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Sitapur News: 57 साल बाद सोमवती अमावस्या पर्व पर दुर्लभ संयोग
Sun, 16 Jul 2023 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 16 Jul 2023 12:07 AM IST
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नैमिषारण्य(सीतापुर)। इस बार सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। क्योंकि इस बार सावन के दूसरे सोमवार पर अमावस्या पड़ रही है। इसके चलते नैमिषारण्य तीर्थ में लाखों श्रद्धालु आने की उम्मीद है।
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन के प्रथम कृष्ण पक्ष 17 जुलाई को 57 साल बाद सोमवती हरियाली अमावस्या का संयोग बन रहा है। 1966 में 18 जुलाई को सोमवती हरियाली अमावस्या का पर्व पड़ा था। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार सोमवती हरियाली अमावस्या पर स्नान दान के साथ शिव साधना विशेष फलदाई है। ज्योतिषाचार्य प्रभाकर द्विवेदी ने बताया कि 17 जुलाई को मिथुन राशि का चंद्रमा में संयोग से सोमवती हरियाली अमावस्या का पुण्य काल आ रहा है। इसी दिन महाकाल की सवारी भी है। इस समय दान, साधना व उपासना का अभूतपूर्व लाभ मिलता है। इससे पहले यह स्थिति 1966 में बनी थी।
57 साल पहले जैसी रहेगी ग्रहों की स्थिति
सूर्य, चंद्र, बुध, राहु व केतु 57 वर्ष पहले जिन राशि में थे। 2023 में इस बार उन्हीं राशि में रहेंगे। ग्रह गोचर की गणना के अनुसार चलें तो सूर्य, चंद्र, बुध, राहु, केतु यह पांच ग्रह 1966 में सावन में जिन राशियों में थे। उसी क्रमानुसार इस बार भी सूर्य कर्क राशि, चंद्र मिथुन राशि, बुध कर्क राशि और राहु व केतु क्रमश: मेष और तुला राशि में गोचर रहेंगे।
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स्नान दान व शिव की साधना के लिए लाभकारी
हरियाली अमावस्या पर परंपराओं का भी अपना महत्व है। हालांकि पौराणिक व शास्त्रीय मान्यता के आधार पर देखें तो अमावस्या पर स्नान की परंपरा है। वहीं पितरों के निमित्त तर्पण पिंडदान व अन्य पूजा के साथ-साथ गो ग्रास भिक्षुक को अन्नदान आदि करने का भी विधान है। यही नहीं अमावस्या की मध्य रात में भगवान शिव और शक्ति की संयुक्त साधना भी आध्यात्मिक सफलता प्रदान करती है।
पांच ग्रहों की शांति के लिए यह करें उपाय
-सूर्य ग्रह के लिए वैदिक मंत्र या एकाक्षरी बीज मंत्र ओम घृणि: सूर्याय नम: का जाप व तांबे के कलश में गेहूं और गुड़ रखकर वैदिक ब्राह्मण को दान करने से लाभ होगा।
-चंद्र ग्रह की अनुकूलता के लिए ओम सोम सोमाय नम: का जाप करना चाहिए। सफेद वस्तुओं का दान व शिव जी का विशेष अष्टाध्यायी रुद्राभिषेक करने से शारीरिक रोग का शमन होगा।
-बुध ग्रह की अनुकूलता के लिए हरा मूंग का दान व हरी तुलसी के पौधे को रोपने का लाभ भी मिलेगा। हालांकि यह तुलसी का पौधा गुरुवार के दिन रोपना शुभ रहेगा।
-राहु ग्रह की अनुकूलता के लिए पक्षियों को दाना, भिक्षुकों की सेवा और रोगियों को चिकित्सा की उपलब्धता कराना भी श्रेष्ठ रहेगा।
-केतु ग्रह की अनुकूलता के लिए श्वान को भोजन, मछलियों को पांच प्रकार के आटे की गोलियां डालने एवं जरूरतमंद को वस्त्र दान करने से अनुकूलता रहेगी।
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हिंदू पंचांग के अनुसार सावन के प्रथम कृष्ण पक्ष 17 जुलाई को 57 साल बाद सोमवती हरियाली अमावस्या का संयोग बन रहा है। 1966 में 18 जुलाई को सोमवती हरियाली अमावस्या का पर्व पड़ा था। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार सोमवती हरियाली अमावस्या पर स्नान दान के साथ शिव साधना विशेष फलदाई है। ज्योतिषाचार्य प्रभाकर द्विवेदी ने बताया कि 17 जुलाई को मिथुन राशि का चंद्रमा में संयोग से सोमवती हरियाली अमावस्या का पुण्य काल आ रहा है। इसी दिन महाकाल की सवारी भी है। इस समय दान, साधना व उपासना का अभूतपूर्व लाभ मिलता है। इससे पहले यह स्थिति 1966 में बनी थी।
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57 साल पहले जैसी रहेगी ग्रहों की स्थिति
सूर्य, चंद्र, बुध, राहु व केतु 57 वर्ष पहले जिन राशि में थे। 2023 में इस बार उन्हीं राशि में रहेंगे। ग्रह गोचर की गणना के अनुसार चलें तो सूर्य, चंद्र, बुध, राहु, केतु यह पांच ग्रह 1966 में सावन में जिन राशियों में थे। उसी क्रमानुसार इस बार भी सूर्य कर्क राशि, चंद्र मिथुन राशि, बुध कर्क राशि और राहु व केतु क्रमश: मेष और तुला राशि में गोचर रहेंगे।
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स्नान दान व शिव की साधना के लिए लाभकारी
हरियाली अमावस्या पर परंपराओं का भी अपना महत्व है। हालांकि पौराणिक व शास्त्रीय मान्यता के आधार पर देखें तो अमावस्या पर स्नान की परंपरा है। वहीं पितरों के निमित्त तर्पण पिंडदान व अन्य पूजा के साथ-साथ गो ग्रास भिक्षुक को अन्नदान आदि करने का भी विधान है। यही नहीं अमावस्या की मध्य रात में भगवान शिव और शक्ति की संयुक्त साधना भी आध्यात्मिक सफलता प्रदान करती है।
पांच ग्रहों की शांति के लिए यह करें उपाय
-सूर्य ग्रह के लिए वैदिक मंत्र या एकाक्षरी बीज मंत्र ओम घृणि: सूर्याय नम: का जाप व तांबे के कलश में गेहूं और गुड़ रखकर वैदिक ब्राह्मण को दान करने से लाभ होगा।
-चंद्र ग्रह की अनुकूलता के लिए ओम सोम सोमाय नम: का जाप करना चाहिए। सफेद वस्तुओं का दान व शिव जी का विशेष अष्टाध्यायी रुद्राभिषेक करने से शारीरिक रोग का शमन होगा।
-बुध ग्रह की अनुकूलता के लिए हरा मूंग का दान व हरी तुलसी के पौधे को रोपने का लाभ भी मिलेगा। हालांकि यह तुलसी का पौधा गुरुवार के दिन रोपना शुभ रहेगा।
-राहु ग्रह की अनुकूलता के लिए पक्षियों को दाना, भिक्षुकों की सेवा और रोगियों को चिकित्सा की उपलब्धता कराना भी श्रेष्ठ रहेगा।
-केतु ग्रह की अनुकूलता के लिए श्वान को भोजन, मछलियों को पांच प्रकार के आटे की गोलियां डालने एवं जरूरतमंद को वस्त्र दान करने से अनुकूलता रहेगी।