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सरायन, चौका व गोन बन गईं नाला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:52 AM IST
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रावी नदी
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
जल के अंधाधुंध दोहन व प्रदूषण में लगातार हो रहे इजाफे से जीवनदायिनी नदियों का जीवन संकट में पड़ता जा रहा है। कई नदियों के अस्तित्व पर खतरा आन पड़ा है। सीतापुर शहर की सरायन नदी हो अथवा गोन। इनका दायरा सिकुड़ चुका है और ये नदिया अब नाले की तरह दिखने लगी हैं। गांजर इलाके में बहने वाली सुखनी व गोबरहिया नदियों का अस्तित्व भी खत्म हो चुका है।
जिले में 12 नदियां हैं। लेकिन बढ़ते प्रदूषण, अवैध खनन तथा पानी के अंधाधुंध दोहन ने जीवनदायिनी नदियों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। अब हालात यह हैं, कि गर्मी के सीजन में सरायन, चौका, गोन आदि नदियों का पानी सूख जाता है। जिसके चलते ये नदियां नाले सरीखी नजर आने लगी हैं।
शहर के बीच से होकर बहने वाली सरायन नदी में कूड़े व गंदगी की भरमार है। गांजर की सुखनी व गोबरहिया नदियां महज नाम भर की हैं। इनमें धूल उड़ रही है। गंदे नाले व कचरा नदी में गिराने से इनका पानी प्रदूषित हो चुका है। वहीं मनुष्ट व पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है।
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जिले की नदियां
घाघरा, शारदा, गोमती, सरायन, गोन, चौका, कठिना, सुखनी, गोबरहिया, किवानी
शासन-प्रशासन की उपेक्षा से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में
शहर की सरायन नदी को प्रदूषण मुक्त करते हुए इसका अस्तित्व बचाने की गरज से पूर्व चेयरमैन आशीष मिश्र ने 2008 में पहल की। नागरिकों के सहयोग से सरायन नदी की सफाई का अभियान चलाया गया।प्रोजेक्ट व प्रस्ताव बनाकर प्रशासन व पर्यावरण महकमे को भेजा गया पर जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पहुंच गया।
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जिले में 12 नदियां हैं। लेकिन बढ़ते प्रदूषण, अवैध खनन तथा पानी के अंधाधुंध दोहन ने जीवनदायिनी नदियों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। अब हालात यह हैं, कि गर्मी के सीजन में सरायन, चौका, गोन आदि नदियों का पानी सूख जाता है। जिसके चलते ये नदियां नाले सरीखी नजर आने लगी हैं।
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शहर के बीच से होकर बहने वाली सरायन नदी में कूड़े व गंदगी की भरमार है। गांजर की सुखनी व गोबरहिया नदियां महज नाम भर की हैं। इनमें धूल उड़ रही है। गंदे नाले व कचरा नदी में गिराने से इनका पानी प्रदूषित हो चुका है। वहीं मनुष्ट व पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है।
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जिले की नदियां
घाघरा, शारदा, गोमती, सरायन, गोन, चौका, कठिना, सुखनी, गोबरहिया, किवानी
शासन-प्रशासन की उपेक्षा से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में
शहर की सरायन नदी को प्रदूषण मुक्त करते हुए इसका अस्तित्व बचाने की गरज से पूर्व चेयरमैन आशीष मिश्र ने 2008 में पहल की। नागरिकों के सहयोग से सरायन नदी की सफाई का अभियान चलाया गया।प्रोजेक्ट व प्रस्ताव बनाकर प्रशासन व पर्यावरण महकमे को भेजा गया पर जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पहुंच गया।