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बढ़ते प्रदूषण से टीबी कस रहा शिकंजा

Tue, 10 May 2016 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 10 May 2016 11:54 PM IST
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Rising pollution increasing TB cases
टीबी लोगो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

बढ़ता प्रदूषण व बिगड़ती लाइफ स्टाइल से एकाएक क्षय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी वजह से कभी गरीबों के घरों की बीमारी कही जाने वाली ट्यूबर क्लोसिस (टीबी) अब अमीरों के यहां भी दस्तक दे रही है। डॉक्टर इसके पीछे बिगड़ता खानपान व प्रदूषण को मुख्य वजह मान रहे हैं।

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संक्रमण के चलते यह रोग बहुत तेजी से फैल रहा है। अप्रैल में ही अकेले 138 रोगी सामने आए हैं। इन मरीजों का इलाज जिला अस्पताल से लेकर क्षेत्र के डाट्स केंद्रों पर किया जा रहा है। 
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जिले में 10147 लोग टीबी रोग से ग्रसित हैं। अप्रैल में हुई जांच में 138 नए रोगी सामने आए। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे के हाथ-पांव फूल गए। चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषित वातावरण के साथ ही शराब व अन्य तरह का नशा भी टीबी रोगियों की संख्या बढ़ा रहा है।
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इसके अलावा बिगड़ती लाइफ स्टाल भी इसके लिए जिम्मेदार है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी यह रोग तेजी से फैल रहा है। दवा से इसका इलाज संभव है लेकिन जागरूकता के अभाव में हल्का सा ठीक होने पर ही दवा बीच में छोड़ देते हैं। दवा का कोर्स पूरा न होने से बीमारी जड़ से खत्म नहीं हो पाती। 

हवा से फैलता रोग
टीबी एक संक्रामक बीमारी है। जो एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में प्रवेश करती है। खासकर कमजोर लोग व ऐसे लोगों में जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें चपेट में ले लेती है। क्षयरोग सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करता है। यह हवा के माध्यम से भी फैलता है।

बीमारी के लक्षण  
खांसी के दौरान थूक से खून निकलना, बुखार, रात को पसीना आना और वजन घटना।


पूरे शरीर को संक्रमित करती टीबी
तपेदिक तीन तरह का होता है। जो कि पूरे शरीर को संक्रमित करता है। फेफड़े की टीबी, पेट की टीबी और हड्डी की टीबी। तीनों ही क्षयरोग के प्रकारों के कारण, पहचान और लक्षण अलग-अलग होते हैं। इसके साथ ही इन तीनों का उपचार भी अलग-अलग तरह से किया जाता है।

होता है इलाज
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल तक क्षय रोग की जांच व इलाज की व्यवस्था है। मरीजों को जांच के बाद चिह्नित कर उनका उपचार किया जाता है।

-डॉ. हरगोविंद सिंह, सीएमओ 

चलाया जाता कोर्स
टीबी के मरीज सामने आने पर दवा का कोर्स चलाया जाता है। मरीज को दूर तक न जाना पड़े, इसलिए उसके घर व मोहल्ले के आसपास दवा वितरण की व्यवस्था की गई है। जांच के बाद मरीज को बता दिया जाता है कि वह अपने निकट के केंद्र से दवा लेकर कोर्स पूरा करे।
-मुसाफिर यादव, जिला क्षय रोग अधिकारी
 

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