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Sitapur News: मैदा की कीमतों में उछाल, बेकरी संचालकों ने घटाया उत्पादन
Fri, 03 Feb 2023 09:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:25 AM IST
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सीतापुर। मैदा की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से बेकरी संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिले में कई बेकरी संचालकों ने उत्पादन 50 फीसदी तक कम कर दिया है। कुछ बेकरी संचालकों ने लागत बढ़ने पर होने वाले नुकसान से व्यवसाय ही बंद कर दिया है। कई ब्रांडेड ब्रेड कंपनियों ने पैकिंग का वजन घटा दिया है। ब्रेड, रस्क, बिस्किट और केक बनाने वाले कारखानों में मैदे का खूब इस्तेमाल होता है। जिले में ब्रेड, रस्क और केक की 50 से अधिक बेेकरी हैं। इनमें कम से कम रोज 25 क्विंटल मैदे का इस्तेमाल होता है। पिछले दो महीने में मैदे की कीमतों में 740 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में छोटी फैक्टरी संचालित करने वालों की उत्पादन लागत डेढ़ गुना तक बढ़ रही है।
बेकरी संचालक बताते हैं कि मैदे की कीमतों में उछाल से लागत बढ़ गई जबकि उत्पादन के बाजार में दाम बढ़ नही रहे हैं। ऐसे में बिना कीमतें बढ़ाए प्रोडक्शन चालू रखने में नुकसान उठाना पड़ रहा है। बेकरी संचालकों का कहना है कि हमारी पैकिंग में अगर ब्रेड कम होती है तो दुकानदार व ग्राहक खरीदने से मना कर देते हैं। ब्रांडेड कंपनियों ने मैदा महंगा होते ही पैकिंग का वजन कम कर दिया है।
वर्तमान हालातों को देखते हुए शहर के बेकरी संचालक सैदू ने अपनी एक फैक्टरी बंद कर दी तो दूसरी में 50 फीसदी तक उत्पादन घटा दिया है। महोली में चेरी का व्यवसाय करने वाले रूपेश जायसवाल ने मैदा की बढ़ती कीमतों से नुकसान होता देख कारोबार बंद दिया है।
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बाहर के आर्डर लेना बंद किया, 50 फीसदी उत्पादन घटाया
शहर में बेकरी चलाने वाले सैदू बताते हैं कि दो महीने पहले मैदा की 50 किलो की बोरी 1300 रुपये की मिलती थी। पहले दाम बढ़कर 1500 हुए अब 1670 रुपये की बोरी मिल रही है। एक क्विंटल मैदे से ब्रेड बनाने पर 400 रुपये तक की बचत हो जाती थी। अब 100 रुपये बमुश्किल बच पाते हैं।
इसमें भी दुकानों तक माल पहुंचाने का भाड़ा, लेबर, बिजली बिल आदि खर्चे वहन करना पड़ता है। बाजार में दाम बढ़ाने की बात करने पर माल बिकता नहीं है। कुल मिलाकर घाटा उठाना पड़ रहा है। सैदू ने बताया कि दो फैक्टरियों में से एक बंद कर दी है। दूसरी में 50 फीसदी उत्पादन कम कर दिया है। लखीमपुर, गोला, पीलीभीत समेत कई जगहों के आर्डर लेना बंद कर दिया है। शहर के आर्डर ही लेते हैं।
मुनाफा नहीं बचा तो व्यवसाय बंद किया
महोली में चेरी बनाने का काम करने वाले रूपेश जायसवाल ने मैदा के लगातार बढ़ती कीमतों के चलते व्यवसाय बंद कर दिया है। रूपेश बताते हैं कि एक क्विंटल मैदा में 1000 पीस चेरी बनाते थे। तब 400 रुपये तक बच जाते थे। अब महज 100 रुपये बचते हैं, उसमें भी कई तरह के खर्चे होते हैं। घाटा होने से मजबूरन व्यवसाय बंद करना पड़ा।
कंपनियों ने कम किया वजन
बेकरी संचालकों ने बताया कि मैदा के दाम बढ़ने से ब्रांडेड कंपनियों के व्यवसाय पर भी असर पड़ा है। कई नामी कंपनियों ने 10 रुपये में मिलने वाले 125 ग्राम ब्रेड के पैकेट का वजन घटाकर 100 ग्राम कर दिया है। अब भी नुकसान होता देख वजन घटाकर 80 ग्राम करने की तैयारी में हैं। नई पैकिंग पर इसे लेकर जानकारी भी साझा करने लगे हैं। ब्रेड के थोक विक्रेता उपेंद्र पांडेय बताते हैं कि 20 रुपये व इससे अधिक कीमत के पैकेटों पर 3 से 5 रुपये तक बढ़ाने की तैयारी कंपनियां कर रही हैं।
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बेकरी संचालक बताते हैं कि मैदे की कीमतों में उछाल से लागत बढ़ गई जबकि उत्पादन के बाजार में दाम बढ़ नही रहे हैं। ऐसे में बिना कीमतें बढ़ाए प्रोडक्शन चालू रखने में नुकसान उठाना पड़ रहा है। बेकरी संचालकों का कहना है कि हमारी पैकिंग में अगर ब्रेड कम होती है तो दुकानदार व ग्राहक खरीदने से मना कर देते हैं। ब्रांडेड कंपनियों ने मैदा महंगा होते ही पैकिंग का वजन कम कर दिया है।
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वर्तमान हालातों को देखते हुए शहर के बेकरी संचालक सैदू ने अपनी एक फैक्टरी बंद कर दी तो दूसरी में 50 फीसदी तक उत्पादन घटा दिया है। महोली में चेरी का व्यवसाय करने वाले रूपेश जायसवाल ने मैदा की बढ़ती कीमतों से नुकसान होता देख कारोबार बंद दिया है।
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बाहर के आर्डर लेना बंद किया, 50 फीसदी उत्पादन घटाया
शहर में बेकरी चलाने वाले सैदू बताते हैं कि दो महीने पहले मैदा की 50 किलो की बोरी 1300 रुपये की मिलती थी। पहले दाम बढ़कर 1500 हुए अब 1670 रुपये की बोरी मिल रही है। एक क्विंटल मैदे से ब्रेड बनाने पर 400 रुपये तक की बचत हो जाती थी। अब 100 रुपये बमुश्किल बच पाते हैं।
इसमें भी दुकानों तक माल पहुंचाने का भाड़ा, लेबर, बिजली बिल आदि खर्चे वहन करना पड़ता है। बाजार में दाम बढ़ाने की बात करने पर माल बिकता नहीं है। कुल मिलाकर घाटा उठाना पड़ रहा है। सैदू ने बताया कि दो फैक्टरियों में से एक बंद कर दी है। दूसरी में 50 फीसदी उत्पादन कम कर दिया है। लखीमपुर, गोला, पीलीभीत समेत कई जगहों के आर्डर लेना बंद कर दिया है। शहर के आर्डर ही लेते हैं।
मुनाफा नहीं बचा तो व्यवसाय बंद किया
महोली में चेरी बनाने का काम करने वाले रूपेश जायसवाल ने मैदा के लगातार बढ़ती कीमतों के चलते व्यवसाय बंद कर दिया है। रूपेश बताते हैं कि एक क्विंटल मैदा में 1000 पीस चेरी बनाते थे। तब 400 रुपये तक बच जाते थे। अब महज 100 रुपये बचते हैं, उसमें भी कई तरह के खर्चे होते हैं। घाटा होने से मजबूरन व्यवसाय बंद करना पड़ा।
कंपनियों ने कम किया वजन
बेकरी संचालकों ने बताया कि मैदा के दाम बढ़ने से ब्रांडेड कंपनियों के व्यवसाय पर भी असर पड़ा है। कई नामी कंपनियों ने 10 रुपये में मिलने वाले 125 ग्राम ब्रेड के पैकेट का वजन घटाकर 100 ग्राम कर दिया है। अब भी नुकसान होता देख वजन घटाकर 80 ग्राम करने की तैयारी में हैं। नई पैकिंग पर इसे लेकर जानकारी भी साझा करने लगे हैं। ब्रेड के थोक विक्रेता उपेंद्र पांडेय बताते हैं कि 20 रुपये व इससे अधिक कीमत के पैकेटों पर 3 से 5 रुपये तक बढ़ाने की तैयारी कंपनियां कर रही हैं।