{"_id":"57c9be724f1c1b5a212cc2a6","slug":"japanese-encephalitis-now-also-spreading-in-sitapur","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब जापानी इंसेफेलाइटिस भी पसार रहा पांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब जापानी इंसेफेलाइटिस भी पसार रहा पांव
Amarujala Bureau
Updated Fri, 02 Sep 2016 11:31 PM IST
विज्ञापन
मेडिकल
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस ने भी पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में दो बच्चे व एक महिला जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आई है। महिला का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि महिला की हालत में सुधार हो रहा है।
हरगांव के ग्राम शिवपुरी निवासी नीरज कुमार की पत्नी विभा देवी (22) बीते एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित है। परिवार के लोगों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, यहां जांच में पता चला कि विभा देवी जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में है। उसे मेडिकल ए वार्ड में भर्ती कराया गया है।
डॉक्टरों का कहना है कि उसका इलाज किया जा रहा है और उसमें सुधार हो रहा है। इसके अलावा तंबौर देहात के रमेश की पुत्री सावित्री देवी (9) व रेउसा के हरीपुर निवासी सत्तू की पुत्री मुंडी देवी (10) भी जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आ गई है। इन दोनों को जिला अस्पताल में इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।
विज्ञापन
सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक जिले में कुल चार लोग जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आए हैं। इनमें एक बिहार का व्यक्ति था, जो कहीं बाहर से संक्रमित होकर आया था। जबकि तीन लोग इसी जिले के हैं।
दिमागी बुखार भी हो रहा हावी
जापानी इंसेफेलाइटिस के अलावा जिले में दिमागी बुखार भी हावी होता जा रहा है। जनवरी से अब तक करीब 23 ऐसे रोगी मिले हैं, जो दिमागी बुखार की चपेट में आ चुके थे। इन मरीजों का जिला अस्पताल में इलाज किया गया है।
यह है इंसेफ्लाइटिस
जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस से होने वाली बीमारी है। यह बीमारी क्यूलेक्स मादा मच्छर के काटने से होता है। यह वायरस शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इससे मरीज की जान तक जा सकती है।
ऐसे फैलती है
चिकित्सकों के मुताबिक यह वायरस सूकरों और जलपक्षियों से पैदा होता है। मुख्य रूप से यह बीमारी धान की पैदावार वाले क्षेत्र और जहां पीने के लिए साफ पानी की कमी है, वहां अधिक फैलती है। अधिक गर्मी व नमी के मौसम में यह बीमारी होने लगती है।
इसके कीटाणु सांस व मुंह से शरीर में प्रवेश करते हैं। जिन जगहों पर गंदगी रहती है। वहां तेजी से यह बीमारी फैलने लगती है। खाना बनाने में सफाई की कमी, गंदा पानी पीने व खाने से पहले हाथ साफ न करने से इंफेक्शन फैलता है। इस बीमारी की चपेट में अधिकतर बच्चे आते हैं। अप्रैल से दिसंबर के बीच इस बीमारी के मरीज पाए जाते हैं।
ये हैं लक्षण
सिर दर्द होना, तेज बुखार होना, मांसपेशी में दर्द, बेहोश हो जाना, शरीर के अंगों में जकड़न होना, चमकी व ऐंठन होना, बच्चे का सुस्त होना व बेहोश हो जाना, शरीर सुन्न पड़ जाना व कोई हरकत ना होना आदि प्रमुख लक्षण हैं।
विज्ञापन
हरगांव के ग्राम शिवपुरी निवासी नीरज कुमार की पत्नी विभा देवी (22) बीते एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित है। परिवार के लोगों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, यहां जांच में पता चला कि विभा देवी जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में है। उसे मेडिकल ए वार्ड में भर्ती कराया गया है।
विज्ञापन
डॉक्टरों का कहना है कि उसका इलाज किया जा रहा है और उसमें सुधार हो रहा है। इसके अलावा तंबौर देहात के रमेश की पुत्री सावित्री देवी (9) व रेउसा के हरीपुर निवासी सत्तू की पुत्री मुंडी देवी (10) भी जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आ गई है। इन दोनों को जिला अस्पताल में इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।
विज्ञापन
सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक जिले में कुल चार लोग जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आए हैं। इनमें एक बिहार का व्यक्ति था, जो कहीं बाहर से संक्रमित होकर आया था। जबकि तीन लोग इसी जिले के हैं।
दिमागी बुखार भी हो रहा हावी
जापानी इंसेफेलाइटिस के अलावा जिले में दिमागी बुखार भी हावी होता जा रहा है। जनवरी से अब तक करीब 23 ऐसे रोगी मिले हैं, जो दिमागी बुखार की चपेट में आ चुके थे। इन मरीजों का जिला अस्पताल में इलाज किया गया है।
यह है इंसेफ्लाइटिस
जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस से होने वाली बीमारी है। यह बीमारी क्यूलेक्स मादा मच्छर के काटने से होता है। यह वायरस शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। इससे मरीज की जान तक जा सकती है।
ऐसे फैलती है
चिकित्सकों के मुताबिक यह वायरस सूकरों और जलपक्षियों से पैदा होता है। मुख्य रूप से यह बीमारी धान की पैदावार वाले क्षेत्र और जहां पीने के लिए साफ पानी की कमी है, वहां अधिक फैलती है। अधिक गर्मी व नमी के मौसम में यह बीमारी होने लगती है।
इसके कीटाणु सांस व मुंह से शरीर में प्रवेश करते हैं। जिन जगहों पर गंदगी रहती है। वहां तेजी से यह बीमारी फैलने लगती है। खाना बनाने में सफाई की कमी, गंदा पानी पीने व खाने से पहले हाथ साफ न करने से इंफेक्शन फैलता है। इस बीमारी की चपेट में अधिकतर बच्चे आते हैं। अप्रैल से दिसंबर के बीच इस बीमारी के मरीज पाए जाते हैं।
ये हैं लक्षण
सिर दर्द होना, तेज बुखार होना, मांसपेशी में दर्द, बेहोश हो जाना, शरीर के अंगों में जकड़न होना, चमकी व ऐंठन होना, बच्चे का सुस्त होना व बेहोश हो जाना, शरीर सुन्न पड़ जाना व कोई हरकत ना होना आदि प्रमुख लक्षण हैं।