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Sitapur News: सरयू का जलस्तर 117.80 मीटर पर स्थिर, खतरा बरकरार
Fri, 31 Jul 2026 12:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:44 AM IST
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बसंतापुर के पास निरीक्षण करतीं एसडीएम धामिनी एम दास। - संवाद
रामपुर मथुरा/रेउसा। सरयू नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को भी 117.80 मीटर पर स्थिर रहा। पानी खतरे के निशान 119 मीटर से महज 1.20 मीटर दूर है। ऐसे में तटवर्ती गांवों से बाढ़ व कटान का खतरा फिलहाल टला नहीं है। इससे लोग चिंतित हैं। उधर, बैराजों से बृहस्पतिवार को 2.79 लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया। बुधवार की तुलना में करीब 30 हजार क्यूसेक पानी ज्यादा डिस्चार्ज किया गया है।
गांजर इलाके में 27 जुलाई को सरयू का जलस्तर 118.20 मीटर पर पहुंच गया था। नदी में उफान आने से पानी तटवर्ती खेतों में भरने लगा था। फसलें जलमग्न हो गईं थीं। बाबाकुटी व प्यारेपुरवा गांव के पास तक पानी पहुंच गया था। बाढ़ के हालात बनने से ग्रामीण सहम गए थे।
हालांकि, बाढ़ रौद्र रूप धारण करती, इससे पहले 28 जुलाई को जलस्तर 10 सेंटीमीटर घटकर 118.10 मीटर और 29 जुलाई को 30 सेंटीमीटर कम होकर 117.80 मीटर पर आ गया। इससे फसलों में भरा पानी निकलने लगा। बाढ़ का खतरा फिलहाल टलने से लोगों को फौरी राहत मिल गई थी। अब जलस्तर दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी 117.80 मीटर पर स्थिर रहा।
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ग्रामीणों के मुताबिक जलस्तर स्थिर रहना भी खतरे का संकेत है। गजराज कैलाश ने बताया कि बैराजों से हर दिन लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक रुक-रुककर बारिश भी हो रही है। ऐसे में जलस्तर किसी भी समय बढ़ सकता है। चंद्रभूषण ने बताया कि कटान का खतरा भी बना हुआ है।
उधर, रेउसा इलाके में शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 0.74 मीटर नीचे है। बृहस्पतिवार दोपहर से सरयू का जलस्तर धीमी गति से बढ़ता देखा गया। मरैली, पासिनपुरवा, गार्गीपुरवा, दुर्गापुरवा आदि तटवर्ती गांवों से सिर्फ 120 मीटर दूर लहरें हिलोरें मार रही हैं। इससे ग्रामीणों की धड़कने तेज हो गईं हैं।
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बसंतापुर में बाढ़ परियोजना के जिओ बैग धंसे, मरम्मत शुरू
लहरपुर। तहसील क्षेत्र में शारदा नदी के दाहिने किनारे बसंतापुर के पास बाढ़ राहत परियोजना के कुछ हिस्से में लगे जिओ बैग दो फीट धंस गए। लगभग 6.61 करोड़ रुपये की लागत वाली 600 मीटर लंबी परियोजना का 20 मीटर हिस्सा धंसा है। ग्रामीण पंकज ने परियोजना में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। एसडीएम लहरपुर धामिनी एम दास व सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने परियोजना का निरीक्षण किया। धंसे जिओ बैग की मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक परियोजना प्रभावी रूप से कार्य कर रही है। नदी का बहाव किनारे से दूर है व गांव कटान से सुरक्षित है। एसडीएम ने सहायक अभियंता, जूनियर इंजीनियर व लेखपाल को लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।
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परियोजना व गांव पूरी तरह सुरक्षित
बसंतापुर में परियोजना व गांव पूरी तरह सुरक्षित है। बारिश का पानी परियोजना के दूसरी ओर भर जाने से संभवत: कुछ जिओ बैग नीचे चले गए थे। मरम्मत कराई जा रही है। बारिश के पानी की तत्काल निकासी करने के निर्देश दिए गए हैं।
-विशाल पोरवाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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तटवर्ती क्षेत्र की निगरानी कर रहीं टीमें
सरयू व शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। हालात पूरी तरह सामान्य हैं। टीमें लगातार तटवर्ती क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं। लोगों से भी अलर्ट रहने को कहा गया है।
-अनिल कुमार राम, तहसीलदार बिसवां
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गांजर इलाके में 27 जुलाई को सरयू का जलस्तर 118.20 मीटर पर पहुंच गया था। नदी में उफान आने से पानी तटवर्ती खेतों में भरने लगा था। फसलें जलमग्न हो गईं थीं। बाबाकुटी व प्यारेपुरवा गांव के पास तक पानी पहुंच गया था। बाढ़ के हालात बनने से ग्रामीण सहम गए थे।
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हालांकि, बाढ़ रौद्र रूप धारण करती, इससे पहले 28 जुलाई को जलस्तर 10 सेंटीमीटर घटकर 118.10 मीटर और 29 जुलाई को 30 सेंटीमीटर कम होकर 117.80 मीटर पर आ गया। इससे फसलों में भरा पानी निकलने लगा। बाढ़ का खतरा फिलहाल टलने से लोगों को फौरी राहत मिल गई थी। अब जलस्तर दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भी 117.80 मीटर पर स्थिर रहा।
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ग्रामीणों के मुताबिक जलस्तर स्थिर रहना भी खतरे का संकेत है। गजराज कैलाश ने बताया कि बैराजों से हर दिन लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक रुक-रुककर बारिश भी हो रही है। ऐसे में जलस्तर किसी भी समय बढ़ सकता है। चंद्रभूषण ने बताया कि कटान का खतरा भी बना हुआ है।
उधर, रेउसा इलाके में शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 0.74 मीटर नीचे है। बृहस्पतिवार दोपहर से सरयू का जलस्तर धीमी गति से बढ़ता देखा गया। मरैली, पासिनपुरवा, गार्गीपुरवा, दुर्गापुरवा आदि तटवर्ती गांवों से सिर्फ 120 मीटर दूर लहरें हिलोरें मार रही हैं। इससे ग्रामीणों की धड़कने तेज हो गईं हैं।
बसंतापुर में बाढ़ परियोजना के जिओ बैग धंसे, मरम्मत शुरू
लहरपुर। तहसील क्षेत्र में शारदा नदी के दाहिने किनारे बसंतापुर के पास बाढ़ राहत परियोजना के कुछ हिस्से में लगे जिओ बैग दो फीट धंस गए। लगभग 6.61 करोड़ रुपये की लागत वाली 600 मीटर लंबी परियोजना का 20 मीटर हिस्सा धंसा है। ग्रामीण पंकज ने परियोजना में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। एसडीएम लहरपुर धामिनी एम दास व सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने परियोजना का निरीक्षण किया। धंसे जिओ बैग की मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक परियोजना प्रभावी रूप से कार्य कर रही है। नदी का बहाव किनारे से दूर है व गांव कटान से सुरक्षित है। एसडीएम ने सहायक अभियंता, जूनियर इंजीनियर व लेखपाल को लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।
परियोजना व गांव पूरी तरह सुरक्षित
बसंतापुर में परियोजना व गांव पूरी तरह सुरक्षित है। बारिश का पानी परियोजना के दूसरी ओर भर जाने से संभवत: कुछ जिओ बैग नीचे चले गए थे। मरम्मत कराई जा रही है। बारिश के पानी की तत्काल निकासी करने के निर्देश दिए गए हैं।
-विशाल पोरवाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
तटवर्ती क्षेत्र की निगरानी कर रहीं टीमें
सरयू व शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। हालात पूरी तरह सामान्य हैं। टीमें लगातार तटवर्ती क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं। लोगों से भी अलर्ट रहने को कहा गया है।
-अनिल कुमार राम, तहसीलदार बिसवां