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Sitapur News: क्रय केंद्रों पर गन्ना उतारने के नाम पर वसूली
Mon, 25 Nov 2024 03:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 25 Nov 2024 03:07 AM IST
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सीतापुर। जिले में गन्ना क्रय केंद्रों पर बैलगाड़ी या ट्रॉली से गन्ना उतराई के नाम पर वसूली का खेल शुरू हो गया है। किसानों के मुताबिक, उतराई के नाम पर दो से तीन रुपये प्रति क्विंटल लिया जा रहा है।
इसके अलावा 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक प्रत्येक ट्रॉली पर कटौती की जाती है। इससे किसानों में आक्रोश है। जिले में एक सरकारी व चार निजी कंपनियों की चीनी मिलें हैं। सरकारी को छोड़कर सभी चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू हो गया है।
इसके साथ ही गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों का आर्थिक शोषण भी होने लगा है। हर साल की तरह इस सीजन में भी क्रय केंद्रों पर गन्ना लेकर जाने वाले किसानों से उतराई वसूली जा रही है। किसानों के मुताबिक, दो से तीन रुपये प्रति क्विंटल उतराई ली जा रही है। इसके अलावा प्रति ट्रॉली 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक कटौती अलग से कर ली जाती है।
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मजबूरन दे रहे उतराई
हरगांव शुगर मिल के क्रय केंद्र झरेखापुर-ए, झरेखापुर-बी और सीतापुर पर किसानों से उतराई के नाम पर दो रुपये प्रति क्विंटल वसूले जा रहे हैं। किसान अनुज शुक्ला और शिवकुमार सिंह ने बताया कि उतराई न देने पर ट्रॉली से गन्ना नहीं उतारा जाता है। समय बर्बाद होता देख मजबूरन किसान उतराई देते हैं।
कोई सुनने वाला नहीं
कमोलिया-बी और सिधौली-ए गन्ना क्रय केंद्र पर उतराई के अलावा प्रति ट्रॉली 70 किलो से एक क्विंटल तक कटौती की जा रही है। राजेश ने बताया कि हैदरगढ़ चीनी मिल के इन क्रय केंद्रों पर किसानों का जमकर शोषण किया जा रहा है। किसानों की समस्या कोई सुनने वाला नहीं है।
शोषण बंद नहीं हुआ तो करेंगे आंदोलन
किसानों को कदम-कदम पर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। गेहूं की बोआई के लिए डीएपी नहीं मिल रही, नहरों में पानी नहीं है। अब गन्ना क्रय केंद्रों पर उतराई वसूली जा रही है। सूखे के नाम पर कटौती की जाती है। भारतीय मजदूर किसान संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरज सिंह ने कहा कि जिले में किसानों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है और जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं। शोषण जल्द ही बंद नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
किसान शिकायत करें, कार्रवाई होगी
गन्ना उतराई का पैसा नहीं लिया जाता है। ऐसी शिकायतें पहले भी मिली हैं। जब क्रय केंद्रों पर जांच के लिए जाते हैं तो कोई किसान उतराई वसूले जाने की बात नहीं स्वीकारता है। प्रति ट्रॉली एक प्रतिशत सूखा कटौती का नियम है। अधिक कटौती नहीं की जा सकती है। किसानों को यदि कोई भी समस्या है तो वह मुझसे शिकायत कर सकते हैं। मामले की जांच करवा कर कार्रवाई की जाएगी।
- रत्नेश्वर त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी
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इसके अलावा 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक प्रत्येक ट्रॉली पर कटौती की जाती है। इससे किसानों में आक्रोश है। जिले में एक सरकारी व चार निजी कंपनियों की चीनी मिलें हैं। सरकारी को छोड़कर सभी चीनी मिलों में पेराई सत्र शुरू हो गया है।
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इसके साथ ही गन्ना क्रय केंद्रों पर किसानों का आर्थिक शोषण भी होने लगा है। हर साल की तरह इस सीजन में भी क्रय केंद्रों पर गन्ना लेकर जाने वाले किसानों से उतराई वसूली जा रही है। किसानों के मुताबिक, दो से तीन रुपये प्रति क्विंटल उतराई ली जा रही है। इसके अलावा प्रति ट्रॉली 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक कटौती अलग से कर ली जाती है।
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मजबूरन दे रहे उतराई
हरगांव शुगर मिल के क्रय केंद्र झरेखापुर-ए, झरेखापुर-बी और सीतापुर पर किसानों से उतराई के नाम पर दो रुपये प्रति क्विंटल वसूले जा रहे हैं। किसान अनुज शुक्ला और शिवकुमार सिंह ने बताया कि उतराई न देने पर ट्रॉली से गन्ना नहीं उतारा जाता है। समय बर्बाद होता देख मजबूरन किसान उतराई देते हैं।
कोई सुनने वाला नहीं
कमोलिया-बी और सिधौली-ए गन्ना क्रय केंद्र पर उतराई के अलावा प्रति ट्रॉली 70 किलो से एक क्विंटल तक कटौती की जा रही है। राजेश ने बताया कि हैदरगढ़ चीनी मिल के इन क्रय केंद्रों पर किसानों का जमकर शोषण किया जा रहा है। किसानों की समस्या कोई सुनने वाला नहीं है।
शोषण बंद नहीं हुआ तो करेंगे आंदोलन
किसानों को कदम-कदम पर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। गेहूं की बोआई के लिए डीएपी नहीं मिल रही, नहरों में पानी नहीं है। अब गन्ना क्रय केंद्रों पर उतराई वसूली जा रही है। सूखे के नाम पर कटौती की जाती है। भारतीय मजदूर किसान संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरज सिंह ने कहा कि जिले में किसानों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है और जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं। शोषण जल्द ही बंद नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
किसान शिकायत करें, कार्रवाई होगी
गन्ना उतराई का पैसा नहीं लिया जाता है। ऐसी शिकायतें पहले भी मिली हैं। जब क्रय केंद्रों पर जांच के लिए जाते हैं तो कोई किसान उतराई वसूले जाने की बात नहीं स्वीकारता है। प्रति ट्रॉली एक प्रतिशत सूखा कटौती का नियम है। अधिक कटौती नहीं की जा सकती है। किसानों को यदि कोई भी समस्या है तो वह मुझसे शिकायत कर सकते हैं। मामले की जांच करवा कर कार्रवाई की जाएगी।
- रत्नेश्वर त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी