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Sitapur News: भक्तों की आस्था का केंद्र है शादीपुर गांव का श्रीगौरीशंकर मंदिर
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महाराजनगर (सीतापुर)। ब्लाॅक मुख्यालय लहरपुर से 21 किलोमीटर दूर शादीपुर गांव के बाहर बना श्री गौरीशंकर मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां दूरदराज से लोग अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं। सावन में हर सोमवार को यहां मेला लगता है। सावन के अंतिम सोमवार को सुबह हो रही बारिश के कारण भक्तों को कुछ दिक्कतें हुईं, लेकिन इसके बाद भी श्रद्धालुओं ने विधिविधान से भगवान शिव का पूजन किया।
गांव निवासी रामकिशोर कश्यप बताते हैं कि करीब 50 वर्ष पहले की बात है, पड़ोसी गांव के चरवाहे जानवर चराने जंगल में जाते थे। बताया जाता है कि पास में कहीं पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन एक भैंस प्रतिदिन कहीं से पानी में लोटपोट होकर आती थी। एक दिन चरवाहे उसी पानी की तलाश कर रहे थे। काफी खोज करने के बाद एक गड्ढे में पानी देखा। पानी में एक शिवलिंग के आकार का पत्थर दिखा। चरवाहों ने पत्थर निकालने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। शाम हो चुकी थी। चरवाहे गायों को लेकर घर लौट आए।
बताया गया कि महाराजनगर निवासी एक ग्रामीण शिवलिंग के आकार का पत्थर खोदवाकर अपने गांव ले जा रहा था, लेकिन कुछ दूरी पर चलने के बाद बैलगाड़ी का पहिया टूट गया। उसने शिवलिंग को उतार कर जमीन पर रख दिया। पहिया ठीक कराने के बाद उसने शिवलिंग को ले जाने का प्रयास किया लेकिन, उसे नहीं ले जा सका। थक हारकर शिवलिंग उसी स्थान पर स्थापित कर दिया। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां स्थापित शिवलिंग में गौरी जी भी विराजमान हैं, जिस कारण इसका नाम श्रीगौरीशंकर है।
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गांव निवासी रामकिशोर कश्यप बताते हैं कि करीब 50 वर्ष पहले की बात है, पड़ोसी गांव के चरवाहे जानवर चराने जंगल में जाते थे। बताया जाता है कि पास में कहीं पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन एक भैंस प्रतिदिन कहीं से पानी में लोटपोट होकर आती थी। एक दिन चरवाहे उसी पानी की तलाश कर रहे थे। काफी खोज करने के बाद एक गड्ढे में पानी देखा। पानी में एक शिवलिंग के आकार का पत्थर दिखा। चरवाहों ने पत्थर निकालने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। शाम हो चुकी थी। चरवाहे गायों को लेकर घर लौट आए।
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बताया गया कि महाराजनगर निवासी एक ग्रामीण शिवलिंग के आकार का पत्थर खोदवाकर अपने गांव ले जा रहा था, लेकिन कुछ दूरी पर चलने के बाद बैलगाड़ी का पहिया टूट गया। उसने शिवलिंग को उतार कर जमीन पर रख दिया। पहिया ठीक कराने के बाद उसने शिवलिंग को ले जाने का प्रयास किया लेकिन, उसे नहीं ले जा सका। थक हारकर शिवलिंग उसी स्थान पर स्थापित कर दिया। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां स्थापित शिवलिंग में गौरी जी भी विराजमान हैं, जिस कारण इसका नाम श्रीगौरीशंकर है।
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