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नदियां छोड़ गईं मलबा, अब संक्रामक रोगों का खतरा
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सीतापुर। पिछले दिनों बैराजों से छोड़े गए पानी की वजह से उफनाई सरयू और शारदा का जलस्तर तेजी से घटने लगा है। ऐसे में गांवों में भरा पानी भी कम हो गया है। भले ही जलस्तर कम होने से लोगों ने बाढ़ के कहर से राहत की सांस ली है, लेकिन मुसीबतों का नया सैलाब उनके लिए कई परेशानियां लेकर आया है। बाढ़ गांवों में मलबा छोड़ गई है, जो संक्रामक रोगों को दावत दे रहा है। रोगों की रोकथाम के लिए छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
नदियों के उफनाने से गांजरी क्षेत्र के रमपुरवा, सुजाबाद, शेखनपुर, भदफर, खनियापुर, तेजापुर, पट्टी दहेली आदि गांवों के करीब 350 घरों में पानी भर गया था। नदियों का जलस्तर कम होने से गांवों का पानी उतर गया है, लेकिन सैलाब का मलबा अभी गांवों में भरा है। ऊपर से तेज धूप हो रही है। दलदल में मच्छर भी पनपने लगे हैं। ऐसे में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ गया है। तंबौर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. संजय सिंह गौर ने बताया कि उनके अस्पताल आने वाले तमाम रास्तों पर पानी है।
ऐसे में मरीज कम आ रहे हैं, लेकिन बाढ़ग्रस्त गांवों से जुड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साहपुर में ओपीडी बढ़ गई है। बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में फॉगिंग करने की जिम्मेदारी प्रधान और आशा कार्यकर्ता की है। मॉनीटरिंग स्वास्थ्य विभाग करता है। संचारी रोग अभियान के तहत कुछ गांवों में फॉगिंग कराई गई है। अभी प्रधानों ने बाढ़ग्रस्त गांवों में फॉगिंग नहीं कराई है।
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सीएचसी अधीक्षक कहते हैं कि संक्रामक रोगों के खतरे को देखने हुए व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। जरूरी दवाओं को स्टॉक कर लिया गया है। बाढ़ग्रस्त इलाकों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए टीम गठित कर ली गई है।
भूसे में फंगस लगने का खतरा
बाढ़ग्रस्त गांवों में जलभराव के चलते हरे चारे की फसल खराब हो गई है। चरागाह भी तबाह हो गए हैं। ऐसे में पशु भूसे के सहारे हो गए हैं। पशु चिकित्सालय परसदा के डॉ. संत प्रसाद त्यागी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त गांवों में पशुओं को भूसा देने में सावधानी बरतने की जरूरत है। जलभराव से भूसे में फंगस लग जाता है। पशुओं को किसी हाल में फंगसयुक्त भूसा नहीं देना है। नहीं तो पशुओं की सेहत खराब हो जाएगी।
कई गांवों में मेंथा की फसल बर्बाद
बाढ़ से गांजर में नुकसान हुआ है। जान के साथ माल भी चला गया है। कई गांवों में कमर तोड़ मेहनत के बाद लहलहाई मेंथा की फसल जलभराव से बर्बाद हो गई है। तंबौर संवाद के अनुसार क्षेत्र के बड़रिया, बरछता, बरेला, हनुमान सिंह पुरवा, सोधवा, चटाना आदि गांवों में लाखों रुपये की मेंथा की फसल नष्ट हो गई है। तमाम किसान भरे पानी में फसल को काटी है।
पानी घटने से तेज हुई कटान
बारिश थमने के बाद से बैराजों से छोड़ जाने वाले पानी की मात्रा काफी कम हो गई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। रेउसा संवाद के अनुसार परमेश्वरपुरवा, चौकीपुरवा और फौजदारपुरवा में शारदा कटान कर रही है। कम्हरिया शेखूपुरवा शारदा के मुहाने पर हैं। हालांकि, खौफजदा ग्रामीणों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण गृहस्थी का सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। कम्हरिया से काशीपुर मार्ग भी कटान के मुहाने पर है।
अस्पतालों में एंटी वेनम का स्टॉक
बाढ़ के दौरान गांजरी क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हो जाती है। जलभराव में बिलों में छिपे सर्प बाहर आने लगते हैं। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए गांजरी क्षेत्र के सीएचसी और पीएचसी पर एंटीवेनम वैक्सीन के डोज स्टॉक कर लिए गए हैं। तंबौर सीएचसी अधीक्षक डॉ. संजय सिंह गौर ने बताया कि एंटीवेनम के साथ एंटीरेबीज इंजेक्शन की पर्याप्त व्यवस्था है। लहरपुर संवाद के अनुसार सीएचसी लहरपुर में भी एंटीवेनम और एंटीरेबीज वैक्सीन के मुकम्मल इंतजाम हैं।
‘मानसून आने की सोचकर घबरा रहा मन’
मल्लापुर के उदय सिंह ने बताया कि बारिश होने के कारण इस बार हालात समय से पहले ही खराब हो गए। अभी मानसून आना है। ये सोचकर अभी से ही मन घबरा रहा है। बसंतापुर के विनीत तिवारी ने बताया कि गांव में चारों तरफ बाढ़ का कीचड़ फैल गया है। मच्छर पनपने लगे हैं। छिड़काव नहीं हो रहा है। जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। समय रहते अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
रामपोस का कहना है कि जलभराव से मेंथा की फसल चौपट हो गई है। समझ में नहीं आ रहा कि कैसे काम चलाया जागा। सरकार को नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। दुर्गाशरण बाजपेई का कहना है कि बाढ़ से समस्याएं बढ़ने लगी हैं। गांवों में लोग बीमार होने लगे हैं। जलभराव के चलते ग्रामीण अस्पताल भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसकी वजह से कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
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नदियों के उफनाने से गांजरी क्षेत्र के रमपुरवा, सुजाबाद, शेखनपुर, भदफर, खनियापुर, तेजापुर, पट्टी दहेली आदि गांवों के करीब 350 घरों में पानी भर गया था। नदियों का जलस्तर कम होने से गांवों का पानी उतर गया है, लेकिन सैलाब का मलबा अभी गांवों में भरा है। ऊपर से तेज धूप हो रही है। दलदल में मच्छर भी पनपने लगे हैं। ऐसे में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ गया है। तंबौर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. संजय सिंह गौर ने बताया कि उनके अस्पताल आने वाले तमाम रास्तों पर पानी है।
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ऐसे में मरीज कम आ रहे हैं, लेकिन बाढ़ग्रस्त गांवों से जुड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साहपुर में ओपीडी बढ़ गई है। बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में फॉगिंग करने की जिम्मेदारी प्रधान और आशा कार्यकर्ता की है। मॉनीटरिंग स्वास्थ्य विभाग करता है। संचारी रोग अभियान के तहत कुछ गांवों में फॉगिंग कराई गई है। अभी प्रधानों ने बाढ़ग्रस्त गांवों में फॉगिंग नहीं कराई है।
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सीएचसी अधीक्षक कहते हैं कि संक्रामक रोगों के खतरे को देखने हुए व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। जरूरी दवाओं को स्टॉक कर लिया गया है। बाढ़ग्रस्त इलाकों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए टीम गठित कर ली गई है।
भूसे में फंगस लगने का खतरा
बाढ़ग्रस्त गांवों में जलभराव के चलते हरे चारे की फसल खराब हो गई है। चरागाह भी तबाह हो गए हैं। ऐसे में पशु भूसे के सहारे हो गए हैं। पशु चिकित्सालय परसदा के डॉ. संत प्रसाद त्यागी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त गांवों में पशुओं को भूसा देने में सावधानी बरतने की जरूरत है। जलभराव से भूसे में फंगस लग जाता है। पशुओं को किसी हाल में फंगसयुक्त भूसा नहीं देना है। नहीं तो पशुओं की सेहत खराब हो जाएगी।
कई गांवों में मेंथा की फसल बर्बाद
बाढ़ से गांजर में नुकसान हुआ है। जान के साथ माल भी चला गया है। कई गांवों में कमर तोड़ मेहनत के बाद लहलहाई मेंथा की फसल जलभराव से बर्बाद हो गई है। तंबौर संवाद के अनुसार क्षेत्र के बड़रिया, बरछता, बरेला, हनुमान सिंह पुरवा, सोधवा, चटाना आदि गांवों में लाखों रुपये की मेंथा की फसल नष्ट हो गई है। तमाम किसान भरे पानी में फसल को काटी है।
पानी घटने से तेज हुई कटान
बारिश थमने के बाद से बैराजों से छोड़ जाने वाले पानी की मात्रा काफी कम हो गई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। रेउसा संवाद के अनुसार परमेश्वरपुरवा, चौकीपुरवा और फौजदारपुरवा में शारदा कटान कर रही है। कम्हरिया शेखूपुरवा शारदा के मुहाने पर हैं। हालांकि, खौफजदा ग्रामीणों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण गृहस्थी का सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। कम्हरिया से काशीपुर मार्ग भी कटान के मुहाने पर है।
अस्पतालों में एंटी वेनम का स्टॉक
बाढ़ के दौरान गांजरी क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हो जाती है। जलभराव में बिलों में छिपे सर्प बाहर आने लगते हैं। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए गांजरी क्षेत्र के सीएचसी और पीएचसी पर एंटीवेनम वैक्सीन के डोज स्टॉक कर लिए गए हैं। तंबौर सीएचसी अधीक्षक डॉ. संजय सिंह गौर ने बताया कि एंटीवेनम के साथ एंटीरेबीज इंजेक्शन की पर्याप्त व्यवस्था है। लहरपुर संवाद के अनुसार सीएचसी लहरपुर में भी एंटीवेनम और एंटीरेबीज वैक्सीन के मुकम्मल इंतजाम हैं।
‘मानसून आने की सोचकर घबरा रहा मन’
मल्लापुर के उदय सिंह ने बताया कि बारिश होने के कारण इस बार हालात समय से पहले ही खराब हो गए। अभी मानसून आना है। ये सोचकर अभी से ही मन घबरा रहा है। बसंतापुर के विनीत तिवारी ने बताया कि गांव में चारों तरफ बाढ़ का कीचड़ फैल गया है। मच्छर पनपने लगे हैं। छिड़काव नहीं हो रहा है। जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। समय रहते अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
रामपोस का कहना है कि जलभराव से मेंथा की फसल चौपट हो गई है। समझ में नहीं आ रहा कि कैसे काम चलाया जागा। सरकार को नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। दुर्गाशरण बाजपेई का कहना है कि बाढ़ से समस्याएं बढ़ने लगी हैं। गांवों में लोग बीमार होने लगे हैं। जलभराव के चलते ग्रामीण अस्पताल भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसकी वजह से कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है।