{"_id":"63bb01f0bbb0fb5b2071c695","slug":"inadequate-arrangements-for-protection-from-cold-the-cattle-remained-cold-sitapur-news-lko665702226","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sitapur News: सर्दी से बचाव के इंतजाम नाकाफी, ठिठुर रहे गोवंश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sitapur News: सर्दी से बचाव के इंतजाम नाकाफी, ठिठुर रहे गोवंश
विज्ञापन
सकरन ब्लॉक की बगहाढांक गौशाला में टीनशेड में नहीं लगाया गया तिरपाल। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सांडा (सीतापुर)। शीतलहर व गलन भरी सर्दी के बीच गोशालाओं में मवेशी ठिठुरने को मजबूर हैं। गोवंशों को सर्दी के बचाने के लिए उन पर जूट का बोरा अथवा झाल तक नहीं डाला गया है। ठंड से बचाव के इंतजाम नाकाफी होने से गोवंश बीमार पड़ रहे हैं। दो दिन पहले कलिमापुर की गोशाला में चार गोवंशों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी जिम्मेदार गोवंशों को ठंड से बचाव को लेकर संजीदा नहीं हैं।
ब्लॉक सकरन क्षेत्र में छह गोशालाएं संचालित हैं। इनमें 1086 गोवंश संरक्षित हैं। सर्दी का सीजन शुरू होते ही डीएम अनुज सिंह ने बैठक कर गोशालाओं में मवेशियों के ठंड से बचाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। मगर डीएम के आदेशों का सकरन इलाके की गोशालाओं में पालन नहीं किया जा रहा है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को गोशालाओं का जायजा लिया तो हालात चिंताजनक दिखाई दिए। गोशालाओं में मवेशियों को सर्दी से बचाने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
गोवंशों के ऊपर जूट का बोरा अथवा झाल तक नहीं डाला गया है। जिस टीन के नीचे मवेशी बांधे जाते हैं, वह चारों तरफ से खुला है। दिन के समय टीन शेड के नीचे कुछ देर ठहरने से ही शीतलहर ने कंपकंपी छुड़ा दी। ऐसे में रात को मवेशियों की ठंड में क्या हालत होती होगी सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। चारे के नाम पर भूसा व पुआल है, लेकिन हरे चारे की उपलब्धता किसी गोशाला में नहीं है। लापरवाही का यह आलम तब है जब दो दिन पहले कलिमापुर की गोशाला में ठंड व बीमारी से चार गोवंशों की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
टीन शेड हर तरफ से खुला, ठिठुरते गोवंश
सकरन ब्लॉक मुख्यालय से महज चंद कदम की दूरी पर बगहाढाक की गोशाला भी बदइंतजामी का शिकार है। 200 मवेशियों की क्षमता वाली इस गोशाला में भीषण ठंड के दौरान भी टीन शेड चारों तरफ से खुला है। जबकि तिरपाल या पल्ली से टीन शेड को कवर किया जाना चाहिए, ताकि सर्द हवाओं से मवेशियों को बचाया जा सके। मवेशियों पर जूट का बोरा अथवा झाल तक नहीं डाली गई है।
गोवंशों पर झाल तक नहीं डाली गई
सकरन खुर्द की गोशाला में क्षमता से डेढ़ गुना अधिक मवेशी हैं। यहां 200 पशुओं की क्षमता है जबकि 355 मवेशियों को रखा गया है। टीन शेड यहां भी खुला है। मवेशियों की संख्या को देखते हुए टीन शेड पर्याप्त नहीं है। यहां भी मवेशियों को सर्दी से बचाने के लिए उन पर बोरे अथवा झाल नहीं डाली गई है। भीषण सर्दी के बीच मवेशी ठिठुरते रहते हैं। यही हाल कम्हरिया खुनखुन समेत अन्य गोशाला का है।
कहां कितने मवेशी
गोशाला गोवंश
देवतापुर- 174
किरतापुर- 170
बगहाढांक- 200
सकरन खुर्द- 355
कम्हरिया खुनखुन- 102
कलिमापुर- 85
हो सकता है हाइपोथर्मिया
सर्दी की चपेट में आकर मवेशी हाइपोथर्मिया जैसै रोग का शिकार हो जाते हैं। सर्दी से बचाव के उचित प्रबंध कर बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। गोशालाओं का नियमित निरीक्षण किया जाता है। जो मवेशी बीमार मिलते हैं उनका इलाज किया जाता है।
- डॉ. राजेश प्रसाद, पशु चिकित्साधिकारी, सकरन
तत्काल दूर कराते कमियां
गोशालाओं का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जो कमियां मिलती हैं, उन्हें तत्काल दूर कराया जाता है। संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए जाते हैं।
- राम लखन वर्मा, बीडीओ, सकरन
विज्ञापन
ब्लॉक सकरन क्षेत्र में छह गोशालाएं संचालित हैं। इनमें 1086 गोवंश संरक्षित हैं। सर्दी का सीजन शुरू होते ही डीएम अनुज सिंह ने बैठक कर गोशालाओं में मवेशियों के ठंड से बचाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। मगर डीएम के आदेशों का सकरन इलाके की गोशालाओं में पालन नहीं किया जा रहा है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को गोशालाओं का जायजा लिया तो हालात चिंताजनक दिखाई दिए। गोशालाओं में मवेशियों को सर्दी से बचाने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
विज्ञापन
गोवंशों के ऊपर जूट का बोरा अथवा झाल तक नहीं डाला गया है। जिस टीन के नीचे मवेशी बांधे जाते हैं, वह चारों तरफ से खुला है। दिन के समय टीन शेड के नीचे कुछ देर ठहरने से ही शीतलहर ने कंपकंपी छुड़ा दी। ऐसे में रात को मवेशियों की ठंड में क्या हालत होती होगी सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। चारे के नाम पर भूसा व पुआल है, लेकिन हरे चारे की उपलब्धता किसी गोशाला में नहीं है। लापरवाही का यह आलम तब है जब दो दिन पहले कलिमापुर की गोशाला में ठंड व बीमारी से चार गोवंशों की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
टीन शेड हर तरफ से खुला, ठिठुरते गोवंश
सकरन ब्लॉक मुख्यालय से महज चंद कदम की दूरी पर बगहाढाक की गोशाला भी बदइंतजामी का शिकार है। 200 मवेशियों की क्षमता वाली इस गोशाला में भीषण ठंड के दौरान भी टीन शेड चारों तरफ से खुला है। जबकि तिरपाल या पल्ली से टीन शेड को कवर किया जाना चाहिए, ताकि सर्द हवाओं से मवेशियों को बचाया जा सके। मवेशियों पर जूट का बोरा अथवा झाल तक नहीं डाली गई है।
गोवंशों पर झाल तक नहीं डाली गई
सकरन खुर्द की गोशाला में क्षमता से डेढ़ गुना अधिक मवेशी हैं। यहां 200 पशुओं की क्षमता है जबकि 355 मवेशियों को रखा गया है। टीन शेड यहां भी खुला है। मवेशियों की संख्या को देखते हुए टीन शेड पर्याप्त नहीं है। यहां भी मवेशियों को सर्दी से बचाने के लिए उन पर बोरे अथवा झाल नहीं डाली गई है। भीषण सर्दी के बीच मवेशी ठिठुरते रहते हैं। यही हाल कम्हरिया खुनखुन समेत अन्य गोशाला का है।
कहां कितने मवेशी
गोशाला गोवंश
देवतापुर- 174
किरतापुर- 170
बगहाढांक- 200
सकरन खुर्द- 355
कम्हरिया खुनखुन- 102
कलिमापुर- 85
हो सकता है हाइपोथर्मिया
सर्दी की चपेट में आकर मवेशी हाइपोथर्मिया जैसै रोग का शिकार हो जाते हैं। सर्दी से बचाव के उचित प्रबंध कर बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। गोशालाओं का नियमित निरीक्षण किया जाता है। जो मवेशी बीमार मिलते हैं उनका इलाज किया जाता है।
- डॉ. राजेश प्रसाद, पशु चिकित्साधिकारी, सकरन
तत्काल दूर कराते कमियां
गोशालाओं का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जो कमियां मिलती हैं, उन्हें तत्काल दूर कराया जाता है। संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए जाते हैं।
- राम लखन वर्मा, बीडीओ, सकरन