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एमएलसी को रोकने में फेल थानेदार को फटकार
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सीतापुर। जिले में हाईवे के थानेदार अपनी ड्यूटी को लेकर कितने संजीदा और गंभीर हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है। दो दिन पूर्व सुरक्षा में सेंध लगाकर लखनऊ से आकर शहर में धरना देने में कामयाब रहे एमएलसी आनंद भदौरिया का मामला ही हाईवे के थानेदारों की सक्रियता की पोल खोलने के लिए काफी है। लखनऊ से चलने के बाद जिले की सीमा में एंट्री कर एमएलसी शहर तक आ गए। हैरानी की बात है कि उनको रोकने के लिए हाईवे पर पुलिस को वह दिखे नहीं। हाईवे के थानेदारों की बड़ी चूक सामने आने के बाद पुलिस महकमे में मामला चर्चा में है और एसपी भी इन थानेदारों से काफी नाराज हैं।
14 दिसंबर को कृषि कानून के विरोध में शहर में सपाइयों का विरोध प्रदर्शन था, इससे निपटने के लिए एसपी आरपी सिंह ने पूरी रणनीति बना ली थी। किसे क्या करना है, किस अफसर की क्या जिम्मेदारी है, इसका पूरा खाका 13 दिसंबर की देर रात तक चली बैठक में खींचा गया था। सुबह होते ही रात में बनाई गई प्लानिंग पर पुलिस ने काम शुरू कर दिया। एसपी को खबर मिली थी कि सपा एमएलसी आनंद भदौरिया लखनऊ में हैं।
वह धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सीतापुर आ सकते हैं। एमएलसी को रोकने के लिए एसपी आरपी सिंह ने अटरिया एसओ बृजेश राय, कोतवाल सिधौली राम प्रकाश, एसओ कमलापुर रामनरेश यादव, एसओ खैराबाद धर्म प्रकाश शुक्ला को हाईवे पर मुुस्तैद कर एमएलसी पर कड़ी नजर रखने के आदेश दिए थे। दिखने पर नजरबंद करने का आदेश था। चारों थानेदार लाव लश्कर के साथ हाईवे पर मुस्तैद रहे, लेकिन सुरक्षा में सेंध लगाकर एमएलसी आनंद भदौरिया सीतापुर तक आ गए और थानेदार हाईवे पर डटे रहे।
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पुलिस के भरोसेमंद सूत्रों की माने तो एमएलसी के सीतापुर आने को लेकर एसपी आरपी सिंह ने चारों थानेदारों की कार्यशैली को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईवे के थानेदारों की सामने आई ये बड़ी चूक फिलहाल पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बनी हुई है।
आए तो सड़क के ही रास्ते से होंगे...
एसपी की नाराजगी के बाद थानेदारों के पास जवाब था कि सर, एमएलसी दिखे नहीं, लेकिन सवाल ये है कि वह आए तो सड़क के रास्ते से ही होंगे। अगर थानेदार पूरी सक्रियता के साथ हाईवे पर ड्यूटी कर रहे होते तो दिखते क्यों नहीं। कुछ भी हो, लेकिन इस मामले ने एक बार फिर हाईवे के थानेदारों की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
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14 दिसंबर को कृषि कानून के विरोध में शहर में सपाइयों का विरोध प्रदर्शन था, इससे निपटने के लिए एसपी आरपी सिंह ने पूरी रणनीति बना ली थी। किसे क्या करना है, किस अफसर की क्या जिम्मेदारी है, इसका पूरा खाका 13 दिसंबर की देर रात तक चली बैठक में खींचा गया था। सुबह होते ही रात में बनाई गई प्लानिंग पर पुलिस ने काम शुरू कर दिया। एसपी को खबर मिली थी कि सपा एमएलसी आनंद भदौरिया लखनऊ में हैं।
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वह धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सीतापुर आ सकते हैं। एमएलसी को रोकने के लिए एसपी आरपी सिंह ने अटरिया एसओ बृजेश राय, कोतवाल सिधौली राम प्रकाश, एसओ कमलापुर रामनरेश यादव, एसओ खैराबाद धर्म प्रकाश शुक्ला को हाईवे पर मुुस्तैद कर एमएलसी पर कड़ी नजर रखने के आदेश दिए थे। दिखने पर नजरबंद करने का आदेश था। चारों थानेदार लाव लश्कर के साथ हाईवे पर मुस्तैद रहे, लेकिन सुरक्षा में सेंध लगाकर एमएलसी आनंद भदौरिया सीतापुर तक आ गए और थानेदार हाईवे पर डटे रहे।
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पुलिस के भरोसेमंद सूत्रों की माने तो एमएलसी के सीतापुर आने को लेकर एसपी आरपी सिंह ने चारों थानेदारों की कार्यशैली को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईवे के थानेदारों की सामने आई ये बड़ी चूक फिलहाल पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बनी हुई है।
आए तो सड़क के ही रास्ते से होंगे...
एसपी की नाराजगी के बाद थानेदारों के पास जवाब था कि सर, एमएलसी दिखे नहीं, लेकिन सवाल ये है कि वह आए तो सड़क के रास्ते से ही होंगे। अगर थानेदार पूरी सक्रियता के साथ हाईवे पर ड्यूटी कर रहे होते तो दिखते क्यों नहीं। कुछ भी हो, लेकिन इस मामले ने एक बार फिर हाईवे के थानेदारों की लापरवाही को उजागर कर दिया है।