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डॉक्टरों की कमी, समय से इलाज मिलना मुश्किल

Wed, 29 Jun 2022 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jun 2022 11:51 PM IST
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Shortage of doctors, difficult to get treatment on time
जिला अस्पताल में दवा लेने के लिए लाइन में खड़े मरीज व तीमारदार। -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जिला अस्पताल में चिकित्सकों का संकट बना हुआ है। करीब तीन माह बाद एक भी नये चिकित्सक की पोस्टिंग न होने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा रही हैं। एक चिकित्सक पर दो से तीन गुना भार पड़ रहा है। इसकी वजह से मरीजों को समय से इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। इस समय अस्पताल में 18 चिकित्सकों के पद खाली हैं।
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जिला अस्पताल में पिछले छह माह में सात चिकित्सक सेवानिवृत्त व गैर जनपद ट्रांसफर होने के कारण चले गए है। इससे यहां पर चिकित्सकों का संकट खड़ा हो गया है। सबसे अधिक दिक्कत फिजीशियन, दंत रोग विशेषज्ञ व सर्जन न होने के कारण आ रही है। जब चिकित्सक नहीं है तो मौजूदा डॉक्टरों पर काफी अधिक भार पड़ रहा है। एक फिजीशियन को ओपीडी में रोजाना 150-200 मरीज देखने पड़ रहे है। यही हाल सर्जन का भी बना हुआ है। करीब सौ मरीज रोजाना ओपीडी में आते है।
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ऑपरेशन करने की जरूरत पड़ती है। ऑपरेशन व ओपीडी दोनों संभालना एक ही चिकित्सक को मुश्किल हो रहा है। यही हाल फिजीशियन का भी है। मेडिकल वार्ड, महिला वार्ड में भर्ती मरीजों को फिजीशियन ही देखकर इलाज करते है। इसी तरह ईएमओ के पद भी खाली चल रहे है। फिजीशियन ही इमरजेंसी में भी ड्यूटी करते है। इससे चिकित्सकों पर अधिक भार आने की वजह से इलाज में दिक्कतें आ रही है।
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दो चिकित्सकों के सहारे ओपीडी
जिला अस्पताल में इस समय फिजीशियन के कई पद खाली चल रहे है। फिजीशियन पद पर डॉ. जेएन सिंह व डॉ. अनुपम मिश्रा तैनात है। जबकि इससे पहले दो फिजीशियन सेवानिवृत्त हो चुके है। नई पोस्टिंग न होने से इन दोनों चिकित्सकों पर भर्ती मरीजों को देखने से लेकर ओपीडी तक में बैठने का भार आ रहा है। इसकी वजह से यह दोनों चिकित्सक दिन रात ड्यूटी कर रहे हैं।
वहीं, जिला अस्पताल में सर्जन पद पर डॉ. गौरव मिश्रा की तैनाती बनी हुई है। तीन चिकित्सकों के पद स्वीकृत है। एक ही पद पर तैनाती होने से डॉ. गौरव पर तीन गुना भार पड़ रहा है। यह ओपीडी के मरीजों से लेकर ऑपरेशन तक करते है। इसकी वजह से मरीजों को इलाज कराने में काफी अधिक समस्या आ रही है।
दंत रोग विभाग में नहीं कोई डॉक्टर
दंत रोग विभाग में कोई भी चिकित्सक नहीं है। केवल फार्मासिस्ट के सहारे काम चलाया जा रहा है। यह अधिकतर समय बंद ही रहता है। इसकी वजह से जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पाता है। वह बाहर जाकर मजबूरी में इलाज करवाते है।

जल्द दूर हो सकती कमी
जिला अस्पताल में इस समय चिकित्सकों की कमी है। 18 पद खाली चल रहे है। अब ट्रांसफर पॉलिसी आ गई है। इससे उम्मीद है कि अस्पताल में कुछ नये चिकित्सक आ जाएंगे।
- डॉ. आरके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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