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Sitapur News: लोक अदालत में दो लाख से अधिक वादों का निस्तारण

Sat, 09 May 2026 11:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Sat, 09 May 2026 11:39 PM IST
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More than two lakh cases settled in Lok Adalat
सीतापुर। शहर स्थित न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जिला जज आशीष जैन ने किया। उनके साथ बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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दीप प्रज्ज्वलन के बाद उन्होंने ट्राई साइकिल का भी वितरण किया। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी राजकुमार ने बताया कि छह लोगों को इसका लाभ मिला। इसके बाद जिला जज ने प्राधिकरण के सचिव आलोक यादव और लोक अदालत के नोडल अधिकारी जज विजय कुमार आजाद के साथ अलग-अलग कैंपों में जाकर निरीक्षण किया।
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उन्होंने जेल के बंदियों की ओर से बनाई गई वस्तुओं की प्रदर्शनी को भी देखा। लोक अदालत में कुल दो लाख एक हजार 17 वादों का समाधान किया गया। जिसमें मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के तहत 24 मामलों का समाधान हुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व समस्त अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पांच हजार 622 वादों का समाधान किया।
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उपभोक्ता फोरम ने नौ और राजस्व न्यायालय की ओर से 59 हजार 588 मुकदमे निस्तारित हुए। जिला विकास अधिकारी ने 77 हजार 869 व विभिन्न बैंकों, फाइनेंस कंपनियों के कुल एक हजार 129 मामले निस्तारित किए। कार्यक्रम में व्यापार मण्डल के सहयोग से एक चिकित्सा शिविर का आयोजन भी किया गया था।


जजों ने निपटाए 350 वाद
लोक अदालत में जज ने भी वादों का निस्तारण किया। अपर जिला जजों में शामिल मोहम्मद शफीक ने नौ, महेंद्र सिंह चतुर्थ ने दो, विजय कुमार आजाद ने 235, जीतेंद्र कुमार द्विवेदी, शैलेंद्र वर्मा, तरन्नुम खान व दिनेश कुमार नागर ने एक-एक वादों का निस्तारण किया। इसी तरह से प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय मंजुला सरकार ने 36, अपर प्रधान न्यायाधीश कोर्ट संख्या- दो आभापाल ने 64 वादों का निस्तारण किया।


लोक अदालत की वजह से दोबारा बस गया घर
लोक अदालत की वजह से वैसे तो लोगों को राहत मिली ही, लेकिन इसकी वजह से कई घर भी दोबारा से बस गए। जिले की ही रूबी और उनके पति पंकज में मामूली कहासुनी की वजह से मन मुटाव हो गया था। मामला घर से निकलकर कोर्ट तक आ गया। दोनों की काउंसिलिंग लोक अदालत में हुई, इसके बाद दोनों ने अपनी-अपनी कमियों को दूर करने की सहमति जताई। इसके साथ ही वह फिर से आपस में रहने के लिए राजी हो गए। इसी तरह से मुईद और अफसाना के बीच में भी मनमुटाव हो गया था। जो कि दूर हो गया।



राहत मिलने की जगी आस
मिश्रिख के निवासी विश्नू ने बताया कि उनके पिता ने जमीन गिरवी रख बैंक से एक लाख रुपये का कर्ज लिया था। पिता की मौत के बाद जब नोटिस आया तो उनको इसके बारे में जानकारी हुई। वह बैंक के कर्मचारियों के पास पहुंचे तो धनराशि में कुछ कमी करने की बात कर्मचारियों ने कही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि लोक अदालत के माध्यम से उनको कुछ राहत मिल सकती है।
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