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बड़ागांव में अभी भी दहशत का माहौल
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Sun, 28 Jun 2015 12:02 AM IST
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बड़ागांव में चौराहे की कई दुकानें खुलीं लेकिन
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पहले से जैसी रौनक नहीं थी। पूरे इलाके में अजीब सी खामोशी छाई रही। चौराहे की दुकानों पर लगने वाली भीड़ भी नदारद थी। शनिवार को भी गांव में पुलिस पहरा देती रही। पुलिस दिनभर आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी करती रही।
इस मामले में शुक्रवार को पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। महोली के बड़ागांव के मौजूदा प्रधान हरिवंश सिंह उर्फ भूरे सिंह व प्रधान पद के दावेदार जितेंद्र मिश्र के बीच आगामी चुनाव को लेकर रंजिश चल रही थी। गुरुवार को कोटे पर केरोसिन लेने को लेकर प्रधान पक्ष के बंटी व प्रधान पद दावेदार पक्ष के छोटू के बीच मारपीट हो गई।
किसी तरह मामला शांत हुआ लेकिन शाम को दोनों पक्षों के लोग बड़ागांव पुलिस चौकी के निकट फिर उलझ गए। करीब 50 राउंड गोलियां चलीं, जिसमें प्रधान पद के दावेदार जितेंद्र मिश्रा (33) पुत्र रमेश, उसके परिवार के ही लालजी मिश्रा (48) पुत्र गंगाराम व सुंदरलाल (40) पुत्र रामलोटन की गोली लगने से मौत हो गई थी।
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वहीं सनोज (35) पुत्र रामभरोसे, रामानुज (55) पुत्र रामभरोसे, ऋषभ (25) पुत्र अनिल व रामलोटन पुत्र सालिगराम समेत पांच लोग जख्मी हो गए थे। वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। शुक्रवार को डीआईजी रेंज आरके चतुर्वेदी ने भी घटनास्थल का जायजा लेने के साथ वारदात के समय चौकी से भागे पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
उधर, घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। गांव में आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है। हत्या आरोपियों के घर पर ताला लगा हुआ है। जबकि पीड़ित पक्ष के यहां रिश्तेदारों व करीबियों का आना जाना लगा है। सभी लोग घटना से दुखी हैं।
शनिवार को बाजार में दुकानें खुलीं लेकिन पहले जैसी रौनक नहीं दिखी। गांव में पुलिस-पीएसी तैनात होने से लोग थोड़ी राहत जरूर महसूस कर रहे हैं। घटना की बाबत इंस्पेक्टर रंगबहादुर सिंह का कहना है कि अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गईं हैं।
बड़ागांव में हुए खूनी संघर्ष का मंजर आंखों से देखने वालों की घटना याद कर आज भी रूह कांप उठती है। एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए तो ललकार-ललकार कर गोलियां चलाई जा रहीं थीं। एक हमलावर अपने साथियों से यह रहा था कि गोली सीधे मारों, जो सामने आए उसे न छोड़ो।
इस मामले में शुक्रवार को पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। महोली के बड़ागांव के मौजूदा प्रधान हरिवंश सिंह उर्फ भूरे सिंह व प्रधान पद के दावेदार जितेंद्र मिश्र के बीच आगामी चुनाव को लेकर रंजिश चल रही थी। गुरुवार को कोटे पर केरोसिन लेने को लेकर प्रधान पक्ष के बंटी व प्रधान पद दावेदार पक्ष के छोटू के बीच मारपीट हो गई।
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किसी तरह मामला शांत हुआ लेकिन शाम को दोनों पक्षों के लोग बड़ागांव पुलिस चौकी के निकट फिर उलझ गए। करीब 50 राउंड गोलियां चलीं, जिसमें प्रधान पद के दावेदार जितेंद्र मिश्रा (33) पुत्र रमेश, उसके परिवार के ही लालजी मिश्रा (48) पुत्र गंगाराम व सुंदरलाल (40) पुत्र रामलोटन की गोली लगने से मौत हो गई थी।
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वहीं सनोज (35) पुत्र रामभरोसे, रामानुज (55) पुत्र रामभरोसे, ऋषभ (25) पुत्र अनिल व रामलोटन पुत्र सालिगराम समेत पांच लोग जख्मी हो गए थे। वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। शुक्रवार को डीआईजी रेंज आरके चतुर्वेदी ने भी घटनास्थल का जायजा लेने के साथ वारदात के समय चौकी से भागे पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
उधर, घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। गांव में आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है। हत्या आरोपियों के घर पर ताला लगा हुआ है। जबकि पीड़ित पक्ष के यहां रिश्तेदारों व करीबियों का आना जाना लगा है। सभी लोग घटना से दुखी हैं।
शनिवार को बाजार में दुकानें खुलीं लेकिन पहले जैसी रौनक नहीं दिखी। गांव में पुलिस-पीएसी तैनात होने से लोग थोड़ी राहत जरूर महसूस कर रहे हैं। घटना की बाबत इंस्पेक्टर रंगबहादुर सिंह का कहना है कि अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गईं हैं।
बड़ागांव में हुए खूनी संघर्ष का मंजर आंखों से देखने वालों की घटना याद कर आज भी रूह कांप उठती है। एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए तो ललकार-ललकार कर गोलियां चलाई जा रहीं थीं। एक हमलावर अपने साथियों से यह रहा था कि गोली सीधे मारों, जो सामने आए उसे न छोड़ो।