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Sitapur News: केवीके ने सीमैप मेले में किसानों को कराया शैक्षणिक भ्रमण
Mon, 02 Feb 2026 10:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 02 Feb 2026 10:52 PM IST
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सीमैप का भ्रमण करने वाले किसानों का दल।
सीतापुर। किसानों को नवीन कृषि तकनीकों, औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती और मूल्य संवर्धन की जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया की ओर से सीमैप (केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान) लखनऊ द्वारा आयोजित किसान मेले में 66 किसानों के दल का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस भ्रमण कार्यक्रम का नेतृत्व प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा किया गया।
इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य किसानों को औषधीय ओर सगंध फसलों की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण व विपणन में दक्ष कराना रहा। कार्यक्रम के दौरान किसानों को सीमैप के वैज्ञानिकों द्वारा तुलसी, मेंथा, अश्वगंधा, स्टीविया, लेमनग्रास, पामारोजा, सिट्रोनेला एवं अन्य औषधीय पौधों की उन्नत प्रजातियों की जानकारी दी गई। साथ ही इन फसलों की नर्सरी उत्पादन तकनीक, रोपाई विधि, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और रोग-कीट नियंत्रण के आधुनिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया कि औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती परंपरागत फसलों की तुलना में अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि इन फसलों से प्राप्त तेल एवं अन्य उत्पादों का औद्योगिक उपयोग दवा, कॉस्मेटिक एवं सुगंध उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
जिले में जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन से संबंधित नवीन जानकारियां प्राप्त हुईं। साथ ही उन्हें औषधीय पौधों की खेती से संबंधित सरकारी योजनाओं एवं अनुदान सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि इससे जिले में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती अपनाकर किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम कर सकते हैं और अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।
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वैज्ञानिक खेती को भी मिलेगा बढ़ावा
केवीके कटिया के अध्यक्ष डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव ने बताया कि यह शैक्षणिक भ्रमण किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ है, जिससे क्षेत्रीय कृषि विकास को नई दिशा मिलने की संभावना है। कृषक दल में बिसवां, कसमंडा, परसेंडी, सकरन विकास खंडों से अशोक गुप्ता, हादी खान, योगेश, विद्याधर वाजपेई, सीतादेवी, प्रमोद सिंह, खुशवंत सिंह सहित 66 कृषक शामिल रहे।
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इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य किसानों को औषधीय ओर सगंध फसलों की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण व विपणन में दक्ष कराना रहा। कार्यक्रम के दौरान किसानों को सीमैप के वैज्ञानिकों द्वारा तुलसी, मेंथा, अश्वगंधा, स्टीविया, लेमनग्रास, पामारोजा, सिट्रोनेला एवं अन्य औषधीय पौधों की उन्नत प्रजातियों की जानकारी दी गई। साथ ही इन फसलों की नर्सरी उत्पादन तकनीक, रोपाई विधि, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और रोग-कीट नियंत्रण के आधुनिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया कि औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती परंपरागत फसलों की तुलना में अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि इन फसलों से प्राप्त तेल एवं अन्य उत्पादों का औद्योगिक उपयोग दवा, कॉस्मेटिक एवं सुगंध उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
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जिले में जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन से संबंधित नवीन जानकारियां प्राप्त हुईं। साथ ही उन्हें औषधीय पौधों की खेती से संबंधित सरकारी योजनाओं एवं अनुदान सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि इससे जिले में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती अपनाकर किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम कर सकते हैं और अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।
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वैज्ञानिक खेती को भी मिलेगा बढ़ावा
केवीके कटिया के अध्यक्ष डॉ. दयाशंकर श्रीवास्तव ने बताया कि यह शैक्षणिक भ्रमण किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ है, जिससे क्षेत्रीय कृषि विकास को नई दिशा मिलने की संभावना है। कृषक दल में बिसवां, कसमंडा, परसेंडी, सकरन विकास खंडों से अशोक गुप्ता, हादी खान, योगेश, विद्याधर वाजपेई, सीतादेवी, प्रमोद सिंह, खुशवंत सिंह सहित 66 कृषक शामिल रहे।