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Sitapur News: वार्डों में क्षमता से अधिक बेड, परिसर में खड़ी होती हैं बाइक
Sun, 17 Nov 2024 01:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 17 Nov 2024 01:13 AM IST
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जिला अस्पताल में फुल दिखे सभी बेड।
मेडिकल वार्ड
समय: 7:40
एक ही रास्ता उस पर खड़ा है स्ट्रेचर
जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड खचाखच भरा हुआ है। इस वार्ड में 25 से अधिक बेड पड़े हैं। आमने-सामने बेड के बीच खाली जगह में भी बेड डाल दिए गए हैं। ये सभी फुल हैं। इस वार्ड में प्रवेश करते ही गैलरी में स्ट्रेचर रखा हुआ दिखाई दिया। यह एक रस्सी से बांध दिया गया है। इसके चलते वार्ड में निकलना बहुत ही मुश्किल है। केवल एक ही गेट खुलता है। अगर भगदड़ मच जाए तो इस वार्ड से मरीजों का निकलना बेहद मुश्किल होगा।
चिल्ड्रेन वार्ड
समय: 7:50
जिला अस्पताल का चिल्ड्रेन वार्ड की गैलरी में भी बेड डाल दिए गए हैं। वार्ड के अंदर तादाद से अधिक करीब 50 बेड पड़े हुए हैं। जबकि यहां पर 30 से अधिक बेड आरामदायक तरीके से ही डाले जा सकते हैं। वार्ड के अंदर व जाने का केवल एक ही रास्ता उपयोग किया जा रहा है। सीढि़यों से जैसे ही नीचे उतरे तो वहां पर एक पुताई करने वाली एक सदली रखी हुई मिली। सीढिय़ों के पास एक बाइक खड़ी थी। अगर कई लोग एक साथ निकले तो बहुत ही मुश्किल भरा हो सकता है। हालांकि अग्निशमन यंत्र 2025 तक क्रियाशील दिखाई दिया।
महिला अस्पताल, एनआईसीयू वार्ड
समय: 7:55
जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में प्रवेश के लिए केवल एक ही रास्ता है। इस वार्ड के अंदर अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। शाम के समय इस वार्ड के बाहर कई एंबुलेंस व वाहन खड़े हुए दिखाई दिए। जबकि इस वार्ड तक पहुंचने का केवल एक ही रास्ता है। अगर कोई घटना हो जाए तो यहां से निकलना बहुत ही मुश्किल है। हालांकि एक दिन पहले ही महिला आयोग की सदस्य को गंदगी सहित कई खामियां मिली थीं। एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती मिले थे। इस पर उन्होंने सीएमएस को फटकार भी लगाई थी। इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी।
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सीतापुर। झांसी में मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में लगी आग में कई मासूमों के झुलसने से हुई मौत के बाद भी जिला व महिला अस्पताल प्रशासन सबक नहीं ले रहा है। इन दोनों अस्पतालों में शनिवार को अव्यवस्थाएं हावी दिखीं। वार्ड तक पहुंचने के लिए केवल एक ही रास्ते का उपयोग हो रहा है। ऐसे में अगर कोई घटना हो जाए तो मरीजों का सुरक्षित निकलना भी मुश्किल है।
जिला अस्पताल के वार्डों में क्षमता से अधिक बेड डाल दिए गए हैं। अस्पताल परिसर के अंदर बाइकें खड़ी की जाती हैं। अस्पताल में सीढिय़ों से एक साथ उतरना आसान नहीं है। यहां अग्निकांड जैसी घटनाओं से निपटने के लिए अस्पताल में कोई तैयारी नहीं है। कई जगहों पर इमरजेंसी गेट तो हैं, लेकिन यह कौन खोलेगा और कैसे खुलेंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाए तो मरीजों के लिए आफत बन सकती है।
जगह की है कमी
जिला अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। अस्पताल में जगह की कमी के चलते वार्डों में अधिक बेड पड़े हुए हैं। कोई भी आकस्मिक घटना से निपटने के लिए अस्पताल हर समय तैयार रहता है।
डॉ. इंदर सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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समय: 7:40
एक ही रास्ता उस पर खड़ा है स्ट्रेचर
जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड खचाखच भरा हुआ है। इस वार्ड में 25 से अधिक बेड पड़े हैं। आमने-सामने बेड के बीच खाली जगह में भी बेड डाल दिए गए हैं। ये सभी फुल हैं। इस वार्ड में प्रवेश करते ही गैलरी में स्ट्रेचर रखा हुआ दिखाई दिया। यह एक रस्सी से बांध दिया गया है। इसके चलते वार्ड में निकलना बहुत ही मुश्किल है। केवल एक ही गेट खुलता है। अगर भगदड़ मच जाए तो इस वार्ड से मरीजों का निकलना बेहद मुश्किल होगा।
चिल्ड्रेन वार्ड
समय: 7:50
जिला अस्पताल का चिल्ड्रेन वार्ड की गैलरी में भी बेड डाल दिए गए हैं। वार्ड के अंदर तादाद से अधिक करीब 50 बेड पड़े हुए हैं। जबकि यहां पर 30 से अधिक बेड आरामदायक तरीके से ही डाले जा सकते हैं। वार्ड के अंदर व जाने का केवल एक ही रास्ता उपयोग किया जा रहा है। सीढि़यों से जैसे ही नीचे उतरे तो वहां पर एक पुताई करने वाली एक सदली रखी हुई मिली। सीढिय़ों के पास एक बाइक खड़ी थी। अगर कई लोग एक साथ निकले तो बहुत ही मुश्किल भरा हो सकता है। हालांकि अग्निशमन यंत्र 2025 तक क्रियाशील दिखाई दिया।
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महिला अस्पताल, एनआईसीयू वार्ड
समय: 7:55
जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में प्रवेश के लिए केवल एक ही रास्ता है। इस वार्ड के अंदर अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। शाम के समय इस वार्ड के बाहर कई एंबुलेंस व वाहन खड़े हुए दिखाई दिए। जबकि इस वार्ड तक पहुंचने का केवल एक ही रास्ता है। अगर कोई घटना हो जाए तो यहां से निकलना बहुत ही मुश्किल है। हालांकि एक दिन पहले ही महिला आयोग की सदस्य को गंदगी सहित कई खामियां मिली थीं। एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती मिले थे। इस पर उन्होंने सीएमएस को फटकार भी लगाई थी। इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी।
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सीतापुर। झांसी में मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में लगी आग में कई मासूमों के झुलसने से हुई मौत के बाद भी जिला व महिला अस्पताल प्रशासन सबक नहीं ले रहा है। इन दोनों अस्पतालों में शनिवार को अव्यवस्थाएं हावी दिखीं। वार्ड तक पहुंचने के लिए केवल एक ही रास्ते का उपयोग हो रहा है। ऐसे में अगर कोई घटना हो जाए तो मरीजों का सुरक्षित निकलना भी मुश्किल है।
जिला अस्पताल के वार्डों में क्षमता से अधिक बेड डाल दिए गए हैं। अस्पताल परिसर के अंदर बाइकें खड़ी की जाती हैं। अस्पताल में सीढिय़ों से एक साथ उतरना आसान नहीं है। यहां अग्निकांड जैसी घटनाओं से निपटने के लिए अस्पताल में कोई तैयारी नहीं है। कई जगहों पर इमरजेंसी गेट तो हैं, लेकिन यह कौन खोलेगा और कैसे खुलेंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाए तो मरीजों के लिए आफत बन सकती है।
जगह की है कमी
जिला अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं। अस्पताल में जगह की कमी के चलते वार्डों में अधिक बेड पड़े हुए हैं। कोई भी आकस्मिक घटना से निपटने के लिए अस्पताल हर समय तैयार रहता है।
डॉ. इंदर सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल