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 11 से डिग्री तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति मिलती है। छात्रवृत्ति में हो रही धांधली रोकने के लिए शासन ने आवेदन करने की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया था। विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। आवेदन भरने की जिम्मेदारी कॉलेजों को दी गई थी। लेकिन कॉलेजों ने मनमाने ढंग से आवेदन कर दिए।
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अक्तूबर तक आवेदन प्रक्रिया चलती रही, जिसके बाद आवेदनों को शासन को भेज दिया गया था, जहां पर इसकी जांच पड़ताल हुई। जिसमेें करीब 6626 आवेदन अपूर्ण मिले है। इसमें सामान्य वर्ग के 2954 व एससी वर्ग के 3672 आवेदन शामिल है। इसमें गलतियां की गई हैं। इससे इनके आवेदन को संदेहास्पद की श्रेणी में डाल दिया गया है। एक आवेदन में करीब तीन से चार गलतियां हुई है।
कुछ में जानकारी भरी ही नहीं गई है। ऐसे में यह मानकों पर खरे नहीं उतरे है। जिस पर शासन ने विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम अवसर दिया है। आवेदन पत्रों को आपत्ति के साथ कॉलेजों को वापस कर दिए है। तीन दिन के अंदर जानकारी दुरुस्त करके जमा करने के निर्देश दिए है। अगर इस दौरान विद्यार्थी अपने डाटा को सही नहीं करते है तो उनकी छात्रवृत्ति रोक दी जाएगी।
आवेदनों में हुईं कई गलतियां
हाईस्कूल के आवेदन में कक्षा नौ का जिक्र ही नहीं किया। आय प्रमाणपत्र व जाति प्रमाणपत्र का ऑनलाइन सत्यापन में रजिस्ट्रेशन नंबर मेल नहीं खा रहा है। जन्मतिथि प्रमाणपत्रों से भिन्नता है। आय प्रमाणपत्र मानक से अधिक लगा दिया है। कोर्स की डिटेल भरी ही नहीं है। बैंक खाता संख्या व आईएफसी कोड गलत है। आधार नंबर मैच नहीं कर रहा है। इसके अलावा अन्य गलतियां आवेदन फॉर्मों में मिली है। इससे इन विद्यार्थियों का डाटा लॉक नहीं हो सका है।