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पचीसा में सात घर नदी में समाए
Amar ujala Bureau
Updated Sun, 07 Aug 2016 11:32 PM IST
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घाघरा में कटान तेज
- फोटो : अमर उजाला
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बाढ़ग्रस्त इलाके में फिर से बाढ़ की मुसीबत बढ़ने लगी है। घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं नदी तेजी से कटान कर रही है। टापू पर बसे पचीसा गांव में हलचल मची है, वहां पर कटान से भयभीत होकर पीड़ित परिवार घर छोड़ ऊंचे स्थान पर जा रहे हैं। शनिवार रात सात घर कटकर नदी में समा गए।
हालांकि इन घरों से पीड़ित परिवार पहले ही निकल चुके थे। उधर, बैराजों से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। घाघरा का कहर टापू पर बसे पचीसा गांव पर टूट रहा है।
शनिवार की रात भुरऊ, नरेश, सहदेव, नारायन, लखन, नन्हकन्नू व रिंकू के घर कटकर नदी में बह गए। हालांकि कटान को देखते हुए इन घरों में रहने वाले परिवार दो दिन पहले ही घर को छोड़ ऊंचे स्थान पर चले गए थे।
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इन घरों के कटने के बाद नदी का रौद्र रूप देखकर विजय, झब्बू, बच्चाराम, बाबूराम, मनेजर, राधेश्याम, प्यारेलाल, मुरली आदि ने अपने घरों को छोड़ दिया है। टापू पर बसे अधिकांश परिवारों का कहना है कि यहां पर बीमारी तेजी से पांव पसार रही है। टापू पर रात के समय प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है।
जिसकी वजह से यह पता नहीं चल पाता कि नदी कहां पर कटान कर रही है और उसका पानी किस वेग से टापू की तरफ बढ़ रहा है। इधर नदी के किनारे गोड़ियनपुरवा के निकट नदी सड़क को काट रही है। इस कटान की वजह से दुर्गा पुरवा, कोनी के ग्रामीणों की सांसे अटकी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ये ही इकलौता मार्ग है, जिसके कट जाने से उन गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट जाएगा। इधर बाढ़ग्रस्त राम लाल पुरवा, जैतहिया, परमेश्वरदीन पुरवा, ठेकेदार पुरवा, मरेली आदि करीब 40 गांवों में पानी कम पड़ गया था।
लेकिन घाघरा का जलस्तर रविवार की भोर से फिर से बढ़ने लगा। जिसको देखकर लग रहा है कि बाढ़ग्रस्त गांवों से अभी बाढ़ की मुसीबत टली नहीं है। वहीं शारदा नदी का रुख शांत है, वह तटीय क्षेत्रों में हल्का हल्का कटान कर रही है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में हालात फिर से बिगड़ रहे हैं। नदी यहां भी कटान कर रही है।
दुबे पुरवा, पंड़ित पुरवा, अंगरौरा व कनरखी के निकट नदी कटान कर रही है। इस क्षेत्र में भी घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह से बाढ़ग्रस्त गांवों में स्थिति सुधरती नजर नहीं आ रही है। बाढ़ पीड़ित तमाम परिवारों ने अंगरौरा के निकट बंधे पर डेरा डाल रखा है।
तीन सप्ताह गुजर गए हैं, जिले के गांवों में मुसीबत टलती नजर नहीं आ रही है। प्रशासन की मदद अधिकांश बाढ़ पीड़ित परिवारों को नहीं मिल सकी है। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की मदद अभी तक ऐसे किसी गांव में नहीं पहुंची है, जहां पर घरों के अंदर पानी घुसा हो।
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हालांकि इन घरों से पीड़ित परिवार पहले ही निकल चुके थे। उधर, बैराजों से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। घाघरा का कहर टापू पर बसे पचीसा गांव पर टूट रहा है।
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शनिवार की रात भुरऊ, नरेश, सहदेव, नारायन, लखन, नन्हकन्नू व रिंकू के घर कटकर नदी में बह गए। हालांकि कटान को देखते हुए इन घरों में रहने वाले परिवार दो दिन पहले ही घर को छोड़ ऊंचे स्थान पर चले गए थे।
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इन घरों के कटने के बाद नदी का रौद्र रूप देखकर विजय, झब्बू, बच्चाराम, बाबूराम, मनेजर, राधेश्याम, प्यारेलाल, मुरली आदि ने अपने घरों को छोड़ दिया है। टापू पर बसे अधिकांश परिवारों का कहना है कि यहां पर बीमारी तेजी से पांव पसार रही है। टापू पर रात के समय प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है।
जिसकी वजह से यह पता नहीं चल पाता कि नदी कहां पर कटान कर रही है और उसका पानी किस वेग से टापू की तरफ बढ़ रहा है। इधर नदी के किनारे गोड़ियनपुरवा के निकट नदी सड़क को काट रही है। इस कटान की वजह से दुर्गा पुरवा, कोनी के ग्रामीणों की सांसे अटकी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ये ही इकलौता मार्ग है, जिसके कट जाने से उन गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट जाएगा। इधर बाढ़ग्रस्त राम लाल पुरवा, जैतहिया, परमेश्वरदीन पुरवा, ठेकेदार पुरवा, मरेली आदि करीब 40 गांवों में पानी कम पड़ गया था।
लेकिन घाघरा का जलस्तर रविवार की भोर से फिर से बढ़ने लगा। जिसको देखकर लग रहा है कि बाढ़ग्रस्त गांवों से अभी बाढ़ की मुसीबत टली नहीं है। वहीं शारदा नदी का रुख शांत है, वह तटीय क्षेत्रों में हल्का हल्का कटान कर रही है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में हालात फिर से बिगड़ रहे हैं। नदी यहां भी कटान कर रही है।
दुबे पुरवा, पंड़ित पुरवा, अंगरौरा व कनरखी के निकट नदी कटान कर रही है। इस क्षेत्र में भी घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह से बाढ़ग्रस्त गांवों में स्थिति सुधरती नजर नहीं आ रही है। बाढ़ पीड़ित तमाम परिवारों ने अंगरौरा के निकट बंधे पर डेरा डाल रखा है।
तीन सप्ताह गुजर गए हैं, जिले के गांवों में मुसीबत टलती नजर नहीं आ रही है। प्रशासन की मदद अधिकांश बाढ़ पीड़ित परिवारों को नहीं मिल सकी है। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की मदद अभी तक ऐसे किसी गांव में नहीं पहुंची है, जहां पर घरों के अंदर पानी घुसा हो।