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खैराबाद में फैला संक्रमण, 10 की मौत
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खैराबाद के असोडर गांव में बाइक व ठेलिया पर बैठकर दवा लेकर वापस आते ग्रामीण। (संवाद)
- फोटो : SITAPUR
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खैराबाद (सीतापुर)। खैराबाद इलाके के असोडर गांव में संक्रामक रोगों ने पांव पसार लिए हैं। पिछले एक माह में गांव में 10 लोगों की बुखार के चलते मौत हो गई है। जबकि करीब 500 लोग बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का आरोप है सीएचसी पर चिकित्सक बाहर से महंगी दवाएं लिख देते है। इससे मजबूरी में झोलाछाप से इलाज कराना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान सवीक खान का कहना है वैसे तो हम बाहर हैं, लेकिन पता चला है कि गांव में चार से पांच सौ लोग बुखार से पीड़ित है। आठ से दस लोगों की मौत हो चुकी हैं।
क्षेत्र के असोडर गांव में इस समय संक्रामक रोगों का प्रकोप फैला हुआ है, एक माह के अंदर 10 लोगों की जान जा चुकी हैं। गांववालों के मुताबिक एक माह से लोगों को तेज बुखार आ रहा हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोग बुखार की चपेट में आ रहे है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल सतर्क नहीं है। सुबह से शाम तक अपने परिजनों के इलाज के लिए दर-दर भटकते रहते है।
ग्रामीणों ने सीएचसी खैराबाद के डाक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा मुनाफाखोरी के चक्कर में डॉक्टर मेडिकल स्टोरों से सांठगांठ कर एक बुखार के मरीज को छह सौ से लेकर सात सौ रुपये तक बाहर की दवा लिखकर कमाई कर रहे है। इसलिए हम लोग सरकारी अस्पताल न जाकर प्राइवेट डॉक्टरों व झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर है।
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जिसको देखते हुए ग्रामीणों ने बीती रात में सीएचसी अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर गांव के हालात से अवगत कराया था। जिस पर शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव जाकर 140 लोगों की बुखार की दवा बांटी हैं। ग्रामीणों का कहना है स्वास्थ्य विभाग की टीम मीटिंग का बहाना करके गांव से जल्दी ही चली गई है।
बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या करीब पांच सौ है, लेकिन टीम केवल खानापूर्ति करके चली गई है। ऐसे में लगातार गांव में हो रही मौतें और बुखार से बढ़ रही बीमारी से ग्रामीण खौफजदा है।
तेज बुखार के बाद नाक कान से आया खून, हुई मौत
गांव के मोहित ने बताया कि हमारे बड़े भाई छत्रपाल को बीती 10 अगस्त को तेज बुखार आया था। एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। 12 अगस्त की रात में नाक कान से खून आया और उनकी मौत हो गई।
आक्सीजन की कमी से हुई पति की मौत
गांव की निर्मला देवी ने बताया कि पति रामनरेश को बुखार आने के बाद हालत बिगड़ने पर अस्पताल में 15 जुलाई को भर्ती कराया गया था। जहां पर डाक्टरों नेे पति को ऑक्सीजन लगाया था, 16 जुलाई को पति की मौत हो गई।
15 दिन से बुखार आ रहा था, फिर मौत हो गई
गांव के सरोज ने बताया कि छह दिन पहले हमारी माता चंद्रकली की मौत हो गई। इधर उधर से दवा ला रहे थे, 15 दिन से बुखार आ रहा था। अपनी मां को बचाने में नाकामयाब रहे।
सरकारी अस्पताल मे महंगा इलाज
गांव के अय्याज खान ने बताया कि सरकारी अस्पताल सीएचसी में तो डाक्टर छह से सौ से सात सौ रुपये की दवा लिखते है। यह बाहर के मेडिकल स्टोर से लेना पड़ता हैं। ऐसे में झोलाछाप के पास जाना पड़ता हैं।
टीम भेजकर लोगों का कराया जा रहा इलाज
सीएचसी अधीक्षक डॉ. रमाशंकर यादव ने बताया कि टीम गांव भेजी गई थी। लोगों का इलाज कराया जा रहा है। मौत के बारे जानकारी नहीं है। सीएचसी पर अगर कोई डॉक्टर बाहर की महंगी दवा लिखता है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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क्षेत्र के असोडर गांव में इस समय संक्रामक रोगों का प्रकोप फैला हुआ है, एक माह के अंदर 10 लोगों की जान जा चुकी हैं। गांववालों के मुताबिक एक माह से लोगों को तेज बुखार आ रहा हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोग बुखार की चपेट में आ रहे है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल सतर्क नहीं है। सुबह से शाम तक अपने परिजनों के इलाज के लिए दर-दर भटकते रहते है।
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ग्रामीणों ने सीएचसी खैराबाद के डाक्टरों पर आरोप लगाते हुए कहा मुनाफाखोरी के चक्कर में डॉक्टर मेडिकल स्टोरों से सांठगांठ कर एक बुखार के मरीज को छह सौ से लेकर सात सौ रुपये तक बाहर की दवा लिखकर कमाई कर रहे है। इसलिए हम लोग सरकारी अस्पताल न जाकर प्राइवेट डॉक्टरों व झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर है।
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जिसको देखते हुए ग्रामीणों ने बीती रात में सीएचसी अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर गांव के हालात से अवगत कराया था। जिस पर शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव जाकर 140 लोगों की बुखार की दवा बांटी हैं। ग्रामीणों का कहना है स्वास्थ्य विभाग की टीम मीटिंग का बहाना करके गांव से जल्दी ही चली गई है।
बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या करीब पांच सौ है, लेकिन टीम केवल खानापूर्ति करके चली गई है। ऐसे में लगातार गांव में हो रही मौतें और बुखार से बढ़ रही बीमारी से ग्रामीण खौफजदा है।
तेज बुखार के बाद नाक कान से आया खून, हुई मौत
गांव के मोहित ने बताया कि हमारे बड़े भाई छत्रपाल को बीती 10 अगस्त को तेज बुखार आया था। एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। 12 अगस्त की रात में नाक कान से खून आया और उनकी मौत हो गई।
आक्सीजन की कमी से हुई पति की मौत
गांव की निर्मला देवी ने बताया कि पति रामनरेश को बुखार आने के बाद हालत बिगड़ने पर अस्पताल में 15 जुलाई को भर्ती कराया गया था। जहां पर डाक्टरों नेे पति को ऑक्सीजन लगाया था, 16 जुलाई को पति की मौत हो गई।
15 दिन से बुखार आ रहा था, फिर मौत हो गई
गांव के सरोज ने बताया कि छह दिन पहले हमारी माता चंद्रकली की मौत हो गई। इधर उधर से दवा ला रहे थे, 15 दिन से बुखार आ रहा था। अपनी मां को बचाने में नाकामयाब रहे।
सरकारी अस्पताल मे महंगा इलाज
गांव के अय्याज खान ने बताया कि सरकारी अस्पताल सीएचसी में तो डाक्टर छह से सौ से सात सौ रुपये की दवा लिखते है। यह बाहर के मेडिकल स्टोर से लेना पड़ता हैं। ऐसे में झोलाछाप के पास जाना पड़ता हैं।
टीम भेजकर लोगों का कराया जा रहा इलाज
सीएचसी अधीक्षक डॉ. रमाशंकर यादव ने बताया कि टीम गांव भेजी गई थी। लोगों का इलाज कराया जा रहा है। मौत के बारे जानकारी नहीं है। सीएचसी पर अगर कोई डॉक्टर बाहर की महंगी दवा लिखता है तो इसकी जांच कराई जाएगी।