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ओमिक्रॉन से निपटने की तैयारियां हवा-हवाई
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रोडवेज बस स्टैंड पर बस में बिना मास्क व बिना शारीरिक दूरी के चढ़ते यात्री। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। ओमिक्रॉन को लेकर जिले में भले ही अलर्ट कर दिया गया हो, लेकिन कोविड से निपटने की तैयारी हवा-हवाई है। जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगने के 15 दिन बाद ही खराब हो गया था, जो आज भी बंद है। ट्रामा सेंटर आठ साल से बंद पड़ा है। रेलवे व रोडवेज बस स्टॉप पर कोविड हेल्प डेस्क बनी है, लेकिन मरीजों की थर्मल स्कैनिंग नहीं की जा रही है। इससे जिले में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। सार्वजनिक स्थानों पर लोग बेझिझक कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
सिर्फ शोपीस बनकर रह गया ट्रामा सेंटर
जिले में ट्रामा सेंटर भवन सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। इस सेंटर में न तो कोई मशीन है और न ही चिकित्सकों व अन्य स्टॉफ की तैनाती हो सकी है। सपा सरकार में करीब आठ बरस पहले खैराबाद के जमैय्यतपुर में करीब दो करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर का भवन बनवाया गया था। यह दो बरस में बनकर तैयार हो गया था। भवन बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जिले में अब बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा।
खासकर एक्सीडेंटल व दिल के मरीजों को उपचार मिलेगा। लेकिन सपा सरकार के सत्ता से जाते ही इसकी उम्मीद धूमिल हो गई थी। भाजपा सरकार आने पर एक बार फिर से लोगों को उम्मीद जगी कि यह सेंटर चालू हो जाएगा। इसके लिए कई बार जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चलवाने की मांग की। जिला प्रशासन द्वारा भी इसके लिए कई बार प्रयास भी किए गए।
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लेकिन ये प्रयास व्यर्थ रहे। अब कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन को लेकर जिले में अलर्ट कर दिया गया है स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा करने के निर्देश दिए गए है, तो ऐसे में विभाग की तैयारियों सिर्फ कागजों पर ही सीमित दिख रही है। अगर इस सेंटर को चालू कर दिया जाए तो काफी हद तक मरीजों को इलाज में सहूलियत मिलेगी। जिला अस्पताल से रोजाना पांच से आठ गंभीर मरीज लखनऊ रेफर किए जाते है। अगर यह सेंटर शुरू हो जाए तो इन मरीजों को जिले में ही इलाज मिल सकेगा।
तीन जिलों के लोगों के लिए थी आस
ट्रामा सेंटर बनाने के पीछे उद्देश्य था कि सीतापुर जिलेवासियों को करीब 90 किलोमीटर दूर चलकर लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। जिलेवासियों को इलाज मिलेगा। आस पड़ोस के जिले लखीमपुर, शाहजहांपुर व हरदोई जनपद के निवासी भी ट्रामा सेंटर का लाभ उठा सकेंगे। अभी तक यह लोग लंबी दूरी तय करके लखनऊ जाते है। अगर यह सेंटर चालू हो जाए तो लखनऊ के ट्रामा सेंटर से भार भी कम हो जाएगा।
दो माह से खराब पड़ा ऑक्सीजन प्लांट
जिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से ऑक्सीजन प्लांट लगवाया गया था। यह प्लांट लगने के करीब 15 दिन ही चल सका। उसके बाद यह अचानक खराब हो गया। करीब 20 लाख की लागत से जिला अस्पताल में पाइप लाइन बिछाई गई थी। अब जब यह खराब है तो ऑक्सीजन सिलेंडर व कंसंट्रेटर के माध्यम से मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है। ऐसे में अगर मरीजों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जाए तो मरीजों के सामने ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो सकता है। सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि इंजीनियर आया था। वह इस प्लांट को अभी तक बना नहीं सका है।
विदेश से आए दो लोगों की रिपोर्ट निगेटिव
कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विदेश से दो लोगों के आने की सूचना जुटाई है। सीएमओ ने बताया कि तंजानिया से दो लोग जनपद में आए हैं। इनको चिह्नित करके होम आइसोलेट कर दिया गया है। इनकी मॉनीटरिंग हो रही है। कोविड टेस्ट भी कराया गया है। रिपोर्ट निगेटिव आई है। इन लोगों को कोई दिक्कत नहीं है। फिर भी विभाग नियमित इनका हालचाल ले रहा है।
तंजानिया से दो लोग जनपद में आए हैं। वे पूरी तरह ठीक हैं। ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी सेवाएं बहाल करने के लिए अभी चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पाई है।
- डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ
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सिर्फ शोपीस बनकर रह गया ट्रामा सेंटर
जिले में ट्रामा सेंटर भवन सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। इस सेंटर में न तो कोई मशीन है और न ही चिकित्सकों व अन्य स्टॉफ की तैनाती हो सकी है। सपा सरकार में करीब आठ बरस पहले खैराबाद के जमैय्यतपुर में करीब दो करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर का भवन बनवाया गया था। यह दो बरस में बनकर तैयार हो गया था। भवन बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जिले में अब बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा।
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खासकर एक्सीडेंटल व दिल के मरीजों को उपचार मिलेगा। लेकिन सपा सरकार के सत्ता से जाते ही इसकी उम्मीद धूमिल हो गई थी। भाजपा सरकार आने पर एक बार फिर से लोगों को उम्मीद जगी कि यह सेंटर चालू हो जाएगा। इसके लिए कई बार जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चलवाने की मांग की। जिला प्रशासन द्वारा भी इसके लिए कई बार प्रयास भी किए गए।
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लेकिन ये प्रयास व्यर्थ रहे। अब कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन को लेकर जिले में अलर्ट कर दिया गया है स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा करने के निर्देश दिए गए है, तो ऐसे में विभाग की तैयारियों सिर्फ कागजों पर ही सीमित दिख रही है। अगर इस सेंटर को चालू कर दिया जाए तो काफी हद तक मरीजों को इलाज में सहूलियत मिलेगी। जिला अस्पताल से रोजाना पांच से आठ गंभीर मरीज लखनऊ रेफर किए जाते है। अगर यह सेंटर शुरू हो जाए तो इन मरीजों को जिले में ही इलाज मिल सकेगा।
तीन जिलों के लोगों के लिए थी आस
ट्रामा सेंटर बनाने के पीछे उद्देश्य था कि सीतापुर जिलेवासियों को करीब 90 किलोमीटर दूर चलकर लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। जिलेवासियों को इलाज मिलेगा। आस पड़ोस के जिले लखीमपुर, शाहजहांपुर व हरदोई जनपद के निवासी भी ट्रामा सेंटर का लाभ उठा सकेंगे। अभी तक यह लोग लंबी दूरी तय करके लखनऊ जाते है। अगर यह सेंटर चालू हो जाए तो लखनऊ के ट्रामा सेंटर से भार भी कम हो जाएगा।
दो माह से खराब पड़ा ऑक्सीजन प्लांट
जिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से ऑक्सीजन प्लांट लगवाया गया था। यह प्लांट लगने के करीब 15 दिन ही चल सका। उसके बाद यह अचानक खराब हो गया। करीब 20 लाख की लागत से जिला अस्पताल में पाइप लाइन बिछाई गई थी। अब जब यह खराब है तो ऑक्सीजन सिलेंडर व कंसंट्रेटर के माध्यम से मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है। ऐसे में अगर मरीजों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जाए तो मरीजों के सामने ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो सकता है। सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि इंजीनियर आया था। वह इस प्लांट को अभी तक बना नहीं सका है।
विदेश से आए दो लोगों की रिपोर्ट निगेटिव
कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विदेश से दो लोगों के आने की सूचना जुटाई है। सीएमओ ने बताया कि तंजानिया से दो लोग जनपद में आए हैं। इनको चिह्नित करके होम आइसोलेट कर दिया गया है। इनकी मॉनीटरिंग हो रही है। कोविड टेस्ट भी कराया गया है। रिपोर्ट निगेटिव आई है। इन लोगों को कोई दिक्कत नहीं है। फिर भी विभाग नियमित इनका हालचाल ले रहा है।
तंजानिया से दो लोग जनपद में आए हैं। वे पूरी तरह ठीक हैं। ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी सेवाएं बहाल करने के लिए अभी चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पाई है।
- डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ