फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Ramadal set out on a pilgrimage, colours of faith spread

Sitapur News: धर्मयात्रा पर निकला रामादल, बिखरे आस्था के रंग

Thu, 19 Feb 2026 12:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Thu, 19 Feb 2026 12:21 AM IST
विज्ञापन
Ramadal set out on a pilgrimage, colours of faith spread
नैमिषारण्य। नैमिषारण्य में डंके की परंपरागत ध्वनि के साथ बुधवार को मोक्षदायिनी 84 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ भव्य शुभारंभ हुआ। इस दौरान धर्मयात्रा पर निकले रामादल से भक्ति के पथ पर आस्था के रंग बिखरे दिखे। भक्ति पथ पर बोल कड़ाकड़ सीतारात के जयघोष की गूंज के साथ ढोल-मंजीरे की ध्वनि पर झूमते साधु-संतों का कारवां राम नाम का जाप करते हुए धर्मयात्रा पर आगे बढ़ा। परिक्रमार्थियों के साथ ही रथ, हाथी-घोड़ा, ट्रैक्टर-ट्रॉली, कार, मोटरसाइकिल व पालकी पर सवार साधु-संत भी शामिल दिखे।
विज्ञापन

रामादल ने पहले दिन परिक्रमा के प्रथम पड़ाव कोरौना पहुंचकर डेरा डाला है। अब बृहस्पतिवार की सुबह परिक्रमा अपने दूसरे पड़ाव हरैया के लिए प्रस्थान करेगी। 88 हजार ऋषि-मुनियों की पावन तपोभूमि नैमिषारण्य में बुधवार भोर में हर तरफ धार्मिक उत्सव सरीखा माहौल दिखाई दिया। सुबह भोर 3:30 बजे पहला महंत, परिक्रमा समिति अध्यक्ष नारायण दास अपने शिष्यों के साथ चक्रतीर्थ फिर ललिता देवी चौराहा पहुंचे।
विज्ञापन

पारंपरिक घोड़े पर सवार करिया बाबा ने सुबह चार बजते ही डंका (नगाड़ा) बजाना शुरू कर दिया। डंके की पारंपरिक ध्वनि के वातावरण में गूंजते ही शंखनाद व घंटे घड़ियाल बजने लगते हैं। इसके साथ ही मौजूद साधु-संत व परिक्रमार्थियों का कारवां बोल कड़ाकड़ सीताराम का जयघोष करते हुए धर्मयात्रा पर निकल पड़ता है। इस दौरान कोई परिवार समेत तो कोई मित्रों के साथ परिक्रमा करने पहुंचा है। हाथी-घोड़े, पालकी व रथ पर सवार साधु-संत और महंत परिक्रमा पथ पर अलग ही छटा बिखेरते दिखाई दिए। इस परिक्रमा में मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तरांचल, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों समेत पड़ोसी देश नेपाल व भूटान के श्रद्धालु भी शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रामादल पर हुई पुष्पवर्षा
परिक्रमा का शुभारंभ होते ही रामादल पर पुष्पवर्षा की गई। इससे पूर्व वैदिक मंत्रोचार के मध्य 84 कोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष व पहला आश्रम महंत नारायण दास का पूजन व माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। इसके बाद चक्रतीर्थ पुजारी राज नारायण पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य परंपरागत ढंग से डंका लेकर चलने वाले घोड़े और डंके का पूजन कराया।
जगह-जगह दर्शन कर किया सेवा-सत्कार
परिक्रमा जब किसी गांव से गुजरती तो मार्ग के किनारे दर्शन की लालसा में ग्रामीणों की भीड़ जुट जाती। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी उल्लास से जयकारे लगाकर परिक्रमार्थियों का उत्साह बढ़ाते दिखाई दिए। जगह-जगह क्षेत्रीय लोगों ने पंडाल व स्टॉल लगाकर रामादल में शामिल श्रद्धालुओं को नाश्ता पानी व भोजन भी कराया।


सभी तीर्थों व देवताओं की परिक्रमा हो जाती
यह परिक्रमा पूरी करने से समूचे विश्व के सभी तीर्थों व देवताओं की परिक्रमा हो जाती है। सभी तीर्थों के जल का मिश्रण दधीचि कुंड में है, वहां स्नान का विशेष महत्व है। अंतिम पड़ाव में वहां स्नान का पुण्य मिलता है।

- बद्री, उत्तराखंड


अलौकिक शक्तियों का अनुभव होता
इस परिक्रमा का विशेष महत्व है। अलौकिक शक्तियों का अनुभव होता है। यह 84 कोसी परिक्रमा करने से पुण्य के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- चंचल शर्मा, दिल्ली

भक्ति व शक्ति का होता अद्भुत अहसास
इस परिक्रमा में करीब 24 साल से आ रहा हूं। यहां भक्ति व शक्ति का अद्भुत अहसास होता है। इस बार परिक्रमा में पहले से बेहतर व्यवस्था हुई है।

- महंत गुरुचरण दास, बरेली




हमारे वेदों में परिक्रमा का उल्लेख
परिक्रमा यात्रा शामिल होने के लिए सात साल से लगातार आ रहे हैं। इस परिक्रमा का उल्लेख हमारे वेदों में भी किया गया है। हमारे साथ करीब 30 लोग धनगढी नेपाल से आए हैं।

- भक्तराज जोशी, धनगढ़ी नेपाल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed