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बच्चों को दें अच्छी संस्कारवान शिक्षा’
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Wed, 01 Jul 2015 11:16 PM IST
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वर्तमान में चरित्र निर्माण की बात बीते जमाने की बात लगती है। घर, परिवार, समाज में जीवन शैली काफी बदल गई है। अंग्रेजी बोलकर लोग अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
बच्चों में संस्कार परिवार व विद्यालयों से पनपते हैं। जरूरत है कि शिक्षक और अभिभावक बच्चों को संस्कारवान शिक्षा दें।
यह बात वरिष्ठ शिक्षक अखिलेश दुबे ने शिशु भारती की ओर से आयोजित छात्रों में गिरते संस्कार और शिक्षक की भूमिका विषयक गोष्ठी में कही।
सीता इंटर कॉलेज के सभागार में उन्होंने कहा कि जबतक परिवार में बच्चों को संस्कारयुक्त अच्छा माहौल नहीं मिलेगा तब तक शिक्षक चाहकर भी बहुत कुछ नहीं कर सकता। इस भौतिक युग में समाज में भी तमाम प्रकार की गिरावटें आई हैं
किंतु फिर भी शिक्षक अग्रणी भूमिका में है। गोष्ठी में सीता चिल्ड्रेन एकेडमी के अनुशासन प्रमुख शशांक शुक्ल ने कहा कि नियमित छात्र संस्कारित होते हैं। उन्हें शिक्षकों से निरंतर प्रेरणा मिलती है।
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समाज में एकल परिवार की सभ्यता पनपने से छात्रों में संस्कार हीनता पनपी है। आरती सिंह ने कहा कि परिवार में संस्कार का महत्व बोलचाल की भाषा व कार्य व्यवहार से ही पता चल जाता है।
एक अच्छा शिक्षक उसे सुधारने का काम करता है। गोष्ठी को मंजू सिंह, आशुतोष शुक्ल, एसआर वर्मा, आरजे वर्मा, वीके शुक्ल, डीके गिरि ने भी संबोधित किया।
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बच्चों में संस्कार परिवार व विद्यालयों से पनपते हैं। जरूरत है कि शिक्षक और अभिभावक बच्चों को संस्कारवान शिक्षा दें।
यह बात वरिष्ठ शिक्षक अखिलेश दुबे ने शिशु भारती की ओर से आयोजित छात्रों में गिरते संस्कार और शिक्षक की भूमिका विषयक गोष्ठी में कही।
सीता इंटर कॉलेज के सभागार में उन्होंने कहा कि जबतक परिवार में बच्चों को संस्कारयुक्त अच्छा माहौल नहीं मिलेगा तब तक शिक्षक चाहकर भी बहुत कुछ नहीं कर सकता। इस भौतिक युग में समाज में भी तमाम प्रकार की गिरावटें आई हैं
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किंतु फिर भी शिक्षक अग्रणी भूमिका में है। गोष्ठी में सीता चिल्ड्रेन एकेडमी के अनुशासन प्रमुख शशांक शुक्ल ने कहा कि नियमित छात्र संस्कारित होते हैं। उन्हें शिक्षकों से निरंतर प्रेरणा मिलती है।
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समाज में एकल परिवार की सभ्यता पनपने से छात्रों में संस्कार हीनता पनपी है। आरती सिंह ने कहा कि परिवार में संस्कार का महत्व बोलचाल की भाषा व कार्य व्यवहार से ही पता चल जाता है।
एक अच्छा शिक्षक उसे सुधारने का काम करता है। गोष्ठी को मंजू सिंह, आशुतोष शुक्ल, एसआर वर्मा, आरजे वर्मा, वीके शुक्ल, डीके गिरि ने भी संबोधित किया।