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Sitapur News: सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करते यात्री
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सीतापुर। कस्बे में बस स्टॉप और यात्री प्रतीक्षालय नहीं है। कोहरे व शीतलहर के बीच बसों के इंतजार में सड़क पर खड़े रहना यात्रियों की मजबूरी है। कोई निर्धारित स्टॉप नहीं होने से अधिकतर बस चालक सड़क पर खड़े यात्रियों को अनदेखा कर फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं। सड़क पर खड़े होने से यात्रियों को परेशानी तो उठानी ही पड़ती है ।
सीतापुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के किनारे कमलापुर कस्बा बसा है। यहां ब्लॉक मुख्यालय, थाना, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बीआसी, कई बैंक शाखाएं, गन्ना समिति, संस्कृत महाविद्यालय, इंटर कॉलेज समेत कई सरकारी व गैर सरकारी संस्थान हैं। सैकड़ों लोगों का रोजाना कस्बे में आवागमन होता है।
जिला व तहसील मुख्यालय के अलावा लखनऊ, बरेली, इलाहाबाद, बनारस, दिल्ली, मुरादाबाद, शाहजहांपुर मेरठ, कानपुर इत्यादि गंतव्यों पर जाने के लिए क्षेत्र के लोग कस्बे से ही बस पकड़ते हैं। ऐसे में यहां रोडवेज बस स्टॉप व यात्री प्रतीक्षालय के अभाव में लोगों को सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है।
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कोई निर्धारित स्टॉप चिन्हित नहीं होने से यह भी निश्चित नहीं रहता कि परिवहन निगम की बसें रुकेंगी भी या नहीं। अक्सर यात्री बस रुकवाने का प्रयास ही करते रह जाते हैं और चालक उन्हें अनदेखा कर फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं।
एक निजी कंपनी में जॉब करने वाले कस्बा निवासी अमित मिश्रा ने बताया कि सीतापुर ऑफिस के लिए रोजाना अप-डाउन करते हैं। बसों के ठहराव का कोई निश्चित स्थान नहीं है। यात्री प्रतीक्षालय भी नहीं है। ऐसे में सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है।
अंशू ने बताया कि कारोबार के सिलसिले में अक्सर सीतापुर व लखनऊ जाना पड़ता है। बस चालक मनमानी करते हैं। बसें नहीं रोकते, काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। राजेश ने कहा कि बस अड्डा बन जाए तो बसों का ठहराव निश्चित हो जाएगा। यात्रियों को भी सुविधा होगी।
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सीतापुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के किनारे कमलापुर कस्बा बसा है। यहां ब्लॉक मुख्यालय, थाना, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बीआसी, कई बैंक शाखाएं, गन्ना समिति, संस्कृत महाविद्यालय, इंटर कॉलेज समेत कई सरकारी व गैर सरकारी संस्थान हैं। सैकड़ों लोगों का रोजाना कस्बे में आवागमन होता है।
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जिला व तहसील मुख्यालय के अलावा लखनऊ, बरेली, इलाहाबाद, बनारस, दिल्ली, मुरादाबाद, शाहजहांपुर मेरठ, कानपुर इत्यादि गंतव्यों पर जाने के लिए क्षेत्र के लोग कस्बे से ही बस पकड़ते हैं। ऐसे में यहां रोडवेज बस स्टॉप व यात्री प्रतीक्षालय के अभाव में लोगों को सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है।
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कोई निर्धारित स्टॉप चिन्हित नहीं होने से यह भी निश्चित नहीं रहता कि परिवहन निगम की बसें रुकेंगी भी या नहीं। अक्सर यात्री बस रुकवाने का प्रयास ही करते रह जाते हैं और चालक उन्हें अनदेखा कर फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं।
एक निजी कंपनी में जॉब करने वाले कस्बा निवासी अमित मिश्रा ने बताया कि सीतापुर ऑफिस के लिए रोजाना अप-डाउन करते हैं। बसों के ठहराव का कोई निश्चित स्थान नहीं है। यात्री प्रतीक्षालय भी नहीं है। ऐसे में सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है।
अंशू ने बताया कि कारोबार के सिलसिले में अक्सर सीतापुर व लखनऊ जाना पड़ता है। बस चालक मनमानी करते हैं। बसें नहीं रोकते, काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। राजेश ने कहा कि बस अड्डा बन जाए तो बसों का ठहराव निश्चित हो जाएगा। यात्रियों को भी सुविधा होगी।