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पिता का कर्ज व फर्ज निभा रहा रोहित
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर
Updated Thu, 20 Aug 2015 11:37 PM IST
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पिता का कर्ज वसूलने के लिए बैंक ने मासूम को ही वसूली की नोटिस थमा दिया। मां-बाप का साया सिर से हटने के बाद 12 साल के मासूम के सिर पर छोटे भाई की परवरिश का भी जिम्मा है। पर बैंक अफसरों ने सात हजार रुपये न चुकाने पर घर नीलाम होने का फरमान सुना दिया। डरा-सहमे रोहित ने अब एक होटल से दो हजार रुपये उधार लेकर बैंक में जमा कराए हैं। अभी भी उसे पांच हजार रुपये और चुकाने हैं। मामला नैपालापुर गांव का है। रोहित के पिता ने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की हुसैनगंज शाखा से करीब 11 साल पहले सात रुपये का कर्ज लिया था।
नौ साल की उम्र में रोहित की मां दुनिया छोड़कर चली गई। वह तब क्षेत्र के एक मांटेसरी स्कूल में कक्षा चार का छात्र था। मां की मौत के बाद पिता भी बीमार हो गए। उनकी दवाई का इंतजाम करने के लिए दस वर्ष की उम्र में ही मजदूरी की। इसी बीच पिता ने दम तोड़ दिया। जिसके बाद छोटे भाई किशन (5) की परवरिश की जिम्मेदारी भी उस के कंधों पर आ गई। मां-बाप के जाने के बाद बूढ़े दादी-बाबा की देखभाल भी उसे करनी थी पर मासूम अपने फर्ज से नहीं डिगा। होटलों पर मजदूरी कर अपना व अपने भाई का पेट पाला। इसी बीच मोहल्ले के ही संतोष ने 17 अगस्त को उसे इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से आई एक नोटिस थमा दिया। जिसमें पिता द्वारा लिए गए कर्ज के एवज में सात हजार रुपये चुकाने का आदेश था। रोहित की मानें तो बैंक मैनेजर ने कहा घर बेचो या कर्ज लो रकम तो अदा ही करनी पडेे़गी। परेशान मासूम ने एक होटल मालिक से दो हजार रुपये उधार लेकर बैंक में जमा कराए हैं। बाकी बचे कर्ज को अदा करने के लिए वह बर्तन साफ करने का काम कर रहा है। रात को भी ड्यूटी कर अपने भाई की परवरिश व पिता के कर्ज को उतारने के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
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अगर किसी ने कर्ज लिया है, तो उससे वसूली की जाएगी। बैंक के अपने नियम हैं, इसलिए उन नियमों का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है। रही बात राहत देने की तो खाते का पूरा आंकलन करने के बाद ही निर्णय लिया जा सकता है।
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एसएन शुक्ला, शाखा प्रबंधक, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक
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नौ साल की उम्र में रोहित की मां दुनिया छोड़कर चली गई। वह तब क्षेत्र के एक मांटेसरी स्कूल में कक्षा चार का छात्र था। मां की मौत के बाद पिता भी बीमार हो गए। उनकी दवाई का इंतजाम करने के लिए दस वर्ष की उम्र में ही मजदूरी की। इसी बीच पिता ने दम तोड़ दिया। जिसके बाद छोटे भाई किशन (5) की परवरिश की जिम्मेदारी भी उस के कंधों पर आ गई। मां-बाप के जाने के बाद बूढ़े दादी-बाबा की देखभाल भी उसे करनी थी पर मासूम अपने फर्ज से नहीं डिगा। होटलों पर मजदूरी कर अपना व अपने भाई का पेट पाला। इसी बीच मोहल्ले के ही संतोष ने 17 अगस्त को उसे इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से आई एक नोटिस थमा दिया। जिसमें पिता द्वारा लिए गए कर्ज के एवज में सात हजार रुपये चुकाने का आदेश था। रोहित की मानें तो बैंक मैनेजर ने कहा घर बेचो या कर्ज लो रकम तो अदा ही करनी पडेे़गी। परेशान मासूम ने एक होटल मालिक से दो हजार रुपये उधार लेकर बैंक में जमा कराए हैं। बाकी बचे कर्ज को अदा करने के लिए वह बर्तन साफ करने का काम कर रहा है। रात को भी ड्यूटी कर अपने भाई की परवरिश व पिता के कर्ज को उतारने के लिए जद्दोजहद कर रहा है।
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अगर किसी ने कर्ज लिया है, तो उससे वसूली की जाएगी। बैंक के अपने नियम हैं, इसलिए उन नियमों का पालन करना हमारी जिम्मेदारी है। रही बात राहत देने की तो खाते का पूरा आंकलन करने के बाद ही निर्णय लिया जा सकता है।
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एसएन शुक्ला, शाखा प्रबंधक, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक
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