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Sitapur News: 15 साल से अवैध तरीके से हो रहे थे प्रसव, सील
Thu, 01 Jun 2023 12:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 01 Jun 2023 12:03 AM IST
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जहांगीराबाद(सीतापुर)। कस्बे में करीब 15 साल से अनाधिकृत तौर पर एक ही कमरे में प्रसव होते मिले। बाकायदा यहां पर महिलाओं को भर्ती करके पूरा इलाज किया जाता है। इसके बदले उन्हें मोटी रकम भी वसूली जाती थी।
बुधवार को जब छापा मारा गया तो ऑपरेशन साम्रगी मिलने पर इसे सील कर दिया गया है। सदरपुर थाने में मुकदमा भी लिखाया गया है। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आखिर 15 साल से अस्पताल चल रहा था और किसी को खबर तक नहीं थी। सूत्रों का कहना है यह सब विभाग की जानकारी में था। लेकिन कार्रवाई करने की कोई जहमत नहीं उठा रहा था।
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इसके अलावा एक अन्य अस्पताल अपंजीकृत मिलने पर सील करने की कार्रवाई की गई है। कस्बे में बिसवां सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमित कपूर ने अपनी टीम के साथ उत्तर वार्ड नंबर तीन में बिलकीस के आवास पर छापा मारा।
यहां पर एक ही कमरे में प्रसव केंद्र चलने की जानकारी मिली। टीम को देखते ही बिलकीस भाग गई। कमरे में डिलीवरी टेबिल, आईवी फ्लड, क्रिपसेट, ग्लूकोमीटर आदि उपकरण मिले। डिलीवरी कराने आई कुछ महिलाओं से बात की, लेकिन उन्होंने अपना नाम व पता नहीं बताया। मौके पर इनके पुत्र मोहम्मद उमर मिले, जिन्होंने यहां पर प्रसव होने की बात स्वीकार की।
इस पर अस्पताल को सील करते हुए सदरपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इसके बाद टीम ने जहांगीराबाद टैम्पो स्टैंड के पास खुली एक क्लीनिक में छापा मारा। यह क्लीनिक जहांगीराबाद निवासी आकिब जावेद चला रहे थे।
अधीक्षक ने मरीजों को लिखी गई दवाइयों के पर्चे जांचे। डिस्पेंसरी की भी जांच की गई। यह अस्पताल भी अपंजीकृत मिला। क्लीनिक संचालित कर रहे आकिब जावेद ने बताया कि उनके पास नैचुरोपैथी का रजिस्ट्रेशन है। रजिस्ट्रेशन की काॅपी जांच के लिए अधीक्षक ने ले ली है। कुछ प्रतिबंधित दवाएं भी मिली। इस पर इसे सील करने की कार्रवाई की गई है। टीम में मुरली मनोहर त्रिवेदी, डॉ. योगेन्द्र श्रीवास्तव व डॉ. नवीन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
अधिकतर गैर कानूनी होते थे प्रसव
एक मरीज ने बताया बिलकीस की क्लीनिक पर अधिकतर दो से चार माह तक के गैर कानूनी प्रसव होते थे। बहुत से लोग जल्द बच्चा नहीं चाहते हैं। इससे सरकारी अस्पताल जब प्रसव नहीं करते थे तो लोग यहां पर आते थे। बिलकीस खुद ही इस तरह के प्रसव करके पांच से 10 हजार तक वसूलती थी। यह खेल लंबे समय से चल रहा था।
अधीक्षक डॉ. अमित कपूर ने बताया कि जानकारी मिली थी कि जहांगीराबाद कस्बे में कई अपंजीकृत अस्पताल क्लीनिक व दवाइयों की दुकानें संचालित की जा रही हैं। इसी आधार पर जांच करके कार्रवाई की गई है। दो अस्पतालों को सील कर दिया गया है। मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। इससे पहले भी बिलकीस को नोटिस दी गई थी।
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बुधवार को जब छापा मारा गया तो ऑपरेशन साम्रगी मिलने पर इसे सील कर दिया गया है। सदरपुर थाने में मुकदमा भी लिखाया गया है। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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आखिर 15 साल से अस्पताल चल रहा था और किसी को खबर तक नहीं थी। सूत्रों का कहना है यह सब विभाग की जानकारी में था। लेकिन कार्रवाई करने की कोई जहमत नहीं उठा रहा था।
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इसके अलावा एक अन्य अस्पताल अपंजीकृत मिलने पर सील करने की कार्रवाई की गई है। कस्बे में बिसवां सीएचसी अधीक्षक डॉ. अमित कपूर ने अपनी टीम के साथ उत्तर वार्ड नंबर तीन में बिलकीस के आवास पर छापा मारा।
यहां पर एक ही कमरे में प्रसव केंद्र चलने की जानकारी मिली। टीम को देखते ही बिलकीस भाग गई। कमरे में डिलीवरी टेबिल, आईवी फ्लड, क्रिपसेट, ग्लूकोमीटर आदि उपकरण मिले। डिलीवरी कराने आई कुछ महिलाओं से बात की, लेकिन उन्होंने अपना नाम व पता नहीं बताया। मौके पर इनके पुत्र मोहम्मद उमर मिले, जिन्होंने यहां पर प्रसव होने की बात स्वीकार की।
इस पर अस्पताल को सील करते हुए सदरपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इसके बाद टीम ने जहांगीराबाद टैम्पो स्टैंड के पास खुली एक क्लीनिक में छापा मारा। यह क्लीनिक जहांगीराबाद निवासी आकिब जावेद चला रहे थे।
अधीक्षक ने मरीजों को लिखी गई दवाइयों के पर्चे जांचे। डिस्पेंसरी की भी जांच की गई। यह अस्पताल भी अपंजीकृत मिला। क्लीनिक संचालित कर रहे आकिब जावेद ने बताया कि उनके पास नैचुरोपैथी का रजिस्ट्रेशन है। रजिस्ट्रेशन की काॅपी जांच के लिए अधीक्षक ने ले ली है। कुछ प्रतिबंधित दवाएं भी मिली। इस पर इसे सील करने की कार्रवाई की गई है। टीम में मुरली मनोहर त्रिवेदी, डॉ. योगेन्द्र श्रीवास्तव व डॉ. नवीन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
अधिकतर गैर कानूनी होते थे प्रसव
एक मरीज ने बताया बिलकीस की क्लीनिक पर अधिकतर दो से चार माह तक के गैर कानूनी प्रसव होते थे। बहुत से लोग जल्द बच्चा नहीं चाहते हैं। इससे सरकारी अस्पताल जब प्रसव नहीं करते थे तो लोग यहां पर आते थे। बिलकीस खुद ही इस तरह के प्रसव करके पांच से 10 हजार तक वसूलती थी। यह खेल लंबे समय से चल रहा था।
अधीक्षक डॉ. अमित कपूर ने बताया कि जानकारी मिली थी कि जहांगीराबाद कस्बे में कई अपंजीकृत अस्पताल क्लीनिक व दवाइयों की दुकानें संचालित की जा रही हैं। इसी आधार पर जांच करके कार्रवाई की गई है। दो अस्पतालों को सील कर दिया गया है। मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। इससे पहले भी बिलकीस को नोटिस दी गई थी।