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आचार संहिता से करोड़ों की परियोजनाएं अधर में
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गांजरी क्षेत्र में बढ़ता बाढ़ का पानी। (फाइल फोटो)
- फोटो : SITAPUR
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35 करोड़ की फंसी परियोजनाएं
बिसवां व लहरपुर तहसील में पांच कटानरोधक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिसमें दुर्गापुरवा गांव के पास परियोजना शुरू की जानी है। श्रीरामपुरवा व म्योढ़ीछोलहा गांवों के बीच परियोजना शुरू होनी है। रतनगंज व बढ़ईनपुरवा में भी काम शुरू होना है। लीलापुरवा बरछता में परियोजना शुरू की जानी है। इन परियोजनाओं पर करीब 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन योजनाओं की स्वीकृत के बाद जल्द बजट आना था लेकिन अब यह बजट आचार संहिता में फंसकर रह गया है।
बजट है पर टेंडर नहीं
जहांगीराबाद में किवानी नदी पर करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से पुल बनना था। इससे कई गांवों का संपर्क आसानी से हो सकेगा। इस पुल की मंजूरी हो गई है। पहली किश्त भी जारी कर दी गई है। इधर आचार संहिता के कारण अब टेंडर नहीं हो पाएगा। इससे पुल का निर्माण कार्य लटक गया है।
फंस गई पुलिया
रेउसा इलाके में लोधनपुरवा गांव की महत्वपूर्ण पुलिया का निर्माण करीब 80 लाख की लागत से होना है। यह पुलिया कई गांवों का संपर्क मार्ग बनेगी। शासन स्तर से इस पुलिया के निर्माण को मंजूरी मिल गई थी। इससे ग्रामीणों में खुशी थी कि पुलिया बन जाएगी। आचार संहिता के कारण पुलिया फंस गई है। जल्द ही बजट आने की उम्मीद थी।
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सीतापुर। जिले में विकास कार्यों की तमाम परियोजनाएं आदर्श चुनाव आचार संहिता के चक्कर में फंस गई हैं। इन परियोजनाओं पर जल्द काम शुरू होने थे। कई योजनाओं में बजट आना था तो कई में टेंडर प्रक्रिया होनी थी। अब इन पर रोक लग गई है। इसकी वजह से अब ये योजनाएं मार्च के बाद ही शुरू हो पाएंगी। इसकी तस्दीक ऊपर दिए गए केस कर रहे है।
विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। 23 फरवरी को चौथे चरण में जिले में मतदान होना है। आदर्श आचार संहिता लगते ही पूरी प्रशासनिक मशीनरी चुनाव में जुट गई है। आचार संहिता से पहले शासन ने जिले को कई योजनाओं की सौगात दी थी। किसी योजना को मंजूरी मिली थी तो किसी योजना में बजट भेज दिया था। जिन योजनाओं में बजट आ गया था। उनकी टेंडर प्रक्रिया शुरू होनी थी।
स्वीकृत योजनाओं में बजट आना बाकी था। इससे उम्मीद थी कि जनवरी में इन परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। आचार संहिता लगने से अब यह परियोजनाएं नई सरकार के गठन के बाद ही शुरू हो पाएंगी। सबसे अधिक दिक्कत बाढ़ परियोजनाओं में आएगी। इनको मानसून से पहले पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया था। जब देर से बजट आएगा, तो देर से ही काम शुरू हो पाएगा। इससे इन योजनाओं का समय से काम पूरा होना मुश्किल है।
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बिसवां व लहरपुर तहसील में पांच कटानरोधक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिसमें दुर्गापुरवा गांव के पास परियोजना शुरू की जानी है। श्रीरामपुरवा व म्योढ़ीछोलहा गांवों के बीच परियोजना शुरू होनी है। रतनगंज व बढ़ईनपुरवा में भी काम शुरू होना है। लीलापुरवा बरछता में परियोजना शुरू की जानी है। इन परियोजनाओं पर करीब 35 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन योजनाओं की स्वीकृत के बाद जल्द बजट आना था लेकिन अब यह बजट आचार संहिता में फंसकर रह गया है।
बजट है पर टेंडर नहीं
जहांगीराबाद में किवानी नदी पर करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से पुल बनना था। इससे कई गांवों का संपर्क आसानी से हो सकेगा। इस पुल की मंजूरी हो गई है। पहली किश्त भी जारी कर दी गई है। इधर आचार संहिता के कारण अब टेंडर नहीं हो पाएगा। इससे पुल का निर्माण कार्य लटक गया है।
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फंस गई पुलिया
रेउसा इलाके में लोधनपुरवा गांव की महत्वपूर्ण पुलिया का निर्माण करीब 80 लाख की लागत से होना है। यह पुलिया कई गांवों का संपर्क मार्ग बनेगी। शासन स्तर से इस पुलिया के निर्माण को मंजूरी मिल गई थी। इससे ग्रामीणों में खुशी थी कि पुलिया बन जाएगी। आचार संहिता के कारण पुलिया फंस गई है। जल्द ही बजट आने की उम्मीद थी।
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सीतापुर। जिले में विकास कार्यों की तमाम परियोजनाएं आदर्श चुनाव आचार संहिता के चक्कर में फंस गई हैं। इन परियोजनाओं पर जल्द काम शुरू होने थे। कई योजनाओं में बजट आना था तो कई में टेंडर प्रक्रिया होनी थी। अब इन पर रोक लग गई है। इसकी वजह से अब ये योजनाएं मार्च के बाद ही शुरू हो पाएंगी। इसकी तस्दीक ऊपर दिए गए केस कर रहे है।
विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। 23 फरवरी को चौथे चरण में जिले में मतदान होना है। आदर्श आचार संहिता लगते ही पूरी प्रशासनिक मशीनरी चुनाव में जुट गई है। आचार संहिता से पहले शासन ने जिले को कई योजनाओं की सौगात दी थी। किसी योजना को मंजूरी मिली थी तो किसी योजना में बजट भेज दिया था। जिन योजनाओं में बजट आ गया था। उनकी टेंडर प्रक्रिया शुरू होनी थी।
स्वीकृत योजनाओं में बजट आना बाकी था। इससे उम्मीद थी कि जनवरी में इन परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा। आचार संहिता लगने से अब यह परियोजनाएं नई सरकार के गठन के बाद ही शुरू हो पाएंगी। सबसे अधिक दिक्कत बाढ़ परियोजनाओं में आएगी। इनको मानसून से पहले पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया था। जब देर से बजट आएगा, तो देर से ही काम शुरू हो पाएगा। इससे इन योजनाओं का समय से काम पूरा होना मुश्किल है।