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Sitapur News: सब कुछ राममय देख तुलसीदास ने यहां किया प्रवास
Sun, 21 Jan 2024 08:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 21 Jan 2024 08:45 PM IST
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रामपुर मथुरा/सीतापुर। चंद्रभंगा (अब चौका) नदी के किनारे स्थित प्राचीन मुरलीधर मंदिर देख गोस्वामी तुलसीदास ने वहां एक व्यक्ति से जानकारी ली। रमैया नामक उस व्यक्ति ने जब बताया कि यह रमईघाट है और रामपुर स्टेट में आता है, जिसके राजा राम सिंह हैं। सब कुछ राममय सुनकर तुलसीदास यहां ठहर गए। गोस्वामी तुलसीदास ने यहां कई माह तक प्रवास किया था।
अपने प्रवास के दौरान उन्होंने अयोध्या कांड समेत चार खंडों की रचना की थी। हनुमान मंदिर में आज भी उनके खड़ाऊ रखे हैं। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा पर मुरलीधर मंदिर को भी भव्य ढंग से सजाया गया है। सुबह सुंदरकांड का पाठ फिर शाम को दीपोत्सव का आयोजन होगा। रामपुर मथुरा स्टेट के सत्येंद्र प्रताप सिंह बताते हैं, कि करीब 400 वर्ष पूर्व गोस्वामी तुलसीदास जलमार्ग से इधर होकर निकल रहे थे।
नदी के तट पर मंदिर देख एक व्यक्ति से जानकारी लेने लगे। राजदरबार में मौजूद वेंकटेश प्रेस की रामायण में वर्णन मिलता है कि उस व्यक्ति से लेकर घाट, स्टेट व राजा के नाम में राम जुड़ा होने से प्रभवित होकर उन्होंने यहां प्रवास करने का निश्चय किया।
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तुलसीदास ने यहां प्रवास के दौरान रामायण के बालकांड व अयोध्या कांड सहित चार खंडों की रचना की। उनकी हस्तलिखित प्रतियां आज राजदरबार में मौजूद हैं। यहां के तत्कालीन राजा रामसिंह ने गोस्वामी तुलसीदास से दीक्षा भी ली। गोस्वामी जी ने उन्हें तुलसी कंठ पहनाया। यहां से प्रस्थान करते वक्त राजा के निवेदन पर उन्होंने अपने खड़ाऊ व शंख दिया, जो आज भी किले में स्थित हनुमान मंदिर में रखे हुए हैं।
तुलसीदास के नाम पर बसे कई गांव
रामपुर मथुरा के आसपास गोस्वामी तुलसीदास के नाम से कई गांव बसे हैं। इनमें तुलसीपुर खरिका व तुलसीपुर बंजर के नाम प्रमुख हैं।
आज होंगे विभिन्न कार्यक्रम
मुरलीधर मंदिर के पुजारी रामगोपाल अवस्थी ने बताया कि मंदिर की भव्य सजावट की गई है। 22 जनवरी को सुंदरकांड का पाठ व भजन कीर्तन होगा। शोभायात्रा के बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा। शाम को दीपोत्सव होगा।
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अपने प्रवास के दौरान उन्होंने अयोध्या कांड समेत चार खंडों की रचना की थी। हनुमान मंदिर में आज भी उनके खड़ाऊ रखे हैं। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा पर मुरलीधर मंदिर को भी भव्य ढंग से सजाया गया है। सुबह सुंदरकांड का पाठ फिर शाम को दीपोत्सव का आयोजन होगा। रामपुर मथुरा स्टेट के सत्येंद्र प्रताप सिंह बताते हैं, कि करीब 400 वर्ष पूर्व गोस्वामी तुलसीदास जलमार्ग से इधर होकर निकल रहे थे।
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नदी के तट पर मंदिर देख एक व्यक्ति से जानकारी लेने लगे। राजदरबार में मौजूद वेंकटेश प्रेस की रामायण में वर्णन मिलता है कि उस व्यक्ति से लेकर घाट, स्टेट व राजा के नाम में राम जुड़ा होने से प्रभवित होकर उन्होंने यहां प्रवास करने का निश्चय किया।
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तुलसीदास ने यहां प्रवास के दौरान रामायण के बालकांड व अयोध्या कांड सहित चार खंडों की रचना की। उनकी हस्तलिखित प्रतियां आज राजदरबार में मौजूद हैं। यहां के तत्कालीन राजा रामसिंह ने गोस्वामी तुलसीदास से दीक्षा भी ली। गोस्वामी जी ने उन्हें तुलसी कंठ पहनाया। यहां से प्रस्थान करते वक्त राजा के निवेदन पर उन्होंने अपने खड़ाऊ व शंख दिया, जो आज भी किले में स्थित हनुमान मंदिर में रखे हुए हैं।
तुलसीदास के नाम पर बसे कई गांव
रामपुर मथुरा के आसपास गोस्वामी तुलसीदास के नाम से कई गांव बसे हैं। इनमें तुलसीपुर खरिका व तुलसीपुर बंजर के नाम प्रमुख हैं।
आज होंगे विभिन्न कार्यक्रम
मुरलीधर मंदिर के पुजारी रामगोपाल अवस्थी ने बताया कि मंदिर की भव्य सजावट की गई है। 22 जनवरी को सुंदरकांड का पाठ व भजन कीर्तन होगा। शोभायात्रा के बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा। शाम को दीपोत्सव होगा।