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चौका, किवानी व गोबरहिया नदी में बढ़ा जलस्तर, 20 गांव पर खतरा बढ़ा
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फोटो-23 सीतापुर में सकरन बाढ़ ग्रस्त इलाके में बाढ़ के पानी से होकर निकलते ग्रामीण। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। तराई इलाके में उफनाई शारदा व सरयू नदी के जलस्तर में रविवार को कमी आई है। छोटी नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। केवानी, चौका व गोबरहिया नदी के जलस्तर बढ़ने से इन नदियों के किनारे बसे करीब 20 गांवों में पानी पहुंच गया है। इन गांवों की फसलें डूब गई हैं। वहीं, लहरपुर में शुक्रवार को नदी में डूबे मां बेटी के शव रविवार को झाड़ियों में फंसे मिले।
लहरपुर में शुक्रवार को बाढ़ में डूबी मां व बेटी के शव रविवार को झाड़ियों में फंसे मिले। तंबौर में कटान की चपेट में आकर 10 दुकानें धराशाही हो गई। इससे करीब 10 लाख का नुकसान व्यापारियों को उठाना पड़ा। रेउसा में मुख्य संपर्क मार्गों से पानी कम हुआ है। गांवों के हालात जस के तस बने हैं। एसडीएम, तहसीलदार व अन्य अफसरों ने गांवों में पहुंचकर राहत सामग्री वितरित कराई। इस बाढ़ की चपेट में महमूदाबाद, लहरपुर व बिसवां तहसील के 100 से अधिक गांव प्रभावित है।
नदी में डूबे मां-बेटी के मिले शव
लहरपुर संवाद के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के ग्राम उमरा में बाढ़ के पानी में डूबे राहुल को बचाने के प्रयास में एक ही परिवार के मैकिन, यशोदा, कल्पना व रेखा पानी में डूब गई थी। जिसमें राहुल व रेखा को पुलिस व एनडीआरएफ की टीम द्वारा बचा लिया गया था। दुर्घटना में मैकिन की मौत हो गई थी। यशोदा और कल्पना यह दोनों मां-बेटी डूब गईं थी। जिनकी काफी तलाश के बाद भी पता नहीं चल सका था। रविवार सुबह परिजनों और पुलिस द्वारा बाढ़ के पानी में यशोदा और कल्पना की तलाश की गई तो उनके शव पास में एक झाड़ में फंसे हुए मिले। कोतवाली प्रभारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि शवों को पीएम के लिए भेज दिया गया है। लहरपुर इलाके में मुख्य मार्गों पर भरा पानी अब कम हो रहा है, इससे लोगों को मामूली राहत मिलने के आसार नजर आ रहे हैं। लहरपुर से तंबौर व लालपुर मार्ग पर अब पानी कम हुआ है। इससे आवागमन खुलने लगा है।
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10 साल बाद आई बाढ़, दो फिट भरा पानी
जहांगीराबाद संवाद के अनुसार क्षेत्र से होकर निकली चौका, किवानी व ककरहिया नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। अब यह पानी खेतों सहित गांवों में भी दस्तक देने लगा है। चारों ओर अफरातफरी का माहौल है। खेतों में पानी भर जाने से धान की फ सल डूब रही हैं। किवानी नदी में अत्यधिक पानी आ जाने से खेतों सहित जहांगीराबाद कस्बे की उत्तरी किनारे पर निचले स्थानों में बसे परिवारों के घरों में पानी भरना शुरू हो गया है। अगर इसी प्रकार पानी बढ़ता रहा तो कस्बे की आबादी में भी पानी भर जाएगा। अचानक खेतों में पानी भर जाने से दैनिक मजदूरों की भी पौ बारह हो रही है। मजदूरों की मंडी में मजदूरों द्वारा मनमानी डेढ़ गुना से भी अधिक मजदूरी ली जा रही है। जिससे किसान और बेहाल है। चौका नदी में रमुवापुर भैंसहा जाने वाले मार्ग पर खनुवापुर गांव के पास बने रपटा पुल पर दो फिट तक पानी भर गया है। केवानी नदी का पानी निकलकर कस्बे के किनारे दुबघटिया और हौदा व डुबका जैसे तालाबों में भर गया है। जिससे तीनों तालाब एक में मिल गए हैं। खेतों को जाने के रास्ते भी अवरुद्ध हुए है। फिर भी पानी का बढना लगातार जारी है। इन नदियों में करीब 10 बरस बाद बाढ़ आई है।
बाढ़ में गिरी 10 दुकानें, टला बड़ा हादसा
तंबौर संवाद के अनुसार बाढ़ के पानी की वजह से लहरपुर तंबौर मार्ग पर नौवनपुरवा में सड़क किनारे बनी 10 पक्की दुकानें बाढ़ के पानी से ध्वस्त हो गई। जिस समय यह हादसा हुआ कई ग्राहक व दुकानदार वहीं पर मौजूद थे। गनीमत यह रही कि किसी को कोई चोट नहीं आई। लहरपुर तंबौर मार्ग पर सड़क के किनारे दो साल पहले सुनील जायसवाल ने सात व शिवेन्द्र मिश्रा ने 10 पक्की दुकानें बनवाई थी। जिनके आगे टीन शेड भी पड़े हुए थे। इन दुकानों में लोग किराए पर लेकर अलग अलग सरिया सीमेंट, मेडिकल स्टोर, किराना व अन्य दुकानें खोल रखी थी। दुकानों के पीछे भरे बाढ़ के पानी के कारण सभी दुकानें भरभराकर गिर गई।। गिरने की आहट मिलते ही मौजूद ग्राहक व दुकानदार भागकर बाहर आ गए। करीब 10 लाख का नुकसान हुआ है।
डूब रही फसल
सेवता संवाद के अनुसार रेउसा क्षेत्र के चौकानदी का जल स्तर बढने से ग्राम बरी, नारायनपुर, बांछेपुर, चंद्रसेनी, मोहला, ईरापुर, सुतौली, बाकरपुरवा, जलिमपुर, बरबटा आदि गांव जलमग्न हो गए है। खेत में भरा पानी धान, उरद, तिल्ली की फसल को नष्ट कर रहा है। इससे बेहद परेशान है। इनसेट
ऊंचे स्थानों से पानी कम, निचले में भराव
रेउसा संवाद के अनुसार नदियों के जलस्तर में कुछ कमी आई है। इससे गांवों के मुख्य संपर्क मार्गो से पानी हटने लगा है। इससे ग्रामीणों को कुछ राहत मिली है। लेकिन निचले इलाके के गांवों में अभी भी पानी की चपेट में बने हुए है। तहसीलदार अभिचल प्रताप सिंह ने रविवार को बाढग़्रस्त गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनी। उनको लंच पैकेट वितरित किए हैं।
बाढ़ के हालातों से निपटने को लेकर की बैठक
बाढ़ के हालात को देखते हुए डीएम विशाल भारद्वाज, एसपी सिंह भी अलर्ट हैं। वह लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर हालात का जायजा ले रहे हैं। रविवार को भी डीएम-एसपी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र सकरन में पहुंचे, जहां पर बाढ़ के हालातों से निपटने को लेकर अफसरों के साथ बैठक कर उन्हें जरूरी आदेश दिए।
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लहरपुर में शुक्रवार को बाढ़ में डूबी मां व बेटी के शव रविवार को झाड़ियों में फंसे मिले। तंबौर में कटान की चपेट में आकर 10 दुकानें धराशाही हो गई। इससे करीब 10 लाख का नुकसान व्यापारियों को उठाना पड़ा। रेउसा में मुख्य संपर्क मार्गों से पानी कम हुआ है। गांवों के हालात जस के तस बने हैं। एसडीएम, तहसीलदार व अन्य अफसरों ने गांवों में पहुंचकर राहत सामग्री वितरित कराई। इस बाढ़ की चपेट में महमूदाबाद, लहरपुर व बिसवां तहसील के 100 से अधिक गांव प्रभावित है।
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नदी में डूबे मां-बेटी के मिले शव
लहरपुर संवाद के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के ग्राम उमरा में बाढ़ के पानी में डूबे राहुल को बचाने के प्रयास में एक ही परिवार के मैकिन, यशोदा, कल्पना व रेखा पानी में डूब गई थी। जिसमें राहुल व रेखा को पुलिस व एनडीआरएफ की टीम द्वारा बचा लिया गया था। दुर्घटना में मैकिन की मौत हो गई थी। यशोदा और कल्पना यह दोनों मां-बेटी डूब गईं थी। जिनकी काफी तलाश के बाद भी पता नहीं चल सका था। रविवार सुबह परिजनों और पुलिस द्वारा बाढ़ के पानी में यशोदा और कल्पना की तलाश की गई तो उनके शव पास में एक झाड़ में फंसे हुए मिले। कोतवाली प्रभारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि शवों को पीएम के लिए भेज दिया गया है। लहरपुर इलाके में मुख्य मार्गों पर भरा पानी अब कम हो रहा है, इससे लोगों को मामूली राहत मिलने के आसार नजर आ रहे हैं। लहरपुर से तंबौर व लालपुर मार्ग पर अब पानी कम हुआ है। इससे आवागमन खुलने लगा है।
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10 साल बाद आई बाढ़, दो फिट भरा पानी
जहांगीराबाद संवाद के अनुसार क्षेत्र से होकर निकली चौका, किवानी व ककरहिया नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। अब यह पानी खेतों सहित गांवों में भी दस्तक देने लगा है। चारों ओर अफरातफरी का माहौल है। खेतों में पानी भर जाने से धान की फ सल डूब रही हैं। किवानी नदी में अत्यधिक पानी आ जाने से खेतों सहित जहांगीराबाद कस्बे की उत्तरी किनारे पर निचले स्थानों में बसे परिवारों के घरों में पानी भरना शुरू हो गया है। अगर इसी प्रकार पानी बढ़ता रहा तो कस्बे की आबादी में भी पानी भर जाएगा। अचानक खेतों में पानी भर जाने से दैनिक मजदूरों की भी पौ बारह हो रही है। मजदूरों की मंडी में मजदूरों द्वारा मनमानी डेढ़ गुना से भी अधिक मजदूरी ली जा रही है। जिससे किसान और बेहाल है। चौका नदी में रमुवापुर भैंसहा जाने वाले मार्ग पर खनुवापुर गांव के पास बने रपटा पुल पर दो फिट तक पानी भर गया है। केवानी नदी का पानी निकलकर कस्बे के किनारे दुबघटिया और हौदा व डुबका जैसे तालाबों में भर गया है। जिससे तीनों तालाब एक में मिल गए हैं। खेतों को जाने के रास्ते भी अवरुद्ध हुए है। फिर भी पानी का बढना लगातार जारी है। इन नदियों में करीब 10 बरस बाद बाढ़ आई है।
बाढ़ में गिरी 10 दुकानें, टला बड़ा हादसा
तंबौर संवाद के अनुसार बाढ़ के पानी की वजह से लहरपुर तंबौर मार्ग पर नौवनपुरवा में सड़क किनारे बनी 10 पक्की दुकानें बाढ़ के पानी से ध्वस्त हो गई। जिस समय यह हादसा हुआ कई ग्राहक व दुकानदार वहीं पर मौजूद थे। गनीमत यह रही कि किसी को कोई चोट नहीं आई। लहरपुर तंबौर मार्ग पर सड़क के किनारे दो साल पहले सुनील जायसवाल ने सात व शिवेन्द्र मिश्रा ने 10 पक्की दुकानें बनवाई थी। जिनके आगे टीन शेड भी पड़े हुए थे। इन दुकानों में लोग किराए पर लेकर अलग अलग सरिया सीमेंट, मेडिकल स्टोर, किराना व अन्य दुकानें खोल रखी थी। दुकानों के पीछे भरे बाढ़ के पानी के कारण सभी दुकानें भरभराकर गिर गई।। गिरने की आहट मिलते ही मौजूद ग्राहक व दुकानदार भागकर बाहर आ गए। करीब 10 लाख का नुकसान हुआ है।
डूब रही फसल
सेवता संवाद के अनुसार रेउसा क्षेत्र के चौकानदी का जल स्तर बढने से ग्राम बरी, नारायनपुर, बांछेपुर, चंद्रसेनी, मोहला, ईरापुर, सुतौली, बाकरपुरवा, जलिमपुर, बरबटा आदि गांव जलमग्न हो गए है। खेत में भरा पानी धान, उरद, तिल्ली की फसल को नष्ट कर रहा है। इससे बेहद परेशान है। इनसेट
ऊंचे स्थानों से पानी कम, निचले में भराव
रेउसा संवाद के अनुसार नदियों के जलस्तर में कुछ कमी आई है। इससे गांवों के मुख्य संपर्क मार्गो से पानी हटने लगा है। इससे ग्रामीणों को कुछ राहत मिली है। लेकिन निचले इलाके के गांवों में अभी भी पानी की चपेट में बने हुए है। तहसीलदार अभिचल प्रताप सिंह ने रविवार को बाढग़्रस्त गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनी। उनको लंच पैकेट वितरित किए हैं।
बाढ़ के हालातों से निपटने को लेकर की बैठक
बाढ़ के हालात को देखते हुए डीएम विशाल भारद्वाज, एसपी सिंह भी अलर्ट हैं। वह लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर हालात का जायजा ले रहे हैं। रविवार को भी डीएम-एसपी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र सकरन में पहुंचे, जहां पर बाढ़ के हालातों से निपटने को लेकर अफसरों के साथ बैठक कर उन्हें जरूरी आदेश दिए।