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Sitapur News: बकरी का शिकार करने पिंजरे में घुसा तेंदुआ, कैद
Fri, 06 Nov 2026 12:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 06 Nov 2026 12:17 AM IST
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संदना। मिश्रिख वन रेंज में 53 दिनों से करीब 50 गांवों के आसपास चहल-कदमी कर दहशत का पर्याय बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग की पकड़ में आ गया। वन विभाग की ओर से खेवटा जंगल में लगाए गए पिंजरे में बंधी बकरी का बुधवार देर रात शिकार करने पहुंचा तेंदुआ उसी में फंस कर रह गया। डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ वयस्क नर है। इसकी उम्र करीब सात साल है। फिलहाल उसे इलसिया उद्यान में रखा गया है। आवश्यक औपचारिकता पूर्ण करने के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक प्रवास में छोड़ा जाएगा।
सबसे पहले 11 सितंबर को तेंदुआ देहलरा गांव के पास टहलते हुए देखा गया था। वन विभाग की टीम द्वारा की गई कॉम्बिंग के दौरान गांव के बाहर तेंदुए के पग चिह्न भी मिले थे। इसके बाद से इलाके में तेंदुए की दहशत कायम थी। तेदुंए को पकड़ने के लिए देहलरा के पास 12 सितंबर को पिंजरा लगाया गया था। हांलाकि, इसके बाद तेंदुए की सक्रियता खेवटा जंगल और आसपास के गांवों में मिलने लगी।
बीते डेढ़ माह के दौरान इलाके के रामपुर, खेवटा, रामशाला, कादीनगर, बेलहरी, पनरभू, भिखनाप और पनाहनगर समेत करीब 50 गांवों के आसपास तेंदुआ चहलकदमी करता रहा। खेवटा के जंगल में भी उसने अपना ठिकाना बना रखा था। इस दौरान उसने कई पालतू जानवरों का अपना शिकार बनाया। कई बार तेंदुए के पगचिह्न भी अलग-अलग लोकेशन पर मिले, पर वह पकड़ में नहीं आया।
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बुधवार देर रात बकरी के शिकार का लालच उसे पिंजरे तक खींच लाया। बकरी खाने अंदर घुसा तेंदुआ पिंजरे में कैद होकर रह गया। बृहस्पतिवार सुबह मुनींद्र अवस्थी के फार्म हाउस के निकट रहने वाले सरदार इंद्रजीत सिंह ने पिंजरे से तेंदुए के दहाड़ने की आवाज सुनी। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। मिश्रिख रेंजर सिकंदर सिंह ने बताया कि तेंदुए को इलसिया वन उद्यान सीतापुर भेजा गया है।
इलाके में तेंदुए के पकड़े जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दो बार तेंदुआ पिंजरे में कैद हो चुका है। पहले 21 दिसंबर 2020 और दूसरी बार 19 नवंबर 2025 को तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ था।
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सबसे पहले 11 सितंबर को तेंदुआ देहलरा गांव के पास टहलते हुए देखा गया था। वन विभाग की टीम द्वारा की गई कॉम्बिंग के दौरान गांव के बाहर तेंदुए के पग चिह्न भी मिले थे। इसके बाद से इलाके में तेंदुए की दहशत कायम थी। तेदुंए को पकड़ने के लिए देहलरा के पास 12 सितंबर को पिंजरा लगाया गया था। हांलाकि, इसके बाद तेंदुए की सक्रियता खेवटा जंगल और आसपास के गांवों में मिलने लगी।
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बीते डेढ़ माह के दौरान इलाके के रामपुर, खेवटा, रामशाला, कादीनगर, बेलहरी, पनरभू, भिखनाप और पनाहनगर समेत करीब 50 गांवों के आसपास तेंदुआ चहलकदमी करता रहा। खेवटा के जंगल में भी उसने अपना ठिकाना बना रखा था। इस दौरान उसने कई पालतू जानवरों का अपना शिकार बनाया। कई बार तेंदुए के पगचिह्न भी अलग-अलग लोकेशन पर मिले, पर वह पकड़ में नहीं आया।
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बुधवार देर रात बकरी के शिकार का लालच उसे पिंजरे तक खींच लाया। बकरी खाने अंदर घुसा तेंदुआ पिंजरे में कैद होकर रह गया। बृहस्पतिवार सुबह मुनींद्र अवस्थी के फार्म हाउस के निकट रहने वाले सरदार इंद्रजीत सिंह ने पिंजरे से तेंदुए के दहाड़ने की आवाज सुनी। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। मिश्रिख रेंजर सिकंदर सिंह ने बताया कि तेंदुए को इलसिया वन उद्यान सीतापुर भेजा गया है।
इलाके में तेंदुए के पकड़े जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दो बार तेंदुआ पिंजरे में कैद हो चुका है। पहले 21 दिसंबर 2020 और दूसरी बार 19 नवंबर 2025 को तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ था।