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आरक्षण के समर्थन में पैदल मार्च
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कलेक्ट्रेट में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते भारतीय संविधान संघर्ष समिति के पदाधिकारी।
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। आरक्षण के समर्थन में गांधी पार्क से कलेक्ट्रेट तक बीएस-4 द्वारा पैदल मार्च निकाला गया। इसमें वकीलों, बुद्धिजीवियों व समाजसेवियों ने शिरकत की। इसका नेतृत्व पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने किया। उन्होंने कहा कि भगवा सरकार दलितों व पिछड़े वर्ग के आरक्षण को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। सरकार ने दलित छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति राशि देना बंद कर दिया है। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को दिया।
पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने कहा कि जिस दौर में डॉ. आंबेडकर संविधान की रचना में व्यस्त थे, उस दौर में आरएसएस और उसके मुखिया एमएम गोवलकर बाबा साहेब के विचारों की निंदा एवं मनु स्मृति के प्रचार-प्रसार में जुटे थे। संविधान सभा में बोलते हुए उन्हें कहना पड़ा कि संविधान चाहे कितना ही अच्छा हो, यदि उसे लागू करने वाले अच्छे नहीं होंगे तो अच्छा संविधान भी बुरा होगा। संविधान की मूल भावना के विरुद्ध सरकार फैसले ले रही है।
देश का किसान, नौजवान, छोटे कारोबारी व मजदूर कारीगर सभी परेशान हैं। विवश होकर बीएस-4 द्वारा एक जन आंदोलन शुरू किया गया है। पैदल मार्च गांधी पार्क से निकलकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। वहां राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को दिया गया। इसके मार्फत मांग की गई कि देश के दलितों और पिछड़ों के आरक्षण को संविधान की नवीं अनुसूची में सम्मिलित कराकर आरक्षण पर अनावश्यक हस्तक्षेप को रोका जाए। इस पर सत्येन्द्र रावत, विमलेश यादव, इन्द्रपाल राजवंशी, इंदू रावत, रामकुमार प्रजापति, भगवती प्रसाद आदि ने हस्ताक्षर किए।
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पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने कहा कि जिस दौर में डॉ. आंबेडकर संविधान की रचना में व्यस्त थे, उस दौर में आरएसएस और उसके मुखिया एमएम गोवलकर बाबा साहेब के विचारों की निंदा एवं मनु स्मृति के प्रचार-प्रसार में जुटे थे। संविधान सभा में बोलते हुए उन्हें कहना पड़ा कि संविधान चाहे कितना ही अच्छा हो, यदि उसे लागू करने वाले अच्छे नहीं होंगे तो अच्छा संविधान भी बुरा होगा। संविधान की मूल भावना के विरुद्ध सरकार फैसले ले रही है।
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देश का किसान, नौजवान, छोटे कारोबारी व मजदूर कारीगर सभी परेशान हैं। विवश होकर बीएस-4 द्वारा एक जन आंदोलन शुरू किया गया है। पैदल मार्च गांधी पार्क से निकलकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। वहां राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को दिया गया। इसके मार्फत मांग की गई कि देश के दलितों और पिछड़ों के आरक्षण को संविधान की नवीं अनुसूची में सम्मिलित कराकर आरक्षण पर अनावश्यक हस्तक्षेप को रोका जाए। इस पर सत्येन्द्र रावत, विमलेश यादव, इन्द्रपाल राजवंशी, इंदू रावत, रामकुमार प्रजापति, भगवती प्रसाद आदि ने हस्ताक्षर किए।
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