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पंचायत चुनाव : भ्रष्टाचार को हथियार बना प्रतिद्वंद्वी को चित करने की तैयारी
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सीतापुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल भले ही अभी नहीं बजा है, लेकिन जिले में चुनावी हलचल के बीच शिकायतों की गूंज से गंवई सियासत की तासीर जरूर गरमा गई है। चुनावी मैदान फतह करने की हसरत लिए दावेदार पांच सालों में हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे को अब हथियार बनाकर पूर्व प्रधानों की घेराबंदी में जुट गए हैं। ऐसे में शिकायतों की रफ्तार ने तेजी पकड़ ली है। एकाएक भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर बढ़ी शिकायतें इस बात की पुष्टि करती हैं कि चुनाव लड़ने की हसरत लिए लोग इस मुद्दे को हथियार बनाकर प्रतिद्वंद्वी को चित करने की जुगत में लग गए हैं।
2015 में हुए पंचायत चुनाव के बाद प्रधानों ने गांवों की सरकार पर राज किया। इस दरम्यान गांव में हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के मामले किसी से छिपे नहीं है। प्रधानमंत्री आवास से लेकर शौचालयों के निर्माण हुई धांधली और लाभार्थियों के नाम पर पैसे हड़पने के किस्से जिले में अनगिनत हैं। प्रधानों पर लंबे समय से ऐसे आरोप लगते आ रहे हैं। कई मामलों में कार्रवाई भी हुई। इमलिया सुल्तानपुर, रामकोट समेत जिले के कई थानों में प्रधानों के खिलाफ दर्ज हुए मामले इसकी तस्दीक करते हैं। इन मामलों पर नजर दौड़ाएं तो शुरुआती दौर में एक-दो मामले ही सामने आते थे।
न तो गांव के लोग प्रधानों के खिलाफ आवाज न उठाते थे और न ही खुद को जिम्मेदार नागरिक कहने वाले लोग, लेकिन सूत्रों की माने तो जब से प्रधानों का कार्यकाल खत्म हुआ है, उसके बाद से उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की शिकायतों की भरमार सी हो गई है। ब्लॉक, तहसीलों से लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी के दफ्तरों तक शिकायतों का अंबार लगने लगा है।
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बेहटा ब्लॉक की ग्राम सभा भदफर में अपात्रों को आवास देने के मामले की शिकायत डीएम से की गई थी। मामले की जांच काफी समय से चल रही है, लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है। पूर्व प्रधान पर अपात्रों को आवास देने का आरोप लगा है।
बेहटा ब्लॉक की पिडुरिया में पीएम आवास में धांधली कर अपात्रों को योजना का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत आयुक्त ग्राम विकास से की गई है। इसकी शिकायत खुद हरगांव विधायक सुरेश राही ने की है।
हरगांव ब्लॉक के गुरधपा निवासी अवधराम ने मनरेगा से क्रेन से खुदाई कराकर फर्जी भुगतान और शौचालय में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। इसमें आरोप है कि मृतकों के नाम पर शौचालय का पैसा निकाला गया है।
सकरन इलाके के कम्हरिया, महरिया गांव के निवासी पूर्व प्रधान परशुराम ने आरोप लगाया था कि दो लोगों ने असलहे के बल पर उनसे 17 हजार रुपये लूट लिए हैं। उसने एक व्यक्ति को नामजद किया था। सकरन पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि पूर्व प्रधान ने जिस व्यक्ति के खिलाफ नामजद तहरीर दी है, उसने आरटीआई के तहत विकास कार्यों का लेखा-जोखा मांगा है।
ये हैं सबसे अधिक शिकायतें
सूत्रों की माने तो वित्तीय अनियमितता की शिकायतों में सबसे अधिक मामले मनरेगा, शौचालय, आवास और मानक अनुसार कार्य नहीं कराए जाने के हैं। शिकायत लेकर आने वालों में अधिकांश दावेदार ही शामिल हैं। किसी को शौचालय के पात्रों को लेकर विरोध है तो किसी को आवास आवंटन में धांधली की शिकायत है। मनरेगा में बिना काम के भुगतान की शिकायतों तो आम हैं।
गांवों में बढ़ रही रंजिश, पुलिस अलर्ट
चुनावी हलचल के बीच शिकायतों का सिलसिला बढ़ने से गांव में रंजिश भी बढ़ रही है। ऐसे में एसपी आरपी सिंह भी इसे लेकर बेेहद गंभीर हो गए हैं। वह लगातार अपने मातहतों को चुनाव को सकुशल निपटाने के टिप्स क्राइम मीटिंगों में देते हैं, लेकिन चुनाव को देखते हुए सक्रियता और बढ़ा दी गई है। कोतवाल और थानेेदारों ने पूर्व प्रधानों, दावेदारों समेत गांव के माहौल, गतिविधियों पर नजर गड़ा दी हैं। पुलिस ने चुनाव को लेकर इस दिशा में अपनी कार्रवाई भी बढ़ा दी है।
कई मामलों में चल रही जांच
चुनाव का समय आने पर ऐसी शिकायतें अमूमन बढ़ ही जाती हैं। सही होने पर कार्रवाई होती है। कई मामलों की जांच चल रही है। कई में प्रधानों पर कार्रवाई और रिकवरी के आदेश भी दिए गए हैं। मोबाइल पर कॉल और व्हाट्सएप से भी गांव के लोग प्रधानों की शिकायत करते हैं। किसी दिन 10 से 15 मामले तक आ जाते हैं तो किसी दिन एक भी शिकायत नहीं आती है। इधर, कुछ समय से शिकायतें बढ़ गई है। पहले इतनी नहीं आती थीं। अभी ये सिलसिला जारी रहेगा।
- मनोज कुमार, डीपीआरओ
पंचायत चुनाव को देखते थानेदारों को अलर्ट किया गया है। गांव के माहौल पर पुलिस नजर रख रही है। गड़बड़ी करने वालों से अंदेशा होने पर शांतिभंग में पाबंद की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- आरपी सिंह, एसपी
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2015 में हुए पंचायत चुनाव के बाद प्रधानों ने गांवों की सरकार पर राज किया। इस दरम्यान गांव में हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के मामले किसी से छिपे नहीं है। प्रधानमंत्री आवास से लेकर शौचालयों के निर्माण हुई धांधली और लाभार्थियों के नाम पर पैसे हड़पने के किस्से जिले में अनगिनत हैं। प्रधानों पर लंबे समय से ऐसे आरोप लगते आ रहे हैं। कई मामलों में कार्रवाई भी हुई। इमलिया सुल्तानपुर, रामकोट समेत जिले के कई थानों में प्रधानों के खिलाफ दर्ज हुए मामले इसकी तस्दीक करते हैं। इन मामलों पर नजर दौड़ाएं तो शुरुआती दौर में एक-दो मामले ही सामने आते थे।
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न तो गांव के लोग प्रधानों के खिलाफ आवाज न उठाते थे और न ही खुद को जिम्मेदार नागरिक कहने वाले लोग, लेकिन सूत्रों की माने तो जब से प्रधानों का कार्यकाल खत्म हुआ है, उसके बाद से उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की शिकायतों की भरमार सी हो गई है। ब्लॉक, तहसीलों से लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी के दफ्तरों तक शिकायतों का अंबार लगने लगा है।
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बेहटा ब्लॉक की ग्राम सभा भदफर में अपात्रों को आवास देने के मामले की शिकायत डीएम से की गई थी। मामले की जांच काफी समय से चल रही है, लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है। पूर्व प्रधान पर अपात्रों को आवास देने का आरोप लगा है।
बेहटा ब्लॉक की पिडुरिया में पीएम आवास में धांधली कर अपात्रों को योजना का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत आयुक्त ग्राम विकास से की गई है। इसकी शिकायत खुद हरगांव विधायक सुरेश राही ने की है।
हरगांव ब्लॉक के गुरधपा निवासी अवधराम ने मनरेगा से क्रेन से खुदाई कराकर फर्जी भुगतान और शौचालय में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। इसमें आरोप है कि मृतकों के नाम पर शौचालय का पैसा निकाला गया है।
सकरन इलाके के कम्हरिया, महरिया गांव के निवासी पूर्व प्रधान परशुराम ने आरोप लगाया था कि दो लोगों ने असलहे के बल पर उनसे 17 हजार रुपये लूट लिए हैं। उसने एक व्यक्ति को नामजद किया था। सकरन पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि पूर्व प्रधान ने जिस व्यक्ति के खिलाफ नामजद तहरीर दी है, उसने आरटीआई के तहत विकास कार्यों का लेखा-जोखा मांगा है।
ये हैं सबसे अधिक शिकायतें
सूत्रों की माने तो वित्तीय अनियमितता की शिकायतों में सबसे अधिक मामले मनरेगा, शौचालय, आवास और मानक अनुसार कार्य नहीं कराए जाने के हैं। शिकायत लेकर आने वालों में अधिकांश दावेदार ही शामिल हैं। किसी को शौचालय के पात्रों को लेकर विरोध है तो किसी को आवास आवंटन में धांधली की शिकायत है। मनरेगा में बिना काम के भुगतान की शिकायतों तो आम हैं।
गांवों में बढ़ रही रंजिश, पुलिस अलर्ट
चुनावी हलचल के बीच शिकायतों का सिलसिला बढ़ने से गांव में रंजिश भी बढ़ रही है। ऐसे में एसपी आरपी सिंह भी इसे लेकर बेेहद गंभीर हो गए हैं। वह लगातार अपने मातहतों को चुनाव को सकुशल निपटाने के टिप्स क्राइम मीटिंगों में देते हैं, लेकिन चुनाव को देखते हुए सक्रियता और बढ़ा दी गई है। कोतवाल और थानेेदारों ने पूर्व प्रधानों, दावेदारों समेत गांव के माहौल, गतिविधियों पर नजर गड़ा दी हैं। पुलिस ने चुनाव को लेकर इस दिशा में अपनी कार्रवाई भी बढ़ा दी है।
कई मामलों में चल रही जांच
चुनाव का समय आने पर ऐसी शिकायतें अमूमन बढ़ ही जाती हैं। सही होने पर कार्रवाई होती है। कई मामलों की जांच चल रही है। कई में प्रधानों पर कार्रवाई और रिकवरी के आदेश भी दिए गए हैं। मोबाइल पर कॉल और व्हाट्सएप से भी गांव के लोग प्रधानों की शिकायत करते हैं। किसी दिन 10 से 15 मामले तक आ जाते हैं तो किसी दिन एक भी शिकायत नहीं आती है। इधर, कुछ समय से शिकायतें बढ़ गई है। पहले इतनी नहीं आती थीं। अभी ये सिलसिला जारी रहेगा।
- मनोज कुमार, डीपीआरओ
पंचायत चुनाव को देखते थानेदारों को अलर्ट किया गया है। गांव के माहौल पर पुलिस नजर रख रही है। गड़बड़ी करने वालों से अंदेशा होने पर शांतिभंग में पाबंद की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- आरपी सिंह, एसपी