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नैमिषारण्य पहुंच भक्ति में डूबे परिक्रमार्थी
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नैमिषारण्य में चक्रतीर्थ में स्नान करते श्रद्धालु। (संवाद)
- फोटो : SITAPUR
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। अखंड राम नाम जयकारे के साथ 84 कोसी परिक्रमा का रामादल सोमवार की भोर नैमिषारण्य पहुंच गया। अपने 9वें पड़ाव पर साधु संतों ने नैमिषारण्य के विभिन्न मठ मंदिरों के दर्शन किए। मां ललिता देवी में प्रसाद चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगी। मां गोमती व चक्रतीर्थ में डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना की। इस पड़ाव पर परिक्रमार्थी रात भर रुककर भजन कीर्तन करेंगे। मंगलवार सुबह अगले पड़ाव कोल्हुआ बरेठी को प्रस्थान करेंगे।
सोमवार भोर सुबह चार बजे से ही नैमिषारण्य तीर्थ में रामादल के परिक्रमार्थियों का आगमन शुरू हो गया था। इस परिक्रमा पथ पर कई परिक्रमार्थी कीर्तन सुमिरन करते हुए पैदल यात्रा कर रहे थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु साइकिल, मोटर साइकिल पर बैठकर यात्रा के आनंद में खोए से दिखेे। ट्रैक्टर और बैलगाड़ी से भी श्रद्धालु नैमिषारण्य तीर्थ में पहुंचकर जल्द ही स्नान और पूजन का क्रम शुरू करने को उत्सुक दिख रहे थे।
नैमिष तीर्थ में परिक्रमार्थियों ने खुले मैदान, धर्मशालाओं, बाग बगीचों, तीर्थ पुरोहितों व संत महात्माओं के आश्रमों में डेरा डाला। परिक्रमार्थियों ने पूरे दिन राम नाम का जयकारा लगाते हुए ऋषियों की भूमि में तीर्थ की पवित्र नदी गोमती और चक्रतीर्थ में स्नान पूजन करके दान किया। उसके बाद नैमिष तीर्थ स्थित मां ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, नैमिष नाथ, हनुमान गढ़ी, देवदेवेश्वर, देवपुरी, बाला जी, सत्यनारायण सन्निधि मंदिर, कालीपीठ आदि धार्मिक स्थलों का दर्शन पूजन किया।
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इस दौरान पूरे नैमिष में परिक्रमार्थियों के छोटे-छोटे टेंट झोपड़ी का नजारा काफी आकर्षक लग रहा था। नैमिष में रामादल यात्रा के दौरान जहां कई जगह परिक्रमार्थियों द्वारा चूल्हे पर भोजन बनाने का दौर जारी था। वहीं तीर्थ में ही कई आश्रमों मंदिरों में भी भंडारे का भी अनवरत दौर जारी रहा। पहला आश्रम महंत भरतदास के तत्वावधान में दिन भर भंडारा चलता रहा।
नीलकंठ आश्रम, परिक्रमा मार्ग स्थित कई आश्रमों सहित नैमिष में अनेक स्थानों पर प्रसाद वितरण हुआ। नैमिष तीर्थ में चक्रतीर्थ प्रांगण, रामानुजकोट मंदिर, बाला जी मंदिर समेत कई मंदिर मठों में विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठानों का भी दौर चलता रहा।
भक्ति का एक अनोखा रूप हठयोग
ईश्वर की भक्ति के अनेक रंग इस परिक्रमा में देखने को मिलते हैं। धर्म के उन्हीं अनूठे रंगों में से एक हठयोग है। इस साधना में भक्त बड़े ही कठिन प्रयासों से अपने आराध्य को प्रसन्न करते हैं। इस दौरान वे प्रयास करते है कि इस दौरान न वे किसी को देखे और न कोई उन्हें देखे।
आज कोल्हुआ बरेठी को पहुंचेंगे श्रद्धालु
रामादल यात्रा के नवें पड़ाव नैमिषारण्य तीर्थ से मंगलवार को 10वें पड़ाव कोल्हुआ बरेठी को पहुंचेंगे। इस यात्रा के दौरान परिक्रमार्थी व्यास गद्दी, मनु सतरूपा, तपस्थान, ब्रम्हावर्त, दशाश्वमेघ घाट, हनुमान गढ़ी, पंच पांडव, यज्ञवाराह कूप, गंगोत्री, लक्ष्मीनारायण, नरसिंह, कुरुक्षेत्र, हंस हंसिनी, पुष्कर तीर्थ, कालीदाह, गोवर्धन, गोकुल, मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, देवदेवेश्वर, सेतुबंध रामगंगा, विष्णु पर्वत, रुद्रावर्त, गुप्त काशी, रुद्र प्रयाग, देवप्रयाग, लोधेश्वर, त्रियुगी नारायण, केदारनाथ, बद्रीनाथ, तुंगनाथ, बृहस्पति तीर्थ प्रयाग, हनुमान तीर्थ व चित्रकूट का दर्शन प्राप्त करेंगे।
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सोमवार भोर सुबह चार बजे से ही नैमिषारण्य तीर्थ में रामादल के परिक्रमार्थियों का आगमन शुरू हो गया था। इस परिक्रमा पथ पर कई परिक्रमार्थी कीर्तन सुमिरन करते हुए पैदल यात्रा कर रहे थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु साइकिल, मोटर साइकिल पर बैठकर यात्रा के आनंद में खोए से दिखेे। ट्रैक्टर और बैलगाड़ी से भी श्रद्धालु नैमिषारण्य तीर्थ में पहुंचकर जल्द ही स्नान और पूजन का क्रम शुरू करने को उत्सुक दिख रहे थे।
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नैमिष तीर्थ में परिक्रमार्थियों ने खुले मैदान, धर्मशालाओं, बाग बगीचों, तीर्थ पुरोहितों व संत महात्माओं के आश्रमों में डेरा डाला। परिक्रमार्थियों ने पूरे दिन राम नाम का जयकारा लगाते हुए ऋषियों की भूमि में तीर्थ की पवित्र नदी गोमती और चक्रतीर्थ में स्नान पूजन करके दान किया। उसके बाद नैमिष तीर्थ स्थित मां ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, नैमिष नाथ, हनुमान गढ़ी, देवदेवेश्वर, देवपुरी, बाला जी, सत्यनारायण सन्निधि मंदिर, कालीपीठ आदि धार्मिक स्थलों का दर्शन पूजन किया।
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इस दौरान पूरे नैमिष में परिक्रमार्थियों के छोटे-छोटे टेंट झोपड़ी का नजारा काफी आकर्षक लग रहा था। नैमिष में रामादल यात्रा के दौरान जहां कई जगह परिक्रमार्थियों द्वारा चूल्हे पर भोजन बनाने का दौर जारी था। वहीं तीर्थ में ही कई आश्रमों मंदिरों में भी भंडारे का भी अनवरत दौर जारी रहा। पहला आश्रम महंत भरतदास के तत्वावधान में दिन भर भंडारा चलता रहा।
नीलकंठ आश्रम, परिक्रमा मार्ग स्थित कई आश्रमों सहित नैमिष में अनेक स्थानों पर प्रसाद वितरण हुआ। नैमिष तीर्थ में चक्रतीर्थ प्रांगण, रामानुजकोट मंदिर, बाला जी मंदिर समेत कई मंदिर मठों में विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठानों का भी दौर चलता रहा।
भक्ति का एक अनोखा रूप हठयोग
ईश्वर की भक्ति के अनेक रंग इस परिक्रमा में देखने को मिलते हैं। धर्म के उन्हीं अनूठे रंगों में से एक हठयोग है। इस साधना में भक्त बड़े ही कठिन प्रयासों से अपने आराध्य को प्रसन्न करते हैं। इस दौरान वे प्रयास करते है कि इस दौरान न वे किसी को देखे और न कोई उन्हें देखे।
आज कोल्हुआ बरेठी को पहुंचेंगे श्रद्धालु
रामादल यात्रा के नवें पड़ाव नैमिषारण्य तीर्थ से मंगलवार को 10वें पड़ाव कोल्हुआ बरेठी को पहुंचेंगे। इस यात्रा के दौरान परिक्रमार्थी व्यास गद्दी, मनु सतरूपा, तपस्थान, ब्रम्हावर्त, दशाश्वमेघ घाट, हनुमान गढ़ी, पंच पांडव, यज्ञवाराह कूप, गंगोत्री, लक्ष्मीनारायण, नरसिंह, कुरुक्षेत्र, हंस हंसिनी, पुष्कर तीर्थ, कालीदाह, गोवर्धन, गोकुल, मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, देवदेवेश्वर, सेतुबंध रामगंगा, विष्णु पर्वत, रुद्रावर्त, गुप्त काशी, रुद्र प्रयाग, देवप्रयाग, लोधेश्वर, त्रियुगी नारायण, केदारनाथ, बद्रीनाथ, तुंगनाथ, बृहस्पति तीर्थ प्रयाग, हनुमान तीर्थ व चित्रकूट का दर्शन प्राप्त करेंगे।