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Sitapur News: 13.14 लाख रुपये खाते में डंप, 113 अस्पतालों में दवाओं का संकट

Fri, 30 Jan 2026 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Fri, 30 Jan 2026 12:25 AM IST
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Rs 13.14 lakh dumped into account, medicine crisis in 113 hospitals
खैराबाद (सीतापुर)। ड्रग वेयरहाउस से सभी सरकारी अस्पतालों में दवाएं पहुंचाने के लिए परिवहन का टेंडर स्वास्थ्य विभाग नहीं कर पाया है। इसके लिए तीन महीने से 13.14 लाख रुपये का बजट डंप पड़ा है। मिशन निदेशालय से रिमांइडर भेजे जाने के बाद भी इस दिशा में जिम्मेदार कोई कवायद करते नजर नहीं आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही से जिले के 113 अस्पतालों में समय से आवश्यक दवाएं नहीं पहुंच पाती हैं। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ता है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक की ओर से 16 अक्तूबर 2025 को पत्र संख्या 4185 के माध्यम से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ड्रग वेयरहाउस से अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए 13.14 लाख का बजट जारी करते हुए अस्पतालों तक दवाएं समय से पहुंचाने के लिए एकल टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से वाहन चयन करने की बात कही गई थी। अब तक दवाओं की आपूर्ति के लिए परिवहन का टेंडर नहीं कराया जा सका है। यह हाल तब है जब इस मद का बजट स्वास्थ्य विभाग के खाते में डंप पड़ा है।
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मिशन निदेशालय से रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिले के सुदूर क्षेत्रों में संचालित सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों को दवाएं ले जाने के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है। अब वर्तमान वित्तीय वर्ष समाप्त होने में सिर्फ दो माह शेष हैं। ऐसे में दवाओं की आपूर्ति के लिए परिवहन का टेंडर न किया जाना विभाग में चर्चा का विषय बन गया है।
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फार्मासिस्टों पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ

वेयरहाउस से दवाएं उठाने की जिम्मेदारी फार्मासिस्टों पर आ गई है। उन्हें निजी साधनों से दवा ले जानी पड़ रही है। कई फार्मासिस्टों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इससे न केवल आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ रही है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की मूल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।






बजट कम होने से आ रही समस्या

जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी को कवर करने के लिए जारी किया गया बजट कम है। कितने वाहन किस तरह से लगाए जाने हैं यह भी स्पष्ट नहीं है। इस कारण टेंडर नहीं कराया जा सका है। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।



- डॉ. विवेक कनौजिया, डिप्टी सीएमओ
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