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राजकीय सम्मान के साथ दरोगा का अंतिम संस्कार
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पिसावां में गार्ड ऑफ ऑनर पुलिस कर्मी। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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पिसावां (सीतापुर)। थाना क्षेत्र के हदिरा गांव के एसआई की बागपत जिले में चुनावी ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से निधन के बाद शव को पैतृक गांव लाया गया। शव के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस बल की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान हर कोई गमगीन दिखा। हर आंख नम थी।
पिसावां इलाके के हदीरा गांव निवासी फूल सिंह (57) एसआई के पद पर पीलीभीत में तैनात थे। विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में ड्यूटी के लिए वह बागपत जिले में गए थे। उनकी ड्यूटी बालैनी थाना क्षेत्र में सेक्टर पुलिस अधिकारी के रूप में लगी थी। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। पुलिस कर्मियों ने उनको बड़ौत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर इजाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार उनकी मौत हृदय गति रुकने से मौत हुई है। पोस्टमार्टम के बाद दरोगा के शव को शुक्रवार की देर रात उनके पैतृक गांव लाया गया। शव घर पहुंचते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पूरा गांव शोक में डूब गया। हर ओर चीख-पुकार थी। सभी का रो-रोकर बुरा हाल था।
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शनिवार को एसओ पिसावां भानुप्रताप सिंह की मौजूदगी में दरोगा को राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा के दौरान हर किसी कोई भावुक दिखा। चेहरे मुरझाए थे। परिवार में अपने को खोने की कसक थी।
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पिसावां इलाके के हदीरा गांव निवासी फूल सिंह (57) एसआई के पद पर पीलीभीत में तैनात थे। विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में ड्यूटी के लिए वह बागपत जिले में गए थे। उनकी ड्यूटी बालैनी थाना क्षेत्र में सेक्टर पुलिस अधिकारी के रूप में लगी थी। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। पुलिस कर्मियों ने उनको बड़ौत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर इजाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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पुलिस के अनुसार उनकी मौत हृदय गति रुकने से मौत हुई है। पोस्टमार्टम के बाद दरोगा के शव को शुक्रवार की देर रात उनके पैतृक गांव लाया गया। शव घर पहुंचते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पूरा गांव शोक में डूब गया। हर ओर चीख-पुकार थी। सभी का रो-रोकर बुरा हाल था।
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शनिवार को एसओ पिसावां भानुप्रताप सिंह की मौजूदगी में दरोगा को राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा के दौरान हर किसी कोई भावुक दिखा। चेहरे मुरझाए थे। परिवार में अपने को खोने की कसक थी।