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स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान देने के लिए अफसर न आएं घर
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महमूदाबाद (सीतापुर)। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद एरियर व पेंशन न जारी न होने से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पत्नी आहत हैं। उन्होंने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाले सम्मान को नहीं लेने का फैसला किया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पत्नी ने पीएम, सीएम समेत अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर जानकारी दी है। कहा कि इस बार अधिकारी उन्हें सम्मान देने घर न आएं।
महमूदाबाद क्षेत्र के मीरा नगर ऐसा इकलौता गांव है, जहां सबसे ज्यादा लोग सेना में भर्ती होकर देश की सुरक्षा में लगे हुए हैं। इसी गांव की निवासिनी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामनाथ सिंह की पत्नी कलावती ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत जिले के आला अफसरों को पत्र भेजकर बताया कि वर्ष 1932 से 1942 तक लगातार गांव में हर रोज आजादी का झंडा उठता था।
अंग्रेज लगातार जुल्म करते थे, लेकिन लोग नहीं डरे और आजादी का झंडा उठना बंद नहीं किया। इसी वजह से सबसे ज्यादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इसी गांव से हुए हैं। उन्होंने बताया है कि उनके पति के स्वर्गवास के बाद स्वतंत्रता संग्राम पारिवारिक पेंशन की आधी धनराशि भारत सरकार और राज्य सरकार की ओर से दी जा रही थी।
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इस बीच 21 जनवरी 2021 को उच्च न्यायालय ने पूरी पेंशन देने का आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट से हुए आदेश को मानते हुए कोषाधिकारी सीतापुर ने राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन तो जारी कर दी, लेकिन एरियर का भुगतान नहीं किया। इसके लिए वह कई बार बैंक व कोषाधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हैं। इस वजह से 15 अगस्त व 26 जनवरी को मिलने वाले सम्मान को इस वर्ष 15 अगस्त पर नहीं लूंगी।
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महमूदाबाद क्षेत्र के मीरा नगर ऐसा इकलौता गांव है, जहां सबसे ज्यादा लोग सेना में भर्ती होकर देश की सुरक्षा में लगे हुए हैं। इसी गांव की निवासिनी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामनाथ सिंह की पत्नी कलावती ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत जिले के आला अफसरों को पत्र भेजकर बताया कि वर्ष 1932 से 1942 तक लगातार गांव में हर रोज आजादी का झंडा उठता था।
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अंग्रेज लगातार जुल्म करते थे, लेकिन लोग नहीं डरे और आजादी का झंडा उठना बंद नहीं किया। इसी वजह से सबसे ज्यादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इसी गांव से हुए हैं। उन्होंने बताया है कि उनके पति के स्वर्गवास के बाद स्वतंत्रता संग्राम पारिवारिक पेंशन की आधी धनराशि भारत सरकार और राज्य सरकार की ओर से दी जा रही थी।
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इस बीच 21 जनवरी 2021 को उच्च न्यायालय ने पूरी पेंशन देने का आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट से हुए आदेश को मानते हुए कोषाधिकारी सीतापुर ने राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन तो जारी कर दी, लेकिन एरियर का भुगतान नहीं किया। इसके लिए वह कई बार बैंक व कोषाधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हैं। इस वजह से 15 अगस्त व 26 जनवरी को मिलने वाले सम्मान को इस वर्ष 15 अगस्त पर नहीं लूंगी।