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घाघरा और शारदा में उफान तेज
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Fri, 03 Jul 2015 10:48 PM IST
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घाघरा का जलस्तर शुक्रवार को फिर से बढ़ने लगा। वहीं बाढ़ की आशंका से भयभीत ग्रामीण गांव से पलायन कर रहे हैं। ऐहतियात के तौर पर प्रशासन ने गांव में एक कंपनी पीएसी तैनात कर दी है।
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हालांकि प्रशासन ने अभी बाढ़ की चेतावनी जारी नहीं की है। घाघरा व शारदा नदी तटीय क्षेत्र में कटान कर रही हैं। कृषि उपयोग की भूमि कटकर नदी में समा रही है।
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मारूबेहड़ प्रतिनिधि के अनुसार गुरुवार देर रात से घाघरा के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने लगी। नदी तेजी से कटान कर रही है।
क्षेत्र के निर्मल पुरवा, कोनी, बरार, टिब्भा, गोडियन पुरवा, महंत पुरवा, रामलाल पुरवा, सिसैया आदि गांवों में घाघरा कटान कर रही है। वहीं खेती की जमीन को भी निगल रही है।
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नदी की लहरों को देखकर ग्रामीण परिवार समेत सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर रेउसा में पीएसी जवानों को तैनात कर दिया है।
रेउसा घाघरा नदी से करीब दस किलोमीटर की दूरी पर है। तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में शारदा नदी का जलस्तर अभी जस का तस है।
बावजूद इसके नदी आहिस्ता-आहिस्ता कटान कर रही है। बोधवा, बरेला, असईपुर, काशीपुर, मल्लापुर क्षेत्र में नदी तटीय क्षेत्र की आबादी व खेती को काट रही है।
इस क्षेत्र में भी ग्रामीण कटान व बाढ़ के भय से परिवार समेत सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। क्षेत्र के लोगों ने सड़कों पर डेरा डाल रखा है।
इस क्षेत्र में भी पीएसी जवानों की दो टुकड़ी को तैनात किया गया है। ये जवान काशीपुर के निकट ठहरे हुए हैं। यह क्षेत्र शारदा नदी का तटीय इलाका है। जो शारदा नदी के सबसे प्रभावित स्थानों में से एक है।
वहीं रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार इस क्षेत्र में भी घाघरा नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी देखने को मिली। यहां फतुल्लापुर के निकट खेती की जमीन भी घाघरा में समाती जा रही है।
किसान बेहद परेशान हैं, क्योंकि अब तक 100 बीघा से अधिक जमीन घाघरा नदी निगल चुकी है।