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असमंजस में शिक्षामित्र
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Thu, 17 Sep 2015 11:41 PM IST
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हाईकोर्ट की ओर से शिक्षामित्रों के सहायक शिक्षक पद पर समायोजन की प्रक्रिया को रद्द करने के बाद उनकी दुविधा बढ़ गई है। इसकी वजह समायोजन के बाद कई शिक्षकों की नई तैनाती में ब्लॉक व तहसीलें बदल जाना है।
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न्यायालय के आदेश के बाद अब ऐसे शिक्षामित्र असमंजस में हैं जिनको सहायक शिक्षक के तौर पर स्कूलों में तैनाती कर दी गई थी। आदेश आने के बाद शिक्षामित्र यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि वे किस विद्यालय में अपनी सेवाएं दें।
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शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक पद पर समायोजित करने के लिए प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 में संशोधन करके न सिर्फ उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से छूट दे दी थी बल्कि एनसीटीई से दो वर्षीय प्रशिक्षण दिलाने का अनुमोदन भी प्राप्त कर लिया था।
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इसके बाद शिक्षामित्रों को दो वर्षीय दूरस्थ शिक्षा प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें जिले के कई स्कूलों में तैनाती दे दी गई थी। इस समायोजन के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के सहायक शिक्षक पद पर समायोजन को रद्द कर दिया था। अब ऐसे में जिले के कई विद्यालयों में सहायक अध्यापक बनने के बाद तैनाती पाए शिक्षामित्रों में दुविधा बढ़ गई है।
शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें यह नहीं मालूम कि वे जिले के किस विद्यालय में अपनी सेवाएं दें। नई तैनाती के अनुसार कई शिक्षामित्रों को उनके मूल स्कूल से 70 से 100 किलोमीटर की दूरी तक जॉइनिंग दी गई थी।
ऐसे में वे पहले के ही विद्यालय में अपनी सेवाएं दे या फिर नई तैनाती वाले स्कूल में जाएं। दूरी अधिक होने के कारण उन्हें कई समस्याओं से भी सामना करना पड़ेगा। ऐसे में अंतिम निर्देश आने तक शिक्षामित्रों के दिलों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।